JamshedpurJharkhand

खाद कलश से पूजा के फूलों से होने वाले जल प्रदूषण को रोकेगी जुगसलाई नगर पालिका

नप की ओर से मंदिरों व पूजा कमेटियों को दिया को दिया जा रहा आईईसी प्रशिक्षण, मंदिरों व पंडालों में स्थापित किया जाएगा खाद कलश, पूजा के उपयोग किये गए फूलों से बनाई जाएगी खाद

Jamshedpur : पूजा-पाठ के दौरान उपयोग होने वाले फूल-बेलपत्र आदि से नदियों में होने वाले जल प्रदूषण को रोकने के लिए जुगसलाई नगर परिषद की ओर से आईईसी प्रशिक्षण की शुरुआत की गई है. इसके तहत नप की ओर से दुर्गा पूजा के मद्देनजर मंदिरों और पूजा समितियों को खाद कलश स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
बेकार फूलों से बनेगी उपयोगी खाद
जुगसलाई नप के विशेष पदाधिकारी ने जेपी यादव ने बताया कि पूजा-पाठ और तीज-त्यौहार के दौरान से हर साल लगभग 0.8 लाख टन चढ़ाए हुए फूल, बेलपत्र, सिंदूर आदि पूजन सामग्री निकलती है. जिसे नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है. इससे जल प्रदूषण होता है. इससे जलीय जंतुओं को भी काफी नुकसान होता है. इसके लिए इस बार दुर्गा पूजा को लेकर मंदिरों और पूजा समितियों को आईईसी के तहत खाद कलश स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह एक तरह का मिट्टी से बना छिद्र युक्त कलश है. जिसमें पूजा के बाद उपयोग किए गए पुष्प, बेलपत्र, धूप, एवं अगरबत्तियों की राख को डाल कर उसे उद्गम स्थल पर ही खाद में परिवर्तित किया जाता है या जल से भरे पात्र में सभी चीजों को डाल कर उसे मिट्टी में दबा कर भी खाद में परिवर्तित कर उसका उपयोग पौधे उगाने में किया जा सकता है. इस विधि से प्राकृतिक रुप से उपयोग हुए फूलों के अपशिष्ट को प्रबंधित किया जा सकता है. इस पहल से महीने में अनुमानित 36500 किलो फूलों को जल में जाने से रोक सकते हैं.

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