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फर्जी बैंक गारंटी जमा करने वाली कंपनी पर FIR करने में जरेडा एग्जीक्यूटीव इंजीनियर ने लगाये 10 महीने

ऊर्जा विभाग को निदेशक ने मार्च में लिखा पत्र

जरेडा ने जांच के क्रम में पाया कि दो बैंक गारंटियां थी फर्जी

बैंक और एजेंसी ने भी स्वीकारा कि जाली थे दोनों गारंटी

Chhaya

Ranchi: झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जरेडा) निदेशक की ओर से ऊर्जा विभाग को पत्र लिखा गया है. पत्र में जरेडा के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर श्रीराम सिंह की कार्यशैली के संबध में शिकायत की गयी है. श्रीराम सिंह पिछले साढ़े छह साल से जरेडा में पदस्थापित हैं. साथ ही महत्वपूर्ण टेंडरों के निष्पादन में इनकी भूमिका भी होती है.

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जरेडा निदेशक की ओर से 19 मार्च 2020 में ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया. जिसमें बताया गया कि साल 2016-17 में सोलर रूफटॉप पावर प्लांट के टेंडर में मनमानी की गयी. पत्र में निदेशक की ओर से सिंह की कई एजेंसियों के साथ सांठ गांठ और अनैतिक आचरण का भी जिक्र किया गया.

जरेडा एग्जीक्यूटीव इंजीनियर श्रीराम सिंह ने मांगे गये स्पष्टीकरण के पत्र की कॉपी

बता दें कि साल 2016-17 में सोलर रूफटॉप पावर प्लांट के लिये जिस कंपनी का चयन किया गया था, उसने जाली बैंक गारंटी जमा की थी. जांच में जाली बैंक गारंटी पाये जाने के बाद भी श्रीराम सिंह की ओर से एजेंसी को बचाने और एफआइआर में देर करने का आरोप है.

बैंक ने खुद स्वीकारा जाली है दो बैंक गारंटी

इस प्रोजेक्ट के लिये दो वर्क ऑर्डर निकाले गये. जो 12 अगस्त 2017 और  25 जुलाई 2017 को निकाले गये. काम केरला की एजेंसी मेसर्स सौरा नेच्यूरल एनर्जी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को मिला.

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नियमों के मुताबिक, कंपनी को काम मिलने के बाद टोटल वर्किंग कॉस्ट का दस प्रतिशत बैंक गारंटी जमा करना था. सौरा एजेंसी की ओर से 5 लाख 40 हजार और 35 हजार के दो बैंक गांरटी जमा की गयी. दोनों बैंक गारंटी कोलकाता के विजया बैंक, रवींद्र सराया शाखा के थे.

बैंक द्वारा भेजे गये जवाब की कॉपी

जरेडा ने दोनों बैंक गारंटियों की जांच के लिये बैंक को पत्र भेजा. जिसमें बैंक की ओर से खुद बताया गया कि दोनों गारंटी बैंक की ओर से जारी नहीं की गयी है. इसके बाद जरेडा की ओर से फिर से अकांउट स्टाफ को उक्त बैंक भेजा गया. जिसमें जानकारी हुई कि दोनों बैंक गारंटियां जाली है. बैंक ने यह लिखित में भी स्वीकार किया. बता दें एक वर्क ऑर्डर 54 लाख और दूसरा 7 लाख का था.

कंपनी ने स्वीकारा जाली थे दोनों बैंक गारंटी

बैंक से दोनों गारंटियां जाली प्रमाणित होने के बाद जरेडा ने शो कॉज नोटिस कंपनी को भेजा. नोटिस पांच सिंतबर 2018 को भेजा गया. जिसमें अपनी स्थिति स्पष्ट करने कहा गया. इस पत्र का जवाब 15 सिंतबर 2018 को कंपनी ने दिया.

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जिसमें कंपनी ने स्वीकार किया कि दोनों बैंक गारंटियां जाली थी. इसके बाद जरेडा के कानूनी सलाहकार की ओर से 4 जनवरी 2019 को कानूनी सलाह दी गयी. जिसके बाद कंपनी पर कार्रवाई के लिये रिपोर्ट श्रीराम सिंह को दी गयी.

निदेशक की ओर से लिखे पत्र में जिक्र किया गया है कि श्रीराम सिंह ने दस महीने तक मामले पर कार्रवाई नहीं की. आरटीआइ के तहत जब इस मामले में जवाब मांगा गया, तब 9 सिंतबर 2019 को श्रीराम सिंह की ओर से आगे की कार्रवाई की गयी. बता दें मामले में जरेडा के कानूनी सलाहकार अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने निदेशक को सुझाव दिया था. जिसमें लिखा था कि बैंक गारंटी फर्जी होने पर कंपनी पर एफआइआर दर्ज करते हुए काम वापस लिया जाये.

दस महीने बाद दर्ज की गयी FIR

जनवरी से अक्टूबर तक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर श्रीराम सिंह ने कंपनी पर एफआइआर नहीं की. सिंह ने कार्रवाई तब की, जब आरटीआइ के तहत इस संबध में सूचना मांगी गयी. इसके बाद 8 नवंबर 2019 को डोरंडा थाना में एफआइआर हुई. वहीं 30 अक्टूबर 2019 को कंपनी का वर्क ऑर्डर कैंसल किया गया.

जरेडा निदेशक की ओर से इस संबध में 23 नवंबर 2019 को फिर से श्रीराम सिंह को पत्र लिखा गया. जिसमें निदेशक ने कहा कि कानूनी सलाह के साथ रिपोर्ट देने के बाद भी कपंनी पर एफआइआर दर्ज नहीं की गयी. जो जरेडा अधिकारी की ओर से कंपनी को लाभ पहुंचाने और लापरवाह कार्यशैली को दर्शाता है. इस मामले में 30 नवंबर 2019 को श्रीराम सिंह ने निदेशक को जवाब दिया. जिसमें सिंह ने कहा कि काम की अधिकता के कारण समय पर कार्रवाई नहीं की गयी.

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