Opinion

अश्वेतों के बीच भी अब पहचान बना रही हैं कमला हैरिस  

Faisal  Anurag

अमेरिकी चुनावों में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ गयी है. तमिलनाडु में कमला हैरिस की उप राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के बाद उत्सव का माहौल है. वैसे तो भारतीयों की काफी दिलचस्पी अमेरिकी चुनावों में रहती है. लेकिन 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के लिए भारत में जहां-तहां यज्ञ किये गये थे. डोनाल्ड ट्रंप की मोदी से दोस्ती के किस्से आम हैं और मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में अमेरिका अहम हो चुका है. कमला हैरिस भारतीय मां और जमैकन पिता की अमरीकी संतान हैं. कमला हैरिस की मां और पिता बाद में अलग हो गये थे. कमला हैरिस अमेरिका में पिछले कई सालों से एक मुखर आवाज रही हैं.

वे राष्ट्रपति उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भी शामिल थीं, लेकिन जल्द ही जो वाइडन के पक्ष में मैदान से हट गयी थीं. वे डेमोक्रटिक पार्टी की सिनेटर हैं और अमेरिका में महिलाओं की एक बड़ी आवाज हैं. उनकी खास पहचान यह है कि वे अश्वेतों के साथ श्वेतों के बीच भी पसंद की जाती हैं. कमला हैरिस को अपनी अमेरिकी पहचान का गर्व भी है.

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कमला हैरिस अमेरीका की उन सिनेटरों में हैं, जो इकोनॉमिक जस्टिस की बात करती हैं. ट्रंप ने उनके मनोनयन पर आश्चर्य व्यक्त किया है. अमेरिका में आर्थिक असमानता के खिलाफ न्याय की बात करने वालों को वामपंथी मानने का नया प्रचलन है. जबकि कमला हैरिस एक ऐसी समझ की महिला हैं, जो दुनिया में गरीबों के पक्ष में खड़ी होती हैं और मानवाधिकारों की पैरोकारी करती हैं.

कश्मीर और नागरिकता मामले में उन्होंने भारत की कड़ी आलोचना की थी. इससे भारत की परेशानी बढ़ी थी. इस समय अमेरिका में अफ्रीकी मूल के 12 प्रतिशत मतदाता हैं, जबकि 14 लाख भारतीय हैं.  ब्लैक मैटर्स आंदोलन के बाद अश्वेतों का रूझान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर है. साथ ही श्वेत समुदाय भी इस समय ट्रंप से नाराज है.

आर्थिेक नीतियों और कोरोना के मामले में ट्रंप पहले से अमेरिकी मतदाताओं के निशाने पर हैं. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बेरोजगारों और गरीबों के बीच समर्थन बढ़ाने के लिए एक नये पैकेज की घोषणा की है. जिसे अमेरिका में चुनावी रिश्वत कहा जा रहा है. वाइडन और हैरिस ने तो ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा है, ट्रंप ने अमरीका को फटेहाल बना दिया है. वाजा संबंधी विवाद में भी ट्रंप को पीछे हटना पड़ा है. लेकिन इसका श्रेय तो डेमोक्रेट नेताओं को ही जाता है, जो ट्रंप की वीजा नीति के आलोचक रहे हैं. ट्रंप की उस नीति को लेकर अमेरिका का कॉरपारेट भी नाराज है, जिसमें दूसरे देशों के कामगारों को कम करने की बात कही गयी है.

भारत के संवेदनशील मामलों में अमेरिकी दिलचस्पी पहले से ज्यादा बढ़ी है. ट्रंप ने मोदी की अनेक नीतियों का समर्थन किया है. ट्रंप अनेक नीतियों के कारण अमेरिकी मतदाताओं में लगातार अलोकप्रिय हो रहे हैं. जनमत सर्वेक्षण में वे पिछड़ चुके हैं. मंगलवार को हुए जनमत सर्वेक्षण में भी ट्रंप वाइडन से दस अंकों से पीछे हैं. इसके और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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लेकिन अमेरिका के चुनावी विवाद में चीन और रूस के दखल का सवाल भी गंभीर बना हुआ है. रूस पर ट्रंप के समर्थन और चीन के विरोध करने तक ही मामला नहीं है. बल्कि उनकी हार जीत तय करने के दखल का आरोप हे. ऐसे में भारत के लिए भी अमेरिका चुनाव एक गंभीर मसला है. मोदी तो एक तरह से ट्रंप के लिए अमेरिका और अहमदाबाद में रैली तक कराकर प्रचार कराने का आरोप झेल चुके हैं.

आमतौर पर अमेरिका और भारत पिछले चार सालों में जिस तरह नजदकी आये हैं, उसने भारत की दिलचस्पी को बढ़ा दिया है. अमेरिका रक्षा सहित अनेक मामलों में अमेरिका का सहयोगी बनकर खड़ा है और अमेरिका भी भारत को एशिया में अपना बड़ा रणनीतिक सहयोगी मानने लगा है.

 

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