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कारनामा :  तीन सालों में कमल क्लब ने खेला महज एक टूर्नामेंट, खर्च हुए एक करोड़ रुपये

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Amit Jha

Ranchi :  राज्य में ग्रामीण स्तर से खेल प्रतिभाओं को सामने लाने को कमल क्लब का गठन किया गया है. वर्ष 2016 में कैबिनेट से कमल क्लब के गठन को मंजूरी मिली थी. पूर्व सीएम रघुवर दास ने राज्य के भावी युवाओं के उज्जवल भविष्य को संवारने और विकास करने के लिए कमल क्लब की स्थापना करने का निर्णय लिया था.

कमल को समृद्धि का प्रतीक बताते हुए युवाओं के लिए इस क्लब को आदर्श प्लेटफार्म बताया गया था. तीन बरस बीत गए, क्लबों को अनुदान के तौर पर एक करोड़ मिले भी. इतने दिनों में क्लब महज एक ही राज्यस्तरीय फ़ुटबाल टूर्नामेंट खेल सके हैं. क्लब के जरिये खेल खिलाड़ियों के लिए कितनी संभावनाएं बन रही हैं, कोई इसे बताने में सक्षम नहीं है.

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सीएम आमंत्रण कप तक ही सिमटा क्लब

वर्ष 2019 में रांची में मुख्यमंत्री आमंत्रण फ़ुटबाल कप टूर्नामेंट का आयोजन हुआ. 2016 से क्लब गठन की प्रक्रिया हुई थी. तीन सालों में जो क्लब औपचारिक रूप से गठित हो सके, उन्हें एकमात्र इसी राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिल सका.

क्लब के गठन के समय कहा गया था कि यह क्लब सिर्फ खेल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों व सामाजिक कार्यों में भी अपनी भूमिका निभायेगा. कला संस्कृति एवं खेल विभाग द्वारा कमल क्लब के गठन के लिए प्रक्रिया आरम्भ हुई थी. उत्कृष्ट क्लबों को जिम की सुविधा भी प्रदान करने की बात थी.

पर इन सबों के विपरीत तीन सालों में महज एक ही राज्यस्तरीय फुटबाल टूर्नामेंट खेलने का श्रेय क्लब ले सका है. पेटरवार, बोकारो के कमल क्लब प्रमुख सत्या सिंह के अनुसार क्लब गठन से लेकर उसके निबंधन के पेंच में डेग डेग पर समस्या आती रही.

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देखा जाए तो 2017 से लेकर 2019 तक तीन बार भी आमंत्रण कप का आयोजन होता तो क्लब गठन का मकसद समझ में आता.

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पहले चरण के सदस्यों का टर्म पूरा, नयी टीम का होगा चुनाव

वर्ष 2017 में राज्यभर में कमल क्लब के गठन की प्रक्रिया आरम्भ हुई थी. नियमानुसार क्लब में शामिल सदस्यों कार्यकाल तीन सालों के लिए ही है.

ऐसे में अब अगले टर्म के लिए नयी कमिटी के गठन की प्रक्रिया आरम्भ होगी. हालांकि जो क्लब पंजीकृत हो चुके हैं, उनका पंजीयन बना ही रहेगा. खेल निदेशालय जल्द ही राज्य सरकार को पत्र भेजकर क्लब के नए सदस्यों के चयन मसले पर मंतव्य मांगने की तयारी में है.

4377 पंचायतों में से 3544 पंचायतों में क्लब का हुआ है गठन

प्रावधान के अनुसार पंचायत से लेकर प्रखंड और जिला स्तर पर कमल क्लब का गठन किया जाना था. क्लब के चुनाव के बाद उसका एक बैंक खाता खोलना है. साथ ही गठित कमेटी का सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत कराने का निर्देश दिया गया था.

निबंधित संस्था के खाते में ही स्थानीय स्तर पर जिला खेल पदाधिकारी या संबंधित अधिकारी के माध्यम से अनुदान मिलना है. राज्य के 4377 पंचायतों में कमल क्लब के गठन की मुहिम 2016-17 से आरम्भ हुई थी. अब तक 3544 में ही औपचारिक रूप से क्लब का गठन और उसके निबंधन की प्रक्रिया पूरी हो सकी है.

इसी तरह 262 प्रखंडों के विरुद्ध 234 में क्लब के गठन और उसके निबंधन का काम पूरा हो सका है. 24 जिलों की अपेक्षा 21 में ही इस दिशा में पहल पूरी की जा सकी है.

कमल क्लब के गठन में हावी रही राजनीति

खेल या सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए कमल क्लब को सरकार से अनुदान मिलता है. आयोजन हेतु पंचायत स्तर पर 3600 रुपये और प्रखंड स्तर पर 4400 रुपये दिए जाने की बात थी. ऐसे में पंचायत से लेकर जिला स्तर पर कमल क्लब के गठन में कई जगहों पर राजनीति हावी रही.

दल विशेष के कार्यकर्ताओं को क्लब में शामिल किये जाने पर विवाद होता रहा. आपसी विवाद के फेर में कई जगहों पर 2017-18 और यहां तक कि अब भी सभी पंचायतों, प्रखंडों और जिला स्तर पर इसका गठन नहीं हो सका है.

पूर्व सी एम रघुवर दास ने क्लब के गठन के लिए कई बार उपायुक्तों और संबंधित पदाधिकारियों को डेड लाइन भी दिया पर उस पर अमल नहीं हो सका. सरकार ने विभिन्न जिलों के लिए लगभग 1-1 करोड़ रुपये तय कर रखे थे. कुछ जिलों के लिए तो 2017-18 में यह राशि जारी भी कर दी गयी थी.

प्रत्येक पंचायत स्तरीय कमेटी को एक लाख, प्रखंड को दो लाख तथा जिलास्तरीय कमेटी को पांच लाख रुपये दिए जाने की योजना थी. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तक़रीबन 20 करोड़ कमल क्लब को अनुदान के लिए जारी भी कर दिया गया था.

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