Fashion/Film/T.VLead NewsTEENAGERSTRENDING

लेख टंडन से मुलाकात से पलटी जर्नलिस्ट इरशाद की किस्मत, बने बॉलीवुड के स्टार लिरिसिस्ट

गीतकार इरशाद कामिल के जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi :  हिंदी फिल्में देखने वाली नई पीढ़ी के युवाओं में एक गीतकार जो पिछले 18 वर्षों बेहद लोकप्रिय रहा है वो इरशाद कामिल हैं. मुझे इरशाद के कई गीत पसंद हैं लेकिन एक गीत ज्यादा ही अच्छा लगता है वो है फ़िल्म- लव आज कल का. क्या कमाल का गाना है पंजाबी भाषा की चाशनी में डूब कर निखरे इस खूबसूरत गीत को राहत फतह अली खान ने बहुत ही डूब कर गया है. प्रीतम चक्रवर्ती की प्यारी धुन में सजा ये गीत एकदम दिल से निकल कर दिल तक पहुंच जाता है.

advt

यही बात इरशाद कामिल ने एक इंटरव्यू के दौरान कही थी जब उनसे पूछा गया था कि आप इरशाद कामिल को एक वाक्य में कैसे बयान करेंगे तो वे बोले इरशाद वही है जो आपके दिलों तक पहुंचता है. इरशाद के अधिकतर गीत दिल से निकल कर दिल तक पहुंचने में कामयाब रहते हैं. यहीं मुख्य वजह है कि उनके गीत बेहद लोकप्रिय होते हैं.

इसे भी पढ़ें :5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर खास:   …ताकि भारतीय शिक्षा परंपरा का मूल अक्षुण्ण रहे

अज्ज दिन चढ़ेया

तेरे रंग वरगा -2

फूल सा है खिला आज दिन

रब्बा मेरे दिन ये ना ढले

वो जो मुझे खवाब में मिले

उसे तू लगा दे अब गले

तेनू दिल दा वास्ता.

इरशाद नाम पसंद नहीं था

इरशाद कामिल का जन्म पंजाब के मलेर कोटला में 5 सितंबर 1971 को हुआ था. इरशाद एक इंटरव्यू में बताते हैं कि एक समय ऐसा भी था कि मुझे इरशाद नाम पसंद नहीं था तब मैं पांचवीं या छठी क्लास में था. मैं मां से शिकायत किया करता था कि आपने मेरा नाम इतना छोटा क्यों रखा, जो शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता है. या लोग मुझे स्कूल में इरशाद-इरशाद कर के चिढ़ाते हैं तो मां ने इरशाद के साथ कामिल जोड़ा जो मुझे बेहद पसंद है. आज इरशाद और और कामिल दोनों पसंद है.

इसे भी पढ़ें :बिहार में तैयार हो रहा बीमारी का डेटा बैंक, 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की दर्ज होगी मेडिकल हिस्ट्री

पीएचडी करने के पीछे की कहानी

कामिल ने बताया कि पीएचडी करने के पीछे अपनी कहानी है. हमें शुरू से शौक था कि हम मुंबई जाएं. वहां पर काम करें, लेकिन जब भी घर वालों से इसका जिक्र किया तो वे बोलते थे कि पहले पढ़ तो लो, उसके बाद कहीं जाना तो मैंने हिंदी में कविता पर पीएचडी कर ली.

इसे भी पढ़ें :रिम्स में रैगिंग, जूनियर व सीनियर भिड़े, पुलिस तैनात

इस तरह बन गए जर्नलिस्ट

इरशाद बताते हैं कि जहां तक पत्रकारिता की बात तो वे एक दोस्त को चंडीगढ़ के द ट्रिब्यून अखबार में साक्षात्कार दिलवाने गया था. वहां लगे हाथ मैंने भी साक्षात्कार दे दिया. मेरे दोस्त इंटरव्यू में सलेक्ट नहीं हुआ लेकिन मैं पास हो गया और मैं जॉब करने लगा. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद मैंने जॉब छोड़ दी.

