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#JTET की नयी नियमावली में विसंगतियां, 80 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा से हो सकते हैं वंचित

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Ranchi: कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नयी नियमावली लागू हो गयी है. इस नयी नियमावली को लेकर जेटेट में शामिल होने की योग्यता रखनेवाले अभ्यर्थियों में असंतुष्टि है.

अभ्यर्थियों के मुताबिक इस नयी नियमवाली में कई ऐसी विसंगतियां हैं, जो अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकती हैं. इन विसंगतियों की वजह से 80 फीसदी अभ्यर्थी जेटेट में शामिल होने से वंचित हो जायेंगे.

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अभ्यर्थियों के मुताबिक विसंगतियां सब्जेक्ट कांबिनेशन से लेकर मार्किंग स्कीम तक में है.

अभ्यर्थियों ने इस समस्या से अवगत कराते हुए झारखंड अधिविध परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिख कर नियमावली की विसंगतियों से अवगत कराया है.

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सब्जेक्ट कंबिनेशन हुआ अनिवार्य

जेटेट के अभ्यर्थियों ने लिखे पत्र में सीटेट को आधार बनाते हुए नयी नियमावली की विसंगतियों के बारे जानकारी दी है. उनके मुताबिक कक्षा 6 से 8 की पात्रता के लिए होने वाली परीक्षा में सब्जेक्ट कांबिनेशन निर्धारित कर दिया गया है, जबकि सीटेट में ऐसा प्रावधान नहीं है.

हिंदी, मुंडारी, कुडूख, पंचपरगनिया, खोरठा, नागपुरी, उड़िया, बांग्ला जैसी भाषाओं के शिक्षकों के लिए अंग्रेजी विषय को बाध्यकारी बना दिया गया है, जबकि जेटेट की नयी नियमावली में अंग्रेजी अनिवार्य विषय में पहले से ही है.

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वैसे अभ्यर्थी, जो विज्ञान के विषय से जेटेट में शामिल होगें, उनके विषयों में अंक का निर्धारण अलग-अलग है, जबकि कला के सभी विषयों में ऐसा नहीं है.

विज्ञान के विषयों के तहत गणित में 70, फिजिक्स में 40, केमिस्ट्री में 40 व बायोलॉजी में 40 और बॉटनी में 40 अंक हैं. वहीं कला के विषयों का मानक अंक 50 है.

यह इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान व समाजशास्त्र के लिए समान रूप से लागू किया गया है. जेटेट में वाणिज्य विषय को हटा दिया गया है, जबकि इस विषय के अभ्यर्थियों की संख्या सैकड़ों में है.

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अंग्रेजी विषय पर है ज्यादा जोर

जेटेट की नयी नियमावली में अंग्रेजी को ज्याद तवज्जो दी गयी है. जिसमें कहा गया है कि जेटेट में वैसे उम्मीदवार ही शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने मैट्रिक में अंग्रेजी विषय में पास किया हो. जबकि सीटेट में ऐसी बाध्यता नहीं है.

वहीं जेटेट में इंटर व स्नातक में न्यूनतम अंक का प्रावधान तय कर दिया गया है. सीटेट में 1-5 एवं 6-8 दोनों स्तर में 150 अंकों की परीक्षा होती है जबकि जेटेट में 1-5 में 200 एवं 6-8 में 250 अंकों की परीक्षा निर्धारित की गयी है.

कठिन प्रश्नों की संख्या में हुआ इजाफा

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र तथा क्षेत्रीय/जनजातीय भाषा के प्रश्नों की संख्या जेटेट में कम कर दी गयी है जबकि अन्य विषयों में प्रश्नों की संख्या काफी बढ़ा दी गयी है.

जेटेट में प्रश्नों का कठिनाई स्तर सीटेट की अपेक्षा काफी बढ़ा दिया गया है. जैसे  कक्षा 6-8 विज्ञान के छात्रों के लिए 70 प्रश्न गणित से और 80 प्रश्न विज्ञान से होंगे. यह प्रश्न स्नातक स्तरीय होगा.

सीटेट में पास करने के लिए ओवरऑल 60 फीसदी अंक लाना होता है जबकि जेटेट हेतु सभी विषयों में अलग-अलग 40 फीसदी अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है.

सभी विषयों में अलग-अलग क्वालीफाई करने पर पास होने के लिए ओवरऑल 60 फीसदी लाना होगा.

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