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योग्यता नहीं रखने पर भी कान्हा रेस्टूरेंट को मिला विश्वा के हाउसकीपिंग और रखरखाव का जिम्मा

पेयजल और स्वच्छता विभाग के गोंदा प्रमंडल की तरफ से दिया गया काम, सलाना मिलेगा 23 लाख रुपये से अधिक

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Ranchi : पेयजल और स्वच्छता विभाग का प्रशिक्षण केंद्र विश्वा, कांके की हाउसकीपिंग और रख-रखाव का काम अब राजधानी की एजेंसी कान्हा रेस्टूरेंट करेगा. इस संस्थान को हॉटलिप्स के  एकरारनामे को रद्द करते हुए 2018-19  और अन्य वर्षों के लिए दिया गया है. विश्वा विभाग का प्रशिक्षण केंद्र है. जहां हर तरह के प्रशिक्षण का कोर्स संचालित करते हुए वहां पर बाहर से आनेवाले व्यक्तियों को ठहराने की समुचित व्यवस्था की जाती है. विभाग के अधिकारी पिछले कई वर्षों से अपने पसंदीदा व्यक्ति को विश्वा की देखरेख करने की कोशिश में लगे थे. यहां यह बताते चलें कि पुरानी एजेंसी के बकाये का भी भुगतान अब तक विभाग की तरफ से नहीं किया गया है. नयी चयनित एजेंसी को विभाग की तरफ से सलाना 23 लाख से अधिक का भुगतान किया जायेगा.

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दो बार निकाली गयी थी निविदा

कान्हा रेस्टूरेंट के लिए विभाग के अवर प्रमंडल गोंदा की तरफ से दो बार निविदा निकाली गयी. निविदा की शर्तों के अनुसार हाउसकीपिंग और रख-रखाव के लिए दो से तीन वर्ष का अनुभव होना जरूरी किया गया था. पहले इस कार्य के लिए मार्च में  आवेदन मंगाया गया. फिर शर्तों में बदलाव करते हुए निविदा मई में निकाली गयी. पहले निविदा के तहत सलाना 35 लाख रुपये से अधिक की निविदा निकाली गयी, जिसे घटा कर बाद में 24 लाख रुपये कर दिया गया. विभाग के कार्यपालक अभियंता तपेश्वर चौधरी की देख-रेख में निविदा के आवेदन खोले गये. इसमें हॉटलिप्स को हटाते हुए कान्हा रेस्टूरेंट का चयन किया गया.

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हॉटलिप्स कंपनी के बकाये का भुगतान अब तक नहीं

पीएचइडी के अवर प्रमंडल गोंदा की तरफ से अब तक पुरानी एजेंसी हॉटलिप्स को बकाये का भुगतान नहीं किया गया है. हॉटलिप्स को विश्वा के हाउसकीपिंग, गार्डेनिंग और सिक्यूरिटी का काम 2017-18 के लिए दिया गया था. 31 मार्च को कंपनी का कार्यकाल एकरारनामे के तहत समाप्त हो गया था. लेकिन कंपनी को न तो कार्य विस्तार और न ही बकाये का भुगतान किया गया. 27 अप्रैल 2018 और 12 जून 2018 को कंपनी की तरफ से बकाया राशि 6.40 लाख रुपये का भुगतान करने का आवेदन भी दिया गया. कंपनी के रंजन कुमार ने इस संबंध में विभागीय सचिव अराधना पटनायक और पीएमयू के कार्यपालक निदेशक को पत्र लिख कर बकाये के भुगतान की मांग भी की थी. पर न तो भुगतान किया गया और न ही किसी तरह का पत्राचार भी किया गया.

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