HEALTH

कांके सीएचसी: नया बिल्डिंग हुआ खंडहर, छोटे से कमरे में कराया जाता है प्रसव

Chandan Choudhary

Ranchi: कांके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के छोटे से कमरे में गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है.  जबकि बगल में ही लगभग आठ करोड़ रुपए का बिल्डिंग है. अस्पताल का यह भवन पिछले 6 साल पहले बनकर तैयार हुआ था. आज यह इस्तेमाल किये बिना जर्जर हो चला है. दिन ब दिन इस बिल्डिंग की दशा बिगड़ती जा रही है. आज बिल्डिंग का अधिकांश हिस्सा जर्जर हो चुका है. भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है.

यह सरकार की उदासीनता का ही नतीजा है कि जहां स्वास्थ्य सुविधायें मिलनी चाहिए वह जर्जर हो रहा है और महिलाओं का प्रसव छोटे से कमरे में कराया जा रहा है. सामुदायिक केंद्र में सिर्फ नार्मल डिलीवरी ही कराने की व्यवस्था है. जब भी सर्जरी की नौबत आती है, पेसेंट को रिम्स या सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है.

कांके सीएचसी के प्रभारी डॉ एसके साबरमली ने बताया कि विवाद के कारण अबतक उस जमीन पर स्वास्थ्य केंद्र शिफ्ट नहीं किया जा सका है. निर्माण होने से पहले से ही विवाद चल रहा है, जो अब भी जारी है. सरकार प्रयास करे तो कोई न कोई समाधान जरुर निकलेगा.

स्टोर रुम नहीं, रहता है दवाईयों का अभाव

कांके सीएचसी के एक कर्मचारी ने बताया कि इस स्वास्थ्य केंद्र में हमेशा दवाईयां खत्म रहती हैं. अपना स्टोर रुम नहीं होने के कारण ज्यादा दवाईयां लाकर रखने में परेशानी होती है. जैसे-जैसे डिमांड आता है उसकी एक सूची बनाकर जिला को भेजते है, इस कार्य को करने में चार से पांच दिन का समय लग जाता है. इसके बाद कुछ-कुछ सामग्री भेजी जाती है. यदि 50 पेटी की डिमांड की गयी तो आधा ही भेजा जाता है. इससे दवाईयां जल्दी खत्म हो जाती है, यदि अपना स्टोर रुम रहे तो हमलोग आवश्यकता से अधिक दवाईयां मंगाकर रख लेते. कर्मचारी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन बनने से एक उम्मीद जगी थी, लेकिन वह भी आधे में ही अटक गया.

राज्य में 188 और राजधानी में है 13 सीएचसी सेंटर

सीएचसी की यह हालत सिर्फ कांके की ही नहीं है, अधिकांश अस्पतालों की हालत एक जैसी ही है. झारखंड में 188 और रांची से 13 सीएचसी केंद्र चलाये जा रहे हैं. जयादातर की स्थिति खराब ही है. सामुदायिक केंद्रों के लिए नये भवन तो बना दिये गये, लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. इससे मरीजों की परेशानी बढ़ी है. इलाज की जो सुविधायें करीब के अस्पताल में मिलनी चाहिए, उसके लिए मरीजों को रिम्स या सदर अस्पताल जाना पड़ रहाह है.

कांके सीएचसी में इलाज कराने आये मरीजों ने बताया कि यहां हमारा बेहतर इलाज नहीं हो पाता है, सामुदायिक केंद्र होने के बाद भी हमे रांची के रिम्स, सदर या अन्य निजी अस्पतालों में जाकर इलाज कराना पड़ता है. दवाईयां लेना हो या किसी प्रकार की कोई जांच भी कराने होती है तो हमें दूसरे स्थानों पर ही जाना पड़ता है.

सिविल सर्जन वीबी प्रसाद ने बताया कि भवन का निर्माण करा रहे बिल्डर और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में कुछ कानूनी विवाद होने के कारण कांके सीएचसी को नये बिल्डिंग में शिफ्ट करने में कामयाबी नहीं मिल सकी. लेकिन, हम सभी इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे है. उम्मीद है नये भवन में इसे शिफ्ट करा लिया जायेगा.

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