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JPSC: छह बार की सिविल सेवा परीक्षा में कभी 35 तो कभी 40 हुई अधिकतम उम्रसीमा

उम्र सीमा के पेच में उम्मीदवारों का भविष्य

Rahul Guru

Ranchi : जेपीएससी की ओर से आयोग के गठन के बाद से अब तक छह बार सिविल सेवा परीक्षा ली गयी है. सभी छह सिविल सेवा परीक्षाओं में उम्मीदवारों की उम्रसीमा में आवश्यकतानुसार बदलाव किया गया है. एक बार फिर सातवीं से 10वीं तक होने वाली सिविल सेवा परीक्षा में उम्रसीमा का पेच फंसने वाला है.

जेपीएससी की नयी नियुक्ति नियमावली के मुताबिक, अधिकतम उम्रसीमा की गणना एक फरवरी 2021 से की जायेगी, जबकि छठी सिविल सेवा परीक्षा में उम्र की गणना एक अगस्त 2010 से की गयी थी.

लेकिन होने वाली आगामी परीक्षाओं के लिए उम्र की गणना और अंतिम सिविल सेवा परीक्षा (छठी सिविल सेवा) के बीच 10 साल का अंतर है. इस वजह से उम्रसीमा के पेच में हजारों की संख्या में उम्मीदवारों का भविष्य फंसने वाला है.

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कभी 35 तो कभी 40 भी हुई अधिकतम उम्रसीमा

सरकार की उदासीनता कहें या झारखंड लोकसेवा आयोग की शिथिलता, राज्य गठन के 20 साल होने के बाद भी अबतक केवल छह सिविल सेवा परीक्षा ली जा सकी है. आलम यह है कि आयोग की ओर से जितनी भी सिविल सेवा परीक्षाएं ली गयी हैं, लगभग सभी परीक्षाओं में विवाद रहा है.

सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा की गणना की बात करें तो छह बार की सिविल सेवा परीक्षा में तीन बार उम्रसीमा में बदलाव किया जा चुका है. साल 2003 में हुई पहली सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा 37 वर्ष थी. तब उम्रसीमा की गणना एक अगस्त 2008 से की गयी थी.

इसी तरह दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा 35 साल थी. तब उम्र की गणना एक अगस्त 2004 से की गयी थी. तीसरी सिविल सेवा परीक्षा में भी अधिकतम उम्रसीमा 35 वर्ष ही थी. इसकी गणना एक अगस्त 2008 से हुई थी.

चौथी सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा में बदलाव करते हुए इसे 40 साल कर दिया गया था. तब उम्रसीमा की गणना एक अगस्त 2006 से हुई थी.

इसके बाद पांचवीं सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा की गणना में 3 साल का गैप किया गया. इसमें अधिकतम उम्रसीमा की गणना एक अगस्त 2009 से हुई. इस परीक्षा में अधिकतम उम्रसीमा 35 साल रखी गयी. इसके बाद छठी सिविल सेवा परीक्षा में भी अधिकतम उम्रसीमा 35 साल ही रखी गयी. यहां अधिकतम उम्रसीमा की गणना एक अगस्त 2010 से हुई.

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10 साल के अंतर पर हो रहा विवाद

सातवीं से 10वीं तक की सिविल सेवा परीक्षा के आनेवाले नोटिफिकेशन में अधिकतम उम्रसीमा की गणना में होने जा रहे 10 साल के अंतर को लेकर विवाद शुरू हो गया है. परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स की मानें तो सरकार और आयोग की गलती का खामियाजा हम स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है.

अगर हर साल आयोग परीक्षा लेता रहता तो स्टूडेंट्स को अपने भविष्य की चिंता नहीं सताती. स्टूडेंट्स का आरोप भी है कि आयोग अपनी कमियों को छुपाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है.

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