इसे भी पढ़ें :बिहार में तैयार हो रहा बीमारी का डेटा बैंक, 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की दर्ज होगी मेडिकल हिस्ट्री

लेख टंडन से मुलाकात के बाद चल निकली गाड़ी

इरशाद पत्रकारिता छोड़ने की सोच ही रहे थे कि एक दिन उन्हें फिल्मों में स्क्रिप्ट राइटर लेख टंडन का इंटरव्यू लेने के लिए भेजा गया. इस दौरान उन्होंने लेख टंडन को बताया कि उनको भी पढ़ने लिखने का शौक है. इंटरव्यू के बाद लेख उन्हें अपने साथ कार में ले गए और एक कहानी सुना कर कहा कि इसके सीन लिख कर ले आना.

लेख वहां टीवी सीरियल की शूटिंग कर रहे थे. इरशाद ने उन्हें कुछ सीन लिख कर दिए. लेख टंडन को वे पसंद आए तो उन्होंने 22 दिन तक की शूटिंग के दौरान इरशाद से काम कराया. जब वे काम खत्म कर बंबई लौटने लगे तो उन्होंने इरशाद को बंबई जानेवाली पश्चिमी एक्सप्रेस का टिकट थमा दिया. इरशाद अपने सपनों को पूरा करने के लिए बंबई पहुंच गए.

इसे भी पढ़ें :दारोगा पुत्र से लूटपाट करवाने वाली लड़की का आशिक हाजीपुर से गिरफ्तार

चमेली’ से गीत लिखने की शुरुआत

टीवी सीरियलों के लेखन के बाद डायलॉग लिखने का काम करने वाले इरशाद कामिल ने राहुल बोस-करीना कपूर अभिनीत ‘चमेली’ से गीत लिखने की शुरुआत की थी. इसके दो गीत बेहद खूबसूरत हैं. पहला गाना जिस पर आप में से बहुत से लोग हौले-हौले बीट मिलाते होंगे मन सात समंदर डोल गया, जो तू आंखों से बोल गया, ले तेरी हो गई यार सजणा वे सजणा. इसके साथ ही भागे रे मन कहीं. ये दोनों ही बेहतरीन गीत सुनिधि चौहान ने गाए थे. इस फिल्म का संगीत दिया था संदेश शांडिल्य ने. संदेश के साथ इरशाद ने आगे चल एक और फिल्म के लिए लाजवाब गीत लिखे थे वो फिल्म थी जब वी मेट.

इसे भी पढ़ें :RSS की तुलना तालिबान से कर फंसे जावेद अख्तर, BJP ने दी चेतावनी- जब तक माफी नहीं मांगते, तब तक…

जब वी मेट फिल्म के गीतों से मिली शोहरत

इरशाद कहते हैं कि फिल्मों की दुनिया ऐसी है कि जहां जल्दी किसी को शोहरत य बुलंदी नहीं मिलती हमने कई फिल्मों में गीत लिखे, लेकिन जब वी मेट फिल्म के गीतों ने मुझे शोहरत दिलाई. इससे लोग सर्च करना शुरू किया कि इरशाद कामिल कौन हैं. इस फिल्म के गीत नागाड़ा नगाड़ा बजा, मौज्जा ही मौज्जा’, तुमसे ही .तथा आओ मीलों चलें जाना कहां ना हो पता इन गीतों में एक अलग तरह की ताजगी नजर आती है . राशिद खान का गाया हुआ गीत आओगे जब तुम साजना तथा आओ मीलों चले जाना कहां ना हो पता जिसे उस्ताद सुल्तान खान ने गाया था दोनों ही लाजवाब बोल और कंपोजिशन में सजे गीत हैं.

