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निरंकुश मर्दानगी का वीभत्स रूप प्रस्तुत कर रही हैं कंगना रनौत

Subha

Jharkhand Rai

कंगना रनौत के संदर्भ में महिला होने की दुहाई हास्यास्पद है. वे निरंकुश मर्दानगी का वीभत्स रूप प्रस्तुत कर रही हैं. मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर कहना अपने दफ्तर को राम मंदिर और उस पर बाबर के हमले जैसे रूपक पेश करना न केवल अति हिंसक भाषा है. बल्कि इसमें दक्षिणपंथी राजनीति द्वारा घृणा और हिंसा फैलाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे बिंब हैं. मैं उनसे बहुत निराश हुई हूं.

एक संघर्षशील अभिनेत्री की प्रामाणिक भाषा वे नहीं बोल रही हैं. वे एकाधिकारवादी निरंकुश हिंसक भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं. यह भाषा एक स्त्री, एक अभिनेत्री की अनुपस्थिति को दर्ज करा रही है.

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Samford

उन्होंने इस समय अपने को पितृसत्ता के सबसे घिनौने रूप हिंसक अधिनायकवाद की परम भक्त के रूप मे पेश किया है. करणी सेना अकारण ही उनके समर्थन में नहीं आई है. करणी सेना पद्ममावत् फिल्म के संदर्भ में अपना स्त्री द्रोह, जौहर और सती जैसे मध्ययुगीन कर्मकांड के हिंसक समर्थन और अनेक तरह की हिंसा से लगातार प्रमाणित करती रही है.

 रानी लक्ष्मीबाई की छवि का अपहरण करके उनके ही विरुद्घ उसका इस्तेमाल किया जा रहा है. लक्ष्मीबाई न तो सती हुई थीं न ही उन्होंने जौहर किया था. न उन्होंने हमलावर सत्ता से कोई समझौता किया. उन्होंने अंग्रेजों की तानाशाही और एकाधिकारवाद का विरोध करते हुए शहादत पाई. वे सत्ता के लिये नहीं अपने वतन के लिये लड़ीं.

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कंगना रनौत की सुरक्षाकर्मियों के सुरक्षा चक्र के बीच चलते हुए जो छवि सामने आ रही, उसमें उनकी बॉडी लैंग्वेज एक माफिया सरगना जैसी दिखाई पड़ रही है. हम सब जानते हैं फिल्म जगत की बहुत सी समस्याएं हैं. जैसे हर क्षेत्र की अपनी समस्याएं होती हैं. उन पर चढ़कर केन्द्र सरकार का वरद हस्त प्राप्त करना सत्ता की दलाली का बड़ा संकेत है.

बहुत लोगों के घर गिराए जा रहे हैं बहुत लोगों को धमकियां मिल रही हैं. उन्हें सुरक्षा का कोई झूठा आश्वासन भी नहीं मिल रहा. जो सत्ता उन्हें उजाड़ रही है उसी सत्ता के हाथ में कंगना जी खेल रही हैं.

मेरा विनम्र निवेदन है कि मौजूदा स्त्री शरीरधारी सत्ताविक्षिप्त इस नए चरित्र की पुख़्ता शिनाख़्त करे. हम इसे साध्वियों, राष्ट्र सेविकाओं आदि के नये-नये अवतारों में रोज भुगत रहे हैं. इसका ताजा संस्करण एक अभिनेत्री के रूप में प्रकट हुआ है.

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डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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