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झाविमो ने रघुवर सरकार पर साधा निशाना, कहा- राज्य का खजाना खाली

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  • कंबल घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की
  • कहा- चार साल में 6560 से अधिक दंगे, 6000 से अधिक हुईं अपहरण की घटनाएं

Ranchi : झाविमो ने रघुवर सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी के विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि रघुवर सरकार के चार साल के शासन में राज्य की जनता त्रस्त रही है. सरकार की उपलब्धियां देखें, तो भूख से मौत, छात्रों की छात्रवृत्ति में कमी करना, बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी बांटना ही इस सरकार की उपलब्धि रही है.  पिछले चार साल में 6560 से अधिक दंगे और 6000 से अधिक अपहरण की घटनाएं हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य का खजाना खाली हो चुका है, जिसके कारण सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. रघुवर सरकार पिछले 18 सालों में बनी पहली सरकार है, जिसने जन आकांक्षाओं के विपरीत जाकर काम किया है. साथ ही, रघुवर सरकार के विरोध में झारखंड की जनता ने सबसे अधिक आंदोलन किये हैं. कंबल घोटला पर एजी की रिपोर्ट सरकार के क्रियाकलापों का सबसे बड़ा उदाहरण है. कंबल घोटाला की सीबीआई से जांच होनी चाहिए.

राजस्व का हुआ है भारी नुकसान

रघुवर सरकार की गलत नीतियों से राज्य को राजस्व का भी भारी नुकसान हुआ है. सरकार द्वारा शराब बिक्री के निर्णय से 6000 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई. वहीं, एक रुपये में जमीन रजिस्ट्री करने के मामले में पैसेवाले को फायदा पहुंचाने के लिए निर्णय लिया गया, जिससे सरकार को 200 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. वर्तमान समय में रघुवर सरकार की नीतियों के कारण राज्य के एक लाख 75 हजार  कर्मचारियों को महीने के पहले सप्ताह में सरकार उनका वेतन नहीं दे पा रही है. वहीं, केंद्र प्रायोजित योजना का हाल भी राज्य में बुरा है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 700 करोड़ रुपये केंद्र से मिले हैं, लेकिन राज्य सरकार द्वारा अपना अंशदान नहीं देने के कारण राज्य को दूसरी किस्त नहीं मिल रही है.

ठेकेदारों के बिल का नहीं हो रहा भुगतान

पथ निर्माण विभाग में भी 17000 करोड़ रुपये का बजट बचा हुआ दिखाया जा रहा है, जबकि ठेकेदारों को 15000 करोड़ रुपये के बिल का सरकार भुगतान नहीं कर सकी है. बिजली के मामले में भी रघुवर सरकार पूरी तरह फेल रही है. जब राज्य में रघुवर सरकार बनी, तो राज्य में 600 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था, आज यह उत्पादन घटकर 250 मेगावाट रह गया है. वहीं, राज्य में शिक्षा का हाल भी बुरा है. प्राथमिक और माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों की संख्या चार साल पहले 46000 थी, जो घटकर 45000 हो गयी है.

छले गये हैं प्रदेश के युवा

स्किल समिट के नाम पर युवाओं को रोजगार देने का राज्य सरकार खेल कर रही है. स्किल समिट कराकर 26000 युवाओं को नौकरी देने का दावा करनेवाली सरकार की खुद की रिपोर्ट में 2000 लोग ही वर्तमान समय में काम पर हैं. रघुवर दास के चार साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है कि मुख्यमंत्री के सभी विभागों में घोटाले का खेल चलता रहा, जिसे जीरो टॉलरेंस वाली सरकार ने छिपाने का काम किया.

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