इन गीतों को संदेश शांडिल्य और प्रीतम चक्रवर्ती दो अलग अलग मिजाज के म्यूजिक डायरेक्टर बड़े ही शानदार ढंग से से सजा कर पेश करते हैं. इसका एक गीत श्रेया घोषाल ने अपनी एनर्जेटिक आवाज में गाया है जो बेहद लोकप्रिय हुआ था.

इसे भी पढ़ें :गया में अपराधियों ने पैक्स अध्यक्ष पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई, बच गई जान

ये इश्क़ हाय बैठे बिठाये

जन्नत दिखाए हां

ओ रामा… ये इश्क़ हाय

बैठे बिठाये जन्नत दिखाए हां.

रॉकस्टार के गीतों ने अर्श पर पहुंचाया

हिन्दी में पीएचडी इरशाद ने अपने गीतों में हिन्दी, उर्दू के साथ-साथ अंग्रेजी और पंजाबी भाषा का भी खूब उपयोग किया है. पंजाबी भाषा में लिखा गया साड्डा हक एत्थे रख तो एक तरह से युवाओं का सिग्नेचर गीत हो गया है. इरशाद बताते हैं कि असल में इस गीत में उन्होंने अपने अंदर की भड़ास को जस-का-तस रख दिया है.

रॉकस्टार’ के गानों को लिखने के दौरान वे कई दिनों तक नॉस्टेल्जिक भी रहे. साड्डा हक एत्थे रख असल में अपने कॉलेज के दिनों में उन्हीं के द्वारा बनाया गया स्लोगन था, जो फिल्म की सिचुएशन के साथ याद आया. इम्तियाज और इरशाद की जोड़ी की यह चौथी फिल्म है और चार में से तीन फिल्मों का संगीत बहुत लोकप्रिय और यादगार रहा. रॉकस्टार के गीतों ने उन्हें एकदम से अर्श पर पहुँचा दिया है. हालाँकि इसकी म्यूजिक सीडी के पहले बैच में इरशाद का नाम गायब था. कंपनी ने इसे क्लेरिकल-मिस्टेक बताया बाद में नाम दिया था.

असल में ‘रॉकस्टार’ के लिए उन्हें गहरे दार्शनिक अर्थ लिए हुए गाने लिखने थे और वो भी युवाओं की भाषा में. इसके लिए वे एआर रहमान का शुक्रिया अदा करते हैं.

इसे भी पढ़ें :साहिबगंज में ऑडियो वायरल, रूपा तिर्की और भाजपा नेता को दी गई हैं गालियां

रहमान का साथ लाया रंग

इरशाद बताते हैं कि रहमान से वे पहली बार चेन्नई में मिले थे, तब उन्होंने कहा था,’तुम बहुत अच्छे गीतकार हो, लेकिन इस फिल्म के लिए तुम्हें सिर्फ गीत नहीं लिखने हैं, इतिहास लिखना है. बस दिल की सुनो और उसके पीछे चलो, व्यापार-व्यवसाय भूल जाओ.’ बताया जाता है कि इस एक फिल्म के लिए इरशाद ने पाँच फिल्में छोड़ी थीं. इस फिल्म का एक गीत का मुखड़ा है.

इसे भी पढ़ें :वैशाली में महुआ थाना की पुलिस पर जानलेवा हमला, थानेदार समेत कई पुलिसकर्मी घायल

शहर में हूं मैं तेरे

शहर में हूं मैं तेरे आके मुझे मिल तो ले

देना ना तू कुछ मगर आके मेरा दिल तू ले ले जाना

शहर में हूं मैं तेरे आके मुझे मिल तो ले

देना ना तू कुछ मगर आके मेरा दिल तो तू ले ले जाना

इसे भी पढ़ें :चोरी के आरोप में सरे बाजार महिलाओं ने दो महिलाओं के काटे बाल, की पिटाई, वीडियो बनाते रहे पुरुष, देखें VIDEO

