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अनिश्चितकालीन घेरा डालो, डेरा डालो धरनाः कड़कड़ाती ठंड में भी केंद्रीय मंत्री के घर के सामने डटे हैं पारा शिक्षक

पारा शिक्षक खुद भोजन बनाते हैं, खाते हैं, खिलाते हैं

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Barkagaon: रात की कड़कड़ाती ठंड या दिन शीतलहर पारा शिक्षकों के इरादों को डिगा नहीं पा रही है. केंद्रीय राज्य मंत्री सह हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा के आवास ऋषभ वाटिका के समक्ष सैंकड़ों की संख्या में पारा शिक्षक दिन-रात जमे हुए हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक सांसदों और विधायकों के आवास के समक्ष धरना देते रहेंगे. पारा शिक्षकों ने वैसे विधायकों और सांसदों को साधुवाद दिया, जो पारा शिक्षकों का दर्द समझ रहे हैं.

दुधमुंहे बच्चों के साथ पहुंची हैं पारा शिक्षिकाएं

ज्ञात हो कि समान काम, समान वेतन, टेट पास पारा शिक्षकों की सीधी नियुक्ति, जेल में बंद पारा शिक्षकों को बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर एकीकृत पारा शिक्षक संघ के तत्वाधान में सांसद जयंत सिंहा के आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो धरना दे रहे हैं. बड़कागांव प्रखंड, केरेडारी प्रखंड, पद्मा प्रखंड, टाटीझरिया प्रखंड, चुरचू प्रखंड डाड़ी समेत अन्य प्रखंडों के पारा शिक्षक धरना स्थल पर 25 नवंबर से जमे हुए हैं. धरना स्थल पर कई ऐसी महिला शिक्षिकाएं हैं, जो अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ पहुंची हैं. पारा शिक्षक वैसे स्थल पर बैठ कर धरना दे रहे हैं, जहां झाड़ियां और कूड़े का अंबार है. ऐसे स्थान में वह भोजन बना कर खाने को मजबूर हैं.

पारा शिक्षकों ने कहा कि 15 -16 वर्षों से हम सभी कम मानदेय में स्कूलों में शिक्षा दे रहे हैं. इतना ही नहीं  सरकारी शिक्षकों की तरह हम पठन-पाठन के साथ- साथ जनगणना, बाल गणना, पशु गणना, बीएलओ एवं चुनाव का कार्य करते आए हैं. लेकिन हमें समान काम समान वेतन नहीं दिया जा रहा है, जबकि भारतीय संविधान में समान काम, समान वेतन को लेकर सरकार द्वारा हमें छला गया.

मंत्री -विधायक अपना वेतन बढ़ाते हैं वह बोझ नहीं है क्या?

धरना स्थल पर पारा शिक्षकों ने कहा कि मंत्री व विधायक अपने लिए स्वयं वेतन एवं भत्ता बढ़ाते हैं. इसमें उन्हें वित्तीय बोझ नहीं लगता है. और जब पारा शिक्षक समेत अन्य अनुबंध कर्मी समान काम समान वेतन की मांग करते हैं, तो उन्हें वित्तीय बोझ लगने लगता है. लोकतंत्र में यह कैसा न्याय है? जनता अब समझ रही है. ऐसी सरकार को जनता माफ नहीं करेगी. जनता गद्दी पर बैठाना जानती है, तो गद्दी से उतारना भी जानती है. पारा शिक्षकों ने यह भी कहा कि एक हाथ से समान काम के बदले समान वेतन दो, दूसरे हाथ से वोट लो.

केंद्रीय मंत्री के घर से मिला चाय और बिस्किट का सहारा

सांसद के घर के आवास के समक्ष रात-दिन पारा शिक्षकों को देख कर लोगों को काफी दया आ रही थी. कड़ाके की ठंड में भी कंपकपाते हुए पारा शिक्षक सांसद के घर के समक्ष टिके हुए थे. यह देख कर 26 नवंबर की सुबह केंद्रीय राज्य मंत्री सांसद जयंत सिन्हा के घर से पारा शिक्षकों को चाय बिस्किट भिजवाया गया. दोपहर में भोजन सामग्री का भी सहारा मिला. इससे पारा शिक्षकों को उम्मीद जगी कि सांसद के नेतृत्व में झारखंड सरकार से इन्हें अवश्य न्याय मिलेगा.

पारा शिक्षक झारखंड के हैं मूल निवासी

पारा शिक्षकों ने कहा कि झारखंड के गांव-देहातों एवं शहरों में बच्चों को शिक्षा देनेवाले पारा शिक्षक झारखंड के मूल निवासी हैं. अगर हम पारा शिक्षकों को समान काम-समान वेतन और स्थाई नियुक्ति सरकार करती है, तो झारखंड निर्माण के लिए संघर्ष करनेवाले नेता बिरसा मुंडा, चांद-भैरव, निर्मल महतो समेत अन्य शहीदों के सपने साकार होंगे. लेकिन बड़ी-बड़ी कुर्सियों पर बैठनेवाले अधिकारी और सरकार शायद इस सपने को पूरा होते देखना नहीं चाहते हैं. क्योंकि जिस तरह से टेन प्लस टू हाई स्कूल में 75% बाहरी लोगों को नियुक्ति की गई है, उससे लगता है कि झारखंड-सरकार के पदाधिकारी हितैषी नहीं हैं. धरना स्थल पर भारी संख्या में पारा शिक्षक उपस्थित थे.

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