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#JourneyForTiger : ‘वन्य प्राणियों के संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा है अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कम्युनिकेशन गैप’

Ranchi : वन्य प्राणियों के संरक्षण में आने सबसे बड़ी बाधा अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कम्युनिकेशन गैप है. अधिकारी लोगों को सही जानकारी नहीं देते हैं, उन्हें अभियानों के बारे में नहीं बताते हैं, जबकि पर्यावरण, जंगल और वन्य प्राणियों के सरंक्षण में अधिकारियों और जनता के बीच समन्वय जरूरी है.

यह कहना है रतिंद्र नाथ दास और उनकी पत्नी गीतांजलि का. दोनों बाघों के संरक्षण के लिए ‘जर्नी फॉर टाइगर’ के तहत 260 दिनों तक बाइक से देश भर की यात्रा पूरी कर कोलकाता लौटने के क्रम में रांची में पहुंचे हैं.

दोनों ने 15 फरवरी को यह यात्रा कोलकाता से शुरू की थी. लौटते समय पलामू टाइगर रिजर्व की यात्रा के बाद ये एक दिन के लिए रांची आये हैं. उन्होंने यहां यात्रा से संबधित अनुभव बताये.

2016-17 में रतिंद्र ने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन के लिए अकेले पूरे देश का भ्रमण किया था. इस बार फोकस टाइगर प्रोटेक्शन रहा. दोनों ने अपनी यात्रा एक बाइक से तय की.

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50 टाइगर रिजर्व्स की यात्रा की, कर्नाटक सबसे बेहतर

देश भर में 50 टाइगर रिजर्व्स हैं जिनका इस युगल ने भ्रमण किया. रतिंद्र ने बताया कि सबसे बेहतर स्थिति कर्नाटक की है. वहां अधिकारियों और लोगों के बीच समन्वय देखने को मिलता है. टाइगर रिजर्व की स्थिति भी काफी अच्छी है. व्यवस्थाएं बेहतर हैं. व्यवस्थाएं सिक्किम की भी बेहतर हैं. लेकिन अन्य किसी भी जगह व्यवस्थाएं सही नहीं मिलीं.

गीतांजलि ने बताया कि इस दौरान लगभग तीन हजार गांवों में वे गये और स्थानीय लोगों से बात की. ये सभी गांव टाइगर रिजर्व के आस-पास के क्षेत्र है. लेकिन अधिकांश गांवों में बाघों के संरक्षण से संबधित योजनाओं की जानकारी लोगों को नहीं है.

कुछ गांवों में ग्रामीणों में अधिकारियों के प्रति नाराजगी भी देखी गयी. लेकिन वे वन और वन्य प्राणियों को बचाना चाहते है. फॉरेस्ट रूल इंप्लीमेंटेशन में सिक्किम बेहतर पाया गया. जरूरी है कि अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कम्यूनिकेशन गैप दूर किया जाये.

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राजनीति हावी न हो 

रतिंद्र और गीतांजलि ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि पूरे देश और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करने से जानकारी हुई कि कहीं न कहीं राजनीति वन और वन्य प्राणियों के सरंक्षण में हावी हो रही है.

लोगों को यह समझना होगा कि वन और वन्य प्राणियों से ही मानव जीवन का अस्तित्व है क्योंकि ऑक्सीजन और पृथ्वी का कोई विकल्प नहीं हो सकता.

गीतांजलि ने कहा कि अपने टूर के दौरान उन्होंने कुछ राज्यों के अधिकारियों से भी बात की जिससे स्पष्ट पता चला कि राजनीति इन चीजों में कितनी हावी है. जो ग्रामीण इन चीजों को बचाना चाहते हैं, उनका गुस्सा अधिकारियों पर फूटता है.

अपनी यात्रा के दौरान दोनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 643 स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलाया.

मार्च से अंतरराष्ट्रीय टूर की है तैयारी

रतिंद्र ने बताया कि टूर का उद्देश्य सिर्फ बाघों के बारे में जानना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना है. स्कूल इसका मुख्य फोकस है. वहीं ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच समन्वय हो ये भी कोशिश की जाती है क्योंकि भले ही योजनाएं चल रही हों लेकिन जागरुकता जरूरी है.

इन्होंने बताया कि अगले साल मार्च में ये अंर्तराष्ट्रीय टूर पर जाने वाले है जिसमें ये म्यांमार, इंडोनेशिया, थाईलैंड समेत अन्य देश जायेंगे. अंतर्राष्ट्रीय टूर का उद्देश्य दूसरे देशों में बाघ सरंक्षण में किये जा रहे प्रयासों को समझना है.

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