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JSMDC : 11 में 10 खदानें बंद, वेतन पर सालाना खर्च 100 करोड़, आमदनी महज 16-17 करोड़

सिर्फ सिकनी कोलियरी से ही कोयले का उत्खनन हो पा रहा है

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Sweta kumari

Ranchi: झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) अब सरकार के लिए नुकसान का निगम बन गया है. इसे चलाने के लिए सरकार को निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन मद में ही करीब 100 करोड़ रुपया खर्च करना पड़ता है. आमदनी की बात करें तो निगम की 11 में से 10 खादानें बंद हैं. सिर्फ सिकनी कोलियरी से ही कोयले का उत्खनन हो पा रहा है. इसके कोयले के खरीददार मिलने में भी दिक्कत है. वर्ष 2010 में जेएसएमडीसी को सिर्फ 10 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. जो वर्ष 2015 में 16.73 करोड़ थी. वर्ष 2015-16 में सिकनी कोलियरी से कोयला उत्पादन का लक्ष्य 80 हजार टन रखा गया था. लेकिन कोलियरी उत्पादन लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकी.

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ट्रांजैक्शन एडवाईजर नियुक्त कर खर्च बढ़ाया, पर नहीं चालू हुए खदान

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016 में सरकार ने जेएसएमडीसी के खदानों को चालू करने के उद्देश्य से ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया था. सरकार ने पीडब्ल्यूसी नाम की कंपनी को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया था. इस कंपनी को प्रतिमाह 22 लाख रुपये दिये जाते हैं. कंपनी का काम जेएसएमडीसी के बंद पड़े 10 खादानों को चालू कराना है. लेकिन दो साल बीतने के बाद भी कंपनी किसी भी खदान को चालू नहीं करवा सकी. इस कारण पिछले दिनों उद्योग विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीकी ने एजेंसी के कामकाज को लेकर रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने पूछा है कि दो वर्ष में खदान को चालू कराने के लिए पीडब्लूसी ने क्या प्रयास किये.

जेएसएमडीसी एकीकृत बिहार के समय से निगम है. एकीकृत बिहार के समय वर्ष 1972 में इसकी स्थापना हुई थी. तब इसका नाम बिहार राज्य खनिज विकास निगम (BSMDC)था. वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद इसका नाम बदलकर झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) हो गया. जेएसएमडीसी के पास कुल 11 खदान हैं. जिनमें से 10 फिलहाल बंद हैं

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अब सवाल उठता है कि जेएसएमडीसी को सरकार चला ही क्यों रही है. जब सरकार को सालाना 80 से 90 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. उपर से सरकार ने खदानों को चालू कराने के लिए ट्रांजैक्शन एडवाईजर नियुक्त किया, उसे भी प्रतिमाह 22 लाख रुपया दिया जा रहा है. यह राशि भी सालाना 1.62 करोड़ होता है. इसके बाद भी निगम का एक भी खदान चालू नहीं हो सका. अधिकारी बताते हैं कि अगर निगम के सभी खदान चालू हो गये तो सरकार को सालाना 150 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है.

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