रांझणा में रहमान के संग यादगार संगीत

धनुष और सोनम कपूर की 2013 में रीलीज हुई फिल्म रांझणा में भी इरशाद की शायरी और गीतों की रेंज देख सकते हैं. इसका एक गीत है मेरी हर मनमानी तुम तक, बातें बचकानी बस तुम तक. इसको जावेद अली, कृति और पूजा ने बहुत खूबसूरत ढंग से गाया है. इसके साथ ही सुखविंदर सिंह का गाया गाना तोहे पिया मिलेंगे तोहे पिया मिलेंगे भी खूब चला था. इसके अलावा ऐसे ना देखो जैसे पहले कभी देखा ही ना और श्रेया घोषाल की दिलकश आवाज में बनारसिया बनारसिया हाय बनरसिया भी एक अलग अनुभव देता है. फिल्म का टाइटल सांग जसविंदर सिंह की आवाज में बेहतरीन ढंग सामने आया है इसके बोल हैं

इसे भी पढ़ें :National Corona Update: लगातार पांचवें दिन संक्रमितों की संख्या 40 हजार के पार

रांझणा हुआ मैं तेरा

हुआ चारों ओर शहनाई शोर

तू मेरी ओर चल निकला

चढ़ी प्रेम लोर, ओ दिल के चोर

कर मेरी भोर, अब मुख दिखला

रांझणा हुआ मैं तेरा

कौन तेरे बिन मेरा

रौनकें तुम्ही से मेरी

कौन तेरे बिन मेरा

ओ… कौन तेरे बिन मेरा।

सुल्तान के गीतों में भी अलहदा रंग

सलमान खान और अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्म सुल्तान (2016) में इरशाद कामिल के गीतों में हम कई अलग अलग किस्म के रंग देख सकते हैं. जैसे विशाल डडलानी, बादशाह, शामली, इप्शिता का गाया हुआ गाना

बेबी को बेस पसंद है अपने अलग अंदाज और अल्फाजों की वजह से खूब चला था. इसी तरह से बादशाह के गाए गाने लगे 440 वोल्ट छूने से तेरे में भी रैप का स्टाइल युवाओं को खूब भाया था. विशाल शेखर के संगीत से सजे ये गीत लोगों को नाचने पर मजबूर कर देते हैं. इसके साथ ही पपोन का गाया वबुलैया बात ना करें मुझसे सूफी संगीत की शैली में महकता है.

इसे भी पढ़ें :Tokyo Paralympics: कृष्णा नागर ने बैडमिंटन में जीता गोल्ड मेडल, पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रेम गीतों के लिए नए शब्दों इस्तेमाल किए

वैसे भी हिन्दी फिल्मों में ज्यादातर गाने प्रेम पर ही होते हैं और इरशाद ने भी बहुत सारे प्रेमगीत लिखे हैं, लेकिन जब उन्होंने हिन्दी फिल्मों में गीतकार के तौर पर शुरुआत की थी तो कुछ चीजें तय कर ली थी. मसलन यह कि प्रेमगीतों में अब तक उपयोग में लाए जाने वाले शब्दों को अपनी शब्दावली से दूर रखेंगे, जैसे दिल, सनम, दिलरुबा, प्यार व इकरार आदि. उनका यह फैसला सही था. इससे लोगों को प्रेम गीतों का एक नया अंदाज ए बयान सुनने को मिला. इसके कई उदाहरण हैं जैसे सलमान खान की फिल्म सुल्तान (2016)में राहत फतह अली खान की आवाज में एक गीत है

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

ओ.. ना वो अखियाँ रूहानी कहीं

ना वो चेहरा नूरानी कहीं

कहीं दिल वाली बातें भी ना

ना वो सजरी जवानी कहीं

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई.

सुल्तान फिल्म की पृष्ठभूमि हरियाणा की है इसलिए इस गाने में ठेठ हरियाणवी शब्द थारे ( आप) इस्तेमाल किया गया है. यह एक शब्द इस बात का अहसास दिलाता है कि इस फिल्म का नायक हरियाणवी है. इसमें ऊर्दू भाषा के भी खूबसूरत लफ्ज इस्तेमाल हुए हैं जैसे रुहानी और नूरानी.

