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जस्टिस एलपीएन शाहदेव की 10वीं पुण्यतिथिः अर्जुन मुंडा, बाबूलाल मरांडी, रामेश्वर उरांव सहित पक्ष-विपक्ष ने अर्पित किये श्रद्धासुमन

Ranchi : झारखंड आंदोलन के प्रणेता और प्रथम मूलवासी न्यायाधीश न्यायमूर्ति एलपीएन शाहदेव की 10वीं पुण्यतिथि सोमवार को मनायी गयी. जस्टिस शाहदेव चौक, कांके रोड पर बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण बड़ा आयोजन नहीं हुआ. उनके परिजनों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया. इसके बाद पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं और विशिष्ट लोगों ने भी जस्टिस के योगदान को अपने-अपने तरीके से याद किया. राज्यपाल रमेश बैस ने श्रद्धांजलि अर्पित किया और संदेश जारी कर कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन उन्होंने किया जो सराहानीय है.

सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में कहा कि न्यायिक सेवा में होते हुए भी झारखंड आंदोलन को उन्होंने बिना किसी दल के बंधन में बंधे हुए अपनी बौद्धिक ऊर्जा से सींचा.

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आनेवाली पीढ़ियों को उनके दिखाये गये मार्ग का अनुशरण करना चाहिए. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में न्यायमूर्ति शाहदेव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी.

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उनके अलावे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद दीपक प्रकाश, पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी एवं रघुवर दास, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, सांसद संजय सेठ समेत अनेक लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की. मौके पर जस्टिस शाह देव के बेटे प्रतुल शाहदेव, पुत्रियां संगीता देव, कृति सिंह, बबीता सिंह, शिल्पी सिंहदेव, पुत्रवधू विद्या झा समेत अन्य लोग भी मौजूद थे.

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सच्चे भूमिपुत्रः दीपक

दीपक प्रकाश ने कहा कि न्यायमूर्ति शाहदेव झारखंड आंदोलन के अग्रणी पंक्ति के योद्धा थे. साथ ही प्रख्यात न्यायविद एवं एक सच्चे भूमि पुत्र थे. उन्होंने झारखंड अलग राज्य के निर्माण में अविस्मरणीय योगदान दिया था. मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि न्यायमूर्ति शाहदेव ने झारखंड अलग राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

आंदोलन का नेतृत्व किया और सब को संगठित किया. आदिवासी और मूलवासियों को अपने अधिकार को हासिल करने के लिए संघर्ष की शक्ति दी.

बाबूलाल मरांडी ने न्यायमूर्ति शाह देव को कोटि नमन करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन में गिरफ्तार होने वाले प्रथम न्यायमूर्ति थे जिन्होंने आंदोलन को अपनी बौद्धिक ऊर्जा से सींचा था. उनके आदर्श और विचार आज भी प्रासंगिक हैं.

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