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कांटाटोली फ्लाईओवर : तय डेडलाइन की जगह दिसंबर 2019 या जनवरी 2020 तक पूरा होगा निर्माण

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  • 27 अप्रैल 2019 को फ्लाईओवर बनकर तैयार हो जाना था, अभी बन रहा है सिर्फ बेस
  • सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन और पेट्रोल पंप की टंकी की समस्या आने से धीमा हुआ कांटाटोली फ्लाईओवर का काम
  • बस टर्मिनल के मुख्य द्वार को करना है 25 फीट से 48 फीट चौड़ा, पर जमीन अधिग्रहण है बड़ी समस्या

Ranchi : कांटाटोली फ्लाईओवर निर्माण कार्य की गति धीमी हो रही है. नगर विकास विभाग के अधीन हो रहा फ्लाईओवर निर्माण कार्य 27 अप्रैल 2019 तक पूरा कर लिया जाना था, लेकिन विभाग के समक्ष अब भी कई समस्याएं बनी हुई हैं. इसके कारण फ्लाईओवर निर्माण कार्य में अभी और 12 माह का समय लग सकता है. वर्तमान में फ्लाईओवर के लिए सिर्फ बेस बनाने का काम प्रगति पर है. धीमी गति से काम चलने के पीछे का कारण खादगढ़ा स्थित बिरसा मुंडा बस टर्मिनल के समीप सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन और पेट्रोल पंप की टंकी का सामने आना है. कांटाटोली से कोकर की ओर 44 पाइलिंग और कांटाटोली से बहू बाजार की ओर नर्सरी तक जमीन के नीचे 8 पाइलिंग (पिलर का खोदा गया गड्ढा) का काम पूरा किया जा चुका है. जुडको के मुताबिक अब तक दोनों तरफ पाइपलाइन का काम 90 प्रतिशत हो चुका है. एक सप्ताह के भीतर पाइलिंग का कार्य पूरा कर लिया जायेगा. पाइपलाइन का काम पूरा होते ही मुख्य रोड में डायवर्सन कर आगे का कार्य शुरू किया जायेगा.

1250 मीटर बनना है फ्लाईओवर,  डेडलाइन है 27 अप्रैल 2019

मालूम हो कि कुल 1250 मीटर लंबे और 16.6 मीटर चौड़े कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण बहू बाजार वाईएमसीए से कोकर शांति नगर तक किया जाना है. इसे बनाने के लिए विभाग की तरफ से 27 अप्रैल 2019 की डेडलाइन निर्धारित हुई थी. लेकिन, जिस गति से कार्य चल रहा है, उसे देख अब जुडको के अधिकारी एवं साइट इंजीनियर भी मानते हैं कि फ्लाईओवर निर्माण कार्य दिसंबर 2019 या जनवरी 2020 तक ही पूरा हो सकेगा. ऐसे में इसमें अतिरिक्त 12 माह का समय लगेगा.

अतिक्रमण हटाने का कार्य ही हुआ था लेट से, अभी भी हैं कई चुनौतियां

फ्लाईओवर निर्माण देख रहे जुडको के अधिकारी प्रत्यूष आनंद का कहना है कि एक तो फ्लाईओवर निर्माण कार्य से पहले अतिक्रमण हटाने का कार्य ही लेट से शुरू हुआ था. दूसरी तरफ अभी भी विभाग के समक्ष कई चुनौतियां विद्यमान हैं. उसमें एक तो खदगाढ़ा स्थित बिरसा मुंडा बस टर्मिनल के पास वाली सड़क का होना है. बस टर्मिनल के पास बस के प्रवेश के लिए 25 फीट चौड़ी सड़क है, जबकि उसे कम से कम 48 फीट किये जाने की जरूरत है. इसके लिए जमीन अधिग्रहण में परेशानी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी तरह कांटाटोली से बहू बाजार की तरफ जाने के बीच दो पेट्रोल पंप हैं. पेट्रोल पंप की टंकी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आयी है, तो दूसरी तरफ पेट्रोल पंप के संचालक ने कोर्ट में मुकदमा किया हुआ है. इसी तरह निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण में लगभग 112 लोगों के मकान,  दुकान, दीवार तोड़े गये थे, जिन्हें आठ माह बीतने के बाद भी अभी तक कई लोगों को मुआवजा नहीं दिया जा सका है. उन्होंने बताया कि इसके पीछे कुछ कानूनी अड़चन भी है.

डायवर्सन बनने के बाद होगा पाइल निर्माण काम 

बिरसा मुंडा बस टर्मिनल से वाईएमसीए तक पाइल निर्माण का कार्य मुख्य सड़क के पास बनने जा रहे डायवर्सन के बाद ही शुरू होगा. इस निर्धारित क्षेत्र में कुल तीन पिलर का निर्माण होना है. डायवर्सन निर्माण के बाद मुख्य सड़क को ब्लॉक कर पाइल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. फिलहाल दोनों तरफ युद्ध स्तर पर पाइपलाइन का काम चल रहा है. कार्य पूरा होते ही मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग कर पाइल निर्माण का कार्य शुरू किया जायेगा. बाद में इसी डायवर्सन रोड से वाहनों का आवागमन हो सकेगा.

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया है एक बड़ा पेंच

बिरसा मुंडा बस टर्मिनल (खादगढ़ा बस स्टैंड) के निकास द्वार के चौड़ीकरण के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी भी अधर में है. जमीन अधिग्रहण नहीं होने के कारण फिलहाल बस टर्मिनल के प्रवेश द्वार से कांटाटोली चौक तक पाइल निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं हो सका है. यदि इस क्षेत्र में पाइल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गयी, तो टर्मिनल का प्रवेश द्वार बंद करना होगा. दूसरी ओर निकास द्वार का चौड़ीकरण नहीं होने के कारण प्रवेश द्वार को तोड़ना होगा, जो फिलहाल संभव नहीं है.

चौराहे पर पाइल निर्माण सबसे बड़ी चुनौती, वैकल्पिक मार्ग बनाना है जरूरी

फ्लाईओवर निर्माण के तहत कांटाटोली चौक (चौराहा) पर दोनों ओर छह पिलर का निर्माण होना है. इससे पूर्व यहां पाइपलाइन का काम पूरा किया जा रहा है. हालांकि, वाहनों के आवागमन की स्थिति को देखॉकर फिलहाल यह कार्य संभव नहीं दिखता है. चौराहे पर पाइल निर्माण करने के लिए मुख्य सड़क को ब्लॉक करने की आवश्यकता होगी. इससे पूर्व वाहनों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए वैकल्पिक मार्गों को व्यवस्थित करने की जरूरत है.

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