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हे मां ! जैसे महिषासुर को मारा, वैसे ही कोरोना का संहार करो, ताकि हमारे बच्चे भूख से न मरें

दो साल से दु्र्गा पूजा में रोजगार का संकट झेल रहे हांडी, पत्तल और फूल वाले देवी मां से यही गुहार लगा रहे

Jamshedpur : कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भी फूल, पत्तल और हंडी दुकानदारों पर मां की कृपा नहीं बरसी. साल भर बेहतर आमदनी का इंतजार करने वाले इन दुकानदारों को इस वर्ष भी मायूसी हाथ लगी. 2020 से पूर्व मिट्टी के सामान बिक्री करने वाले दुकानदार, दोना-पत्तल बेचनेवाली महिलाएं और फूलवाले साल में दो बार दीपावली और दुर्गा पूजा में अच्छी आमदनी कर लेते थे. लेकिन दो साल से कमाई बंद है. ऐसे में ये यही गुहार लगा रहे हैं कि जैसे महिषासुर को मारा, वैसे ही कोरोना का संहार करो मां, ताकि हमारे बच्चे भूख से न मरें.

कोरोना ने छीना कुम्हारों का रोजगार, दो साल से बंद है कमाई 

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दुर्गा पूजा के दौरान भोग वितरण के लिए पूजा कमेटियां प्रत्येक दुकानदार से 500 से 2000 तक मिट्टी की हांडी ले जाती थी. लेकिन 2020 से जारी कोरोना के प्रकोप ने इस वर्ष भी इन दुकानदारों का पीछा नहीं छोड़ा है.  हांडियों की बिक्री नहीं हो पायी. बाराद्वारी में मिट्टी के बर्तन बेचने वाले बनवारीलाल काफी मायूस होकर कहते हैं कि पहले पूजा कमेटी वाले अनगिनत मिट्टी की हंडिया ले जाते थे. अब 10 से 50 इंडिया ले जा रहे हैं. ऐसे में साल भर से जिस आस में बैठे थे, सब मिट्टी में मिल गया.

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भोग वितरण पर रोक से जंगल से पत्ते तोड़कर दोना-पत्तल बनानेवालों की कमाई रुकी 

यही हाल पत्तल बिक्री करने वालों का भी है. ग्रामीण महिलाएं  जंगलों से पत्तों को तोड़कर  हाथों से बीनकर पत्तल बनाकर जमशेदपुर शहर लाती हैं. उनसे होनेवाली कमाई से ही  उनका परिवार चलता है.  प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा को लेकर ये महिलाएं आस लगाये रहती हैं कि आमदनी में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, लेकिन इस कोरोना महामारी ने उनकी बिक्री पर भी काफी असर डाला है. इसका भी मुख्य कारण है पूजा पंडालों में भक्तों के बीच भोग वितरण का न होना. पहले भक्तगण पत्तल में भोग लेकर ग्रहण करते थे, लेकिन 2 साल  से इस पर पाबंदी लगने के कारण पत्तल की बिक्री नहीं हो रही है. इन महिलाओं को भी परिवार का भरण पोषण करना भारी पड़ रहा है.

पंडालों के उद्घाटन पर रोक से फूलवालों का व्यापार घट कर आधा हुआ

पंडालों का उद्घाटन नहीं होने से फूल व्यवसाय पर भी काफी असर पड़ा है. वैसे अन्य त्योहारों और समारोह में भी फूलों का महत्व काफी होता है और बिक्री भी होती रहती है, लेकिन जितनी बिक्री दुर्गा पूजा में होती है, उतना किसी अन्य में नहीं.  दुकानदार बताते हैं कि पहले पूजा पंडाल को उद्घाटन के लिए फूलों से सजाया जाता था और मुख्य अतिथि एवं गणमान्य लोगों को स्वागत फूल माला से किया  जाता था, लेकिन 2 वर्ष से कोरोना के कारण ऐसे कार्यक्रम के आयोजन पर पाबंदी लगा दी गयी है.  पहले प्रत्येक दुकानदार 25 से 30 हजार का व्यवसाय कर लेते थे, लेकिन अब यह  सिमटकर 10 से 15000  पर  आ गया है.

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