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महिलाओं के हौसले की उड़ान कल्पना चावला

जयंती पर विशेष

Naveen Sharma

कल्पना चावला एक ऐसा नाम है जो आधुनिक महिलाओं खासकर भारतीय महिलाओं के हौसले की उड़ान को दर्शाता है. भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक जज्बे के साकार होने की मिसाल है.

करनाल से अमेरिका की उड़ान

नासा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था.  उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था. कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी.

कल्पना चावला की प्रारंभिक पढ़ाई करनाल के टैगोर स्कूल में हुई. कल्पना ने 1982 में चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री और 1984 से टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. 1988 में उन्होंने नासा के लिए काम करना शुरू किया. कल्पना जेआरडी टाटा से प्रभावित और प्रेरित थीं. 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया.

पहली उड़ान

कल्पना ने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एसटीएस 87 कोलंबिया शटल से पूरी की. इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की.

दूसरी उड़ान में हुई दुर्घटना

इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी. 1 फरवरी 2002 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया.

इस घटना में कल्पना के साथ छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई. कल्पना भले ही हमारे बीच न हो मगर अंतरिक्ष में दिलचस्पी लेने वाली हर बेटी के लिए कल्पना चावला प्रेरणा की स्रोत रहेंगी.

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