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JTDS: करोड़ों के टेंडर्स में नियमों को रखा ताक पर, शुरू हुई जांच

Amit jha

Ranchi : झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (JTDS) सवालों के घेरे में है. खास कर पिछले दो सालों में जारी टेंडरों को लेकर. ट्राइबल वेलफेयर प्रोग्राम में लगी इस संस्था के जरिये 2019 और 2020 के दौरान जारी निविदाओं में गड़बड़ी की शिकायत की गयी है. इंटरनेशनल फंडिंग एजेंसी (IFAD) सोसाइटी को आंशिक तौर पर आर्थिक मदद दे रही है. टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी किये जाने की शिकायत पिछले दिनों एजेंसी के पास भी दर्ज करायी गयी है. पिछले दो सालों के भीतर लगभग 100 करोड़ रुपये के टेंडर जारी हुए.

इंटरनेशनल फंडिंग एजेंसी (IFAD) सोसाइटी को की गयी शिकायत में कहा गया है कि नियमों, शर्तों को दरकिनार करके खास संवेदकों को टेंडर दिये गये. एजेंसी ने इस पर संज्ञान लेते हुए अपने एंटी करप्शन विंग को जांच के लिए लिखा है. कल्याण विभाग के उच्चाधिकारियों के पास भी शिकायत जा चुकी है. कल्याण विभाग ने जेटीडीएस की गड़बड़ियों को लेकर मिली शिकायतों की जांच के लिए विशेष सचिव शशिधर मंडल की अध्यक्षता में बनायी गयी जांच कमेटी को 15 फरवरी, 2021 तक जांच रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया है.

आपत्ति करने पर टेक्निकल कमिटी से विदा हो गये थे रुसिया

जेटीडीएस में टेंडर मामलों को देखने को एक टेक्निकल कमिटी है. इस कमिटी में बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के सीनियर साइंटिस्ट जेसी रुसिया को भी रखा गया था. पिछले साल जेटीडीएस ने एक टेंडर (JTELP/Farm Equipment/NCB-01/2020) जारी किया था. यह किसानों के लिए कृषि संबंधी कार्यों के लिए इक्विपमेंट की उपलब्धता से संबंधित था. कुछ अधिकारी इसमें खास कंपनी को टेंडर देने की हिमायत कर रहे थे.

उस कंपनी की परफॉर्मेंस और उसके रिकॉर्ड को देखते हुए जे सी रूसिया ने आपत्ति जतायी. निदेशक (JTDS) से भी शिकायत की गयी. उसके अगले ही दिन रुसिया को कमिटी से हटा दिया गया. किसानों के लिए 5000-5000 Paddy weeder औऱ Dryland weeder की जरूरत थी. आरोप है कि आखिरकार जिन कंपनियों के पास इसकी सप्लाई और क्वालिटी से जुड़ा तजुर्बा नहीं था, उन्हें ही काम मिला. यह टेंडर 15 करोड़ की वैल्यू का था.

महज दो साल पुरानी कंपनियों को काम

IFAD को की गयी शिकायत के मुताबिक जेटीडीएस ने आव्या इंटरप्राइजेज नामक एक कंपनी को काम दिया. JTDS द्वारा जारी टेंडर की शर्तों में उल्लेख किया गया था कि बिडर का टर्नओवर लगातार तीन वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 30 लाख रुपये होना चाहिए. शिकायत के मुताबिक जिस आव्या इंटरप्राइजेज को टेंडर दिया गया, वह मात्र दो साल पुरानी कंपनी थी.

शिकायतकर्ता के मुताबिक यह कंपनी 27.07.2018 को रजिस्टर्ड हुई थी. इसी तरह दो साल पुरानी कंपनी अभय इंटरप्राइजेज को भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया. इसी तरह 2017 में बनी नवल एग्रो एंड प्लांटेशन लिमिटेड को भी 2019 में सप्लाई का टेंडर दे दिया गया. 2019 में इसे जैविक खाद सप्लाई से जुड़ा 15 करोड़ का एक टेंडर दिया गया.

क्या है JTDS

JTDS राज्य के 14 ऐसे जिलों में विशेष तौर पर काम कर रहा है जहां आदिवासियों की तादाद ज्यादा है. इन जिलों के 32 प्रखंडों सहित 2500 से अधिक गांवों में JTDS आदिवासियों के उत्थान संबंधी योजनाएं संचालित करता है. राज्य सरकार के साथ साथ इसमें IFAD का भी सहयोग प्राप्त होता है.

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