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राज्यपाल का कार्यकाल खत्म होने के बाद कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद केस में कर सकते हैं मुकदमे का सामना

New Delhi: राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का कार्यकाल तीन सितंबर को खत्म हो रहा है. उनकी जगह कलराज मिश्र को राज्य का नया गवर्नर नियुक्त किया जायेगा.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को राजस्थान के नये राज्यपाल के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र को नामित किया.
माना जा रहा है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद कल्याण सिंह को आपराधिक मुकदमें का सामना करना पड़ सकता है.

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक षडयंत्र के लिए मुकदमे का सामना वो कर सकते हैं. क्योंकि राज्यपाल के संवैधानिक पद के साथ उन्हें जो छूट मिली हुई है वह उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद खत्म हो सकती है.

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उच्चतम न्यायालय ने 19 अप्रैल 2017 को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के आरोप फिर से बहाल करने का आदेश दिया था.

उसने साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे सिंह को मुकदमे का सामना करने के लिये आरोपी के तौर पर बुलाया नहीं जा सकता क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपालों को संवैधानिक छूट मिली हुई है.

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने सीबीआइ से सिंह को राज्यपाल पद से हटने के तुरंत बाद आरोपी के तौर पर पेश करने के लिए कहा था.

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अनुच्छेद 361 के तहत मिली छूट

संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान आपराधिक तथा दीवानी मामलों से छूट प्रदान की गई है. इसके अनुसार, कोई भी अदालत किसी भी मामले में राष्ट्रपति या राज्यपाल को सम्मन जारी नहीं कर सकती.

इस घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘‘चूंकि राज्यपाल के रूप में सिंह का कार्यकाल खत्म हो गया है तो उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है, बशर्ते कि सरकार उन्हें किसी अन्य संवैधानिक पद पर नियुक्त न कर दे.’’

सिंह को तीन सितंबर 2014 को पांच साल के कार्यकाल के लिए राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया था.

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आपराधिक षडयंत्र में शामिल होने का आरोप

सिंह के खिलाफ सीबीआइ के मामले के अनुसार, उन्होंने उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे हुए राष्ट्रीय एकता परिषद को आश्वासन दिया था कि वह विवादित ढांचे को ढहाने नहीं देंगे और उच्चतम न्यायालय ने विवादित स्थल पर केवल सांकेतिक ‘कार सेवा’ की अनुमति दी थी.

साल 1993 में उनके खिलाफ सीबीआइ के आरोपपत्र के बाद 1997 में लखनऊ की एक विशेष अदालत ने एक आदेश में कहा था, ‘‘सिंह ने यह भी कहा था कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहे और उसे ढहाया न जाए लेकिन उन्होंने कथित तौर पर अपने वादों के विपरीत काम किया.’’

सीबीआइ ने यह भी आरोप लगाया था कि सिंह ने मुख्यमंत्री के तौर पर केंद्रीय बल का इस्तेमाल करने का आदेश नहीं दिया. विशेष अदालत ने कहा था, ‘‘इससे प्रथम दृष्टया यह मालूम पड़ता है कि वह आपराधिक षडयंत्र में शामिल थे.’’

गौरतलब है कि सिंह ने छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

सक्रिय राजनीति में करेंगे वापसी

खबर है कि राज्यपाल का कार्यकाल खत्म होने के बाद कल्याण सिंह सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगे. वो 5 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेंगे. लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ और स्वतंत्र देव सिंह, उन्हें पार्टी ऑफिस लाएंगे और फिर से उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाएंगे.

गौरतलब है कि कल्याण सिंह एक दौर में बीजेपी के कद्दावर चेहरा हुआ करते थे. वह उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे.

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