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बिजली संकट गहराने पर युवा मोर्चा ने निकाला कैंडल मार्च 

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Dhanbad : बिजली संकट के विरोध शुक्रवार को युवा संघर्ष मोर्चा (जनवादी) के बैनर तले कैंडल सह ढिबरी मार्च निकाला गया. मोर्चा के सभी सदस्य पुराना बाजार पानी टंकी में जुटे और एक साथ सैकड़ों की संख्या में जुलूस निकालकर  बैंक मोड़, जेपी चौक तक  कैंडल मार्च निकाला. सभी ने अपने हाथों में तख्तियां लिए बिजली संकट का विरोध जताते हुए दिखे. मोर्चा के संयोजक दिलीप सिंह ने कहा कि जिले में बिजली की बदहाल आपूर्ति से जनता परेशान है. बढ़ती हुई गर्मी में पावर कट की समस्या और ज्यादा बढ़ गई है. शहर में दिन भर बिजली की आवाजाही लगी रहती है. कुछ देर बिजली रहने के बाद चली जाती है और घंटों नहीं आती है. यह सिलसिला रात में भी जारी रहता है.

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शहर में बिजली 5 से 6 घंटे ही मिल पाती है

भीषण गर्मी में लोग बिना बिजली के परेशान हो रहे हैं. बच्चे और बुजुर्गों को भी तकलीफ हो रही है. उद्योग धंधे पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.  सूबे की बिजली सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीण इलाका तो छोड़िए शहर में बिजली 5 से 6 घंटे ही मिल पाती है. घंटों बिजली कटौती की जा रही है. वहीं उन्होंने कहा कि महज 3 साल पहले झारखंड की बिजली के बारे में पड़ोसी राज्यों में चर्चा होती थी. लेकिन अब झारखंड की बिजली बदहाल हो चुकी है. जिन्हें बिजली बोर्ड का कर्णधार बनाया गया है वे अक्षम साबित हो रहे हैं.

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बिजली विभाग के साथ ही राज्य सरकार भी जिम्मेवार

यह स्थिति तब है जब सूबे के मुख्यमंत्री अपनी हर सभा में 2019 तक घर-घर बिजली देने की बात कह रहे है. सिंह ने कहा कि ऐसे ही बिजली की स्थिति रही तो मुख्यमंत्री का दिया हुआ नारा कैसे साकार होगा. क्या मुख्यमंत्री की बातें भी हवा हवाई है और जनता को सिर्फ बातों से ही काम चलाना पड़ेगा. जिले में बिजली की इतनी खराब स्थिति कभी नहीं थी. इसके लिए डीवीसी, बिजली विभाग के साथ ही राज्य सरकार भी जिम्मेवार है. राज्य से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार होने के बाद भी लोगों को बिजली संकट झेलना पड़ रहा है. समय पर बिजली भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है. लेकिन उन्हें निर्बाध बिजली देने के लिए विभाग कोई पहल नहीं कर रही है.

जबकि जिले के कोयले से बिजली उत्पन्न कर डीवीसी बंगाल समेत दूसरे राज्यों को निर्बाध बिजली दे रही है. यहां के लोग संकट झेल रहे हैं. इससे दुखद बात और क्या  हो सकती है. त्योहार शुरू होने वाले है, राहत देने के सारे दावे हवा हवाई साबित हो रहे है. लेकिन  लोग शांत रहने वाले नहीं है. 10 दिनों के अंदर बिजली की लचर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो युवा संघर्ष मोर्चा आंदोलन करने को बाध्य होगा. जिसकी सारी जिम्मेवारी बिजली विभाग एवं जनप्रतिनिधियों की होगी.

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