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जेवीएम ने आदिवासी महासम्मेलन में दिखाई ताकत, भाजपा पर बरसे बाबूलाल

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Ranchi : मिशन 2019 को लेकर अभी से ही राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है. चुनाव बैतरणी में  अपने दमखम पर अधिक से अधिक सीटें हासिल करने की कवायत झारखंड विकास मोर्चा द्वारा आदिवासी सम्मेलन कर शुरू कर दी है. पार्टी को उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में मजबूत करने की दिशा में पहल की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. इसकी बानगी रांची के हरमू मैदान में झारखंड विकास मोर्चा ने आदिवासी महासम्मेलन के माध्यम से आदिवासी वोट को साधने का हर संभव प्रयास के रूप में दिखा.

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झारखंड में परिवर्तन का समय आ गया है : मरांडी

पारंपरिक वेशभूषा, मांदर और नगाड़े की थाप पर झारखंड के दूरदराज के क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय के लोग हरमू मैदान में पहुंचे. मौका था आदिवासी महासम्मेलन का. जहां झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि झारखंड में परिवर्तन का समय आ गया है. भारत में सबसे लंबी लड़ाई किसी राज्य के लिए लड़ी गई तो वो झारखंड के लिए ही लड़ी गई थी. उन्होंने कहा कि अपने हक अधिकार के लिए अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई. लेकिन झारखंड में सबसे ज्यादा कोई उजाड़े गए तो वो आदिवासी समाज के लोग ही. सरकार ने विकास के नाम पर 30 लाख एकड़ आदिवासी समाज हड़पे हैं.

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चार सालों में सबसे अधिक शोषण अदिवासियों का हुआ

झाविमो के प्रधान सचिव प्रदीप यादव ने भी राज्य सरकार के ऊपर निशाना साधते हुए कहा कि यह सम्मेलन प्रमाणित करता है कि जो आदिवासी हित में काम करेगा वही झारखंड में राज करेगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी और झारखंडियों की लड़ाई झारखंड विकास मोर्चा ने लड़ी है. प्रदीप यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि साढ़े चार साल में मोदी और रघुवर की सरकार ने आदिवासियों का शोषण किया है.

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झारखंड सरकार सीएनटी के नाम पर आदिवासियों को बांट रही

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य में आदिवासी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं राज्य सरकार कभी सीएनटी के नाम से कभी साधना विशाल के नाम से आदिवासियों को बांटने का काम कर रही है. झारखंडी समाज को मिल-जुलकर जो समाज बांट रहे हैं. उनको मुंहतोड़ जवाब देने का समय आ गया है. छात्रों की समस्याओं पर बंधु तिर्की ने कहा राज्य के युवाओं के सामने रोजगार के अवसर नहीं है, ऐसे में छात्र, युवा, किसान, मजदूर वर्ग भी परेशान हैं.



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