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EXCLUSIVE : जमशेदपुर सदर अस्पताल जाकर हाथ गंवानेवाली कली शर्मा को लगा था कैंसरकारी रेनिटिडिन का इंजेक्शन, अमेरिका और यूरोप में बैन है यह दवा, DCI ने 2019 में जारी की थी चेतावनी

जमशेदपुर के सिविल सर्जन बोले – ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया की चेतावनी की जानकारी नहीं, स्वास्थ्य मंत्री का बयान नहीं मिला

Anand Kumar

Jamshedpur : जमशेदपुर के बागबेड़ा कीताडीह निवासी 16 वर्षीय कली शर्मा को सदर अस्पताल में गलत इलाज के कारण अपना दायां हाथ गंवाना पड़ा. 10वीं कक्षा में पढ़नेवाली इस मासूम बच्ची का हंसता-खेलता जीवन अब लाचारी के बोझ तले गुजरेगा. यह जाहिर होने के बाद भी कि कली को सरकारी सदर अस्पताल में गलत इंजेक्शन दिये जाने के बाद अपना हाथ गंवाना पड़ा है, किसी जनप्रतिनिधि ने उसकी हालत जानने अथवा उसकी मदद के लिए एक शब्द नहीं कहा. यहां तक कि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. इधर इस मामले में न्यूजविंग को जानकारी मिली है कि कली को उस दिन सदर अस्पताल में अन्य दवाओं के साथ रेनिटिडिन (Ranitidine)  का इंजेक्शन भी दिया गया था. रेनिटिडिन का इस्तेमाल पेट की एसिडिटी को कम करने के लिए किया जाता है. कई देशों के ड्रग रेगुलेटर ने इसमें हानिकारक रसायन होने की वजह से इसे अपने यहां प्रतिबंधित किया है. 24 सितंबर 2019 को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने रेनिटिडिन (Ranitidine)  पर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि इसमें ऐसे रसायन पाये जाते हैं, जिससे कैंसर हो सकता है.

सिविल सर्जन बोले – चेतावनी की जानकारी नहीं, स्वास्थ्य मंत्री का बयान नहीं मिला

डॉ साहिर पाल

ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा 2019 में रेनिटिडिन (Ranitidine)  को लेकर जारी की गयी चेतावनी के बारे में पूछे जाने पर पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल ने ऐसी किसी चेतावनी की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि वे इस बारे में पता लगाने की कोशिश करेंगे. जब इस मामले में मंत्री बन्ना गुप्ता का बयान लेने के लिए उऩके पीए सह प्रेस सलाहकार से कहा गया, तो उन्होंने कुछ समय मांगा लेकिन पांच घंटे बाद भी उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया.

संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया में बैन है यह दवा

Sanjeevani

रेनिटिडिन (Ranitidine)  एक सस्ती और बहुत पुरानी दवा है.. यह शेड्युल-एच के तहत एक प्रिसक्रिप्शन ड्रग है. अर्थात इसे दवा की दुकान से खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची की जरूरत होती है. सबसे पहले अमेरिका की एफडीए ने इसमें कैंसर के कारकों का पता लगाया था और इस बारे में अलर्ट जारी किया था. रैनिटिडीन की बिक्री कई देशों में या तो प्रतिबंधित है या  इसका उपयोग बेहद सीमित कर दिया गया है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया ने इस लोकप्रिय दवा की बिक्री पर रोक लगा रखी है, क्योंकि रेनिटिडीन का अणु एन-नाइट्रोसो-डाइमिथाइलमाइन या एनडीएमए नामक एक शक्तिशाली कार्सिनोजेन में टूट सकता है. कनाडा में इस दवा के निर्माताओं को कई बार अपने बैचों से दवा के नमूनों का परीक्षण करना पड़ता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एनडीएमए सुरक्षित सीमा से नीचे है.

2019 में ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने उत्पादन रोकने को कहा था

भारत में भी 2019 में चेतावनी जारी करते हुए इस दवा का उत्पादन करने वाली कंपनियों को तत्काल प्रभाव से इस दवा का उत्पादन रोकने के लिए कहा गया था. ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया के निर्देशों के तहत डॉक्टरों को यह सलाह जारी की गयी थी कि वे मरीजों को रेनिटिडिन लेने की सलाह ना दें. ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा 2019 में रेनिटिडिन (Ranitidine)  को लेकर चेतावनी जारी करने, इस दवा का उत्पादन रोकने और डॉक्टरों को यह दवा प्रिस्क्राइब नहीं करने की सलाह देने के बावजूद इस दवा का प्रयोग धड़ल्ले से जारी है. डीसीआई की रोक के बावजूद इसका उत्पादन जारी है और सरकारी अस्पतालों में इस दवा की खरीद भी हो रही है और मरीजों को यह दवा दी भी जा रही है.

भारत में 640 करोड़ से अधिक का है रैनिटिडीन का बाजार

साल 2020 में मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी AIOCD-AWACS ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में रैनिटिडीन का बाजार 640 करोड़ से अधिक का है. इस सेगमेंट की प्रमुख कंपनियों में कैडिला फार्मास्युटिकल्स और जेबी केमिकल्स शामिल हैं.

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