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सरकारी सुविधाओं का उपयोग निजी हित में कर रहे हैं कमाल खान : आमया

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Ranchi : सामाजिक संगठन आमया ने अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष कमाल खान सहित अन्य सदस्यों पर संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत काम करने का आरोप लगाया है. इस मामले में संगठन के अध्यक्ष एस. अली ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच करने की मांग की है. एस. अली ने कहा है कि अल्पसंख्यक आयोग का मुख्य काम अल्पसंख्यकों के अधिकारों सहित उनके साथ किये जा रहे भेदभाव, उपेक्षा आदि से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर कार्रवाई हेतु अनुशंसा करना है. इसके उलट आयोग के सदस्य पूरी तरह से राजनीतिक कार्यक्रम में व्यस्त हैं. आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य सभी सदस्य अपने राजनीतिक दल के राजनीतिक कार्यक्रम में व्यस्त रहते हैं. वे राज्य में हो रहे अब तक के उपचुनावों में प्रचारक के रूप में भी कार्य कर रहे हैं, जो संवैधानिक पद की गरिमा का उल्लंघन है. ऐसे में मामले की जांच करने की सख्त जरूरत है.

निजी फायदे में लगे हैं अध्यक्ष और सदस्य

एस. अली ने कहा है कि वर्तमान में राज्य में ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जिनसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हो रहा है. आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों को चाहिए कि संवैधानिक गरिमा के अनुरूप मामले में उचित कदम उठाकर पीड़ितों को न्याय दिलाते, लेकिन ऐसा न कर राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त उक्त सभी लोग सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर अपने निजी फायदे में लगे हैं, जो अंसवैधानिक है.

गिनाये अल्पसंख्यकों से जुड़े कई मामले

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सामाजिक संगठन ने अल्पसंख्यकों के ऐसे मामले गिनाये हैं, जो अभी तक लंबित हैं, लेकिन आयोग ने अपने स्तर पर कोई विशेष पहल नहीं की है. ऐसे मामले ये हैं-

  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद मॉब लिंचिंग में मारे गये सभी पीड़ित परिवारों (रामगढ़ कांड छोड़कर) को मुआवजा नहीं मिला है. फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन कर सुनवाई नहीं हो पा रही है.
  • मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं की रोकथाम हेतु न तो प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, न ही जिला में एसपी रैंक के अधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. यह कार्य मुख्य सचिव और गृह विभाग के माध्यम से होना है.
  • झारखंड हाई कोर्ट के 2018 में दिये निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग ने राज्य के प्लस टू स्कूलों में न तो अब तक उर्दू शिक्षक का पद सृजन किया है, न ही कॉंन्ट्रैक्ट पर बहाली की है.
  • शिक्षा विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन के नाम पर 126 मदरसों के शिक्षकों को 22 माह से वेतन जारी नहीं किया गया. जबकि, झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) ने उक्त सभी मदरसों को मानक के अनुसार माना है.
  • कल्याण विभाग ने एमएसडीपी योजना अंतर्गत चान्हो में नर्सिंग कॉलेज एवं दूसरे जिलों में बने आईटीआई पॉलिटेक्निक को निजी एजेंसी को दे दिया. एजेंसी द्वारा अल्पसंख्यक छात्रों का नामांकन न कर सभी के समान नियम बनाकर नामांकन ले लिये गये.
  • प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम संचालन हेतु 2015 में गठित राज्य एवं जिला 15 सूत्री कमिटी की बैठक नहीं हो पा रही है. केवल एक बार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई थी. लेकिन, उक्त बैठक में लिये गये निर्णयों का अब तक पालन नहीं किया जा रहा है.
  • अल्पसंख्यक विकास की सभी केंद्रीय योजनाओं का अनुपालन राज्य में नहीं हो रहा है.
  • अल्पसंख्यक समुदाय के भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन में लगातार भेदभाव किया जा रहा है.
  • ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय को धर्मांतरण के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है.

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