इसे भी पढ़ें :16 करोड़ के इंजेक्शन से बचेगी सृष्टि की जान, अब तक जमा हुए मात्र 40 लाख

प्रेम दर्द भी है

इरशाद कहते हैं कि फिल्मों में प्रेम को जिस तरह से ग्लैमराइज किया जाता है, युवा उसी को प्रेम समझते हैं. प्रेम का मतलब साथ घूमना-फिरना, गाना गाना है, लेकिन जब वे हकीकत में प्रेम करते हैं तब उन्हें महसूस होता है कि प्रेम सिर्फ साथ, हँसी-खुशी और नशा ही नहीं है, प्रेम दर्द भी है और प्रेम के बारे में यही वे युवाओं को बताना भी चाहते हैं. इसके लिए कई बार उन्हें फिल्मकारों को अपनी बात भी समझानी पड़ती है. वे शब्दों के विकल्प भी साथ रखते हैं.

इसे भी पढ़ें :MGNREGA : बहुरेंगे मनरेगा कर्मियों के दिन, प्रशासनिक मद में 100 करोड़ आवंटित

युवाओं से उनकी ही जुबान में संवाद की कोशिश

मुन्नी बदनाम हुई और शीला की जवानी जैसे गानों के बीच इरशाद के गानों ने हिन्दी फिल्म संगीत में अपनी जगह बनाई है. वे मानते हैं कि खुद इस तरह की (मुन्नी/शीला) चीजें नहीं लिख सकते हैं, लेकिन एक कलाकार होने के नाते वे दूसरे कलाकार के काम का सम्मान करते हैं. व्यक्तिगत तौर पर वे समाज और खासतौर पर युवाओं के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं.

वे अपने गीतों में वैसी भाषा तथा शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जो न्यू जेनरेशन के साथ कनेक्ट कर सके उन्हें झूमा सके. इसके लिए उन्होंने कई ऐसे गीत लिखे जिनमें हिंदी और अंग्रेजी की मिलीजुली शब्दावली इस्तेमाल होती है जिसे हम हिंग्लिश भी कहते हैं. इस तरह के गीतों के कुछ उदाहरण हैं

तुने मारी इंट्री यार दिल में बजी घंटी यार यह 2014में आई फिल्म गुंडे का था. इसे भी आगे जाकर यारियां फिल्म में अरिजित सिंह का एक गीत है शायरों से थोड़े शब्द ले के उधार इस गाने में बाद दो पैराग्राफ पूरा तरह से अंग्रेजी में हैं. इनके गीतों के शब्द उम्मीद के धागों पर, बारिश के बाद पानी की बूंदों की तरह तैरते रंग-बिरंगे ख़्वाबों को ज़ुबान देते हैं. इरशाद टेलीविजन की भी जानीमानी हस्ती हैं. उन्होंने कई टीवीशो के टाइटल ट्रैक लिखे. जिसमें ना जइयो परदेश, कहां से कहां तक शामिल है.

इसे भी पढ़ें :30 साल बाद बहुचर्चित रूबिया सईद अपहरण मामले की सुनवाई शुरू, यासीन मलिक से जिरह

रस घोलने वाले अल्फाज

इरशाद कामिल ने कई गीत ऐसे भी लिखे, जिसे सुनने के बाद दिल और दिमाग दोनों को सुकून मिलता है. अपने गीतों में उन्होंने रस घोलने वाले अल्फाज डाले हैं, जिसे सुनने के बाद शायद कठोर दिल भी पिघल जाए. उनका मानना है कि अल्फाज लिखना बहुत आसान है, लेकिन अल्फाजों में हकीकत लिखना बहुत मुश्किल है. किसी भी कविता, गजल या फिर गीत में सच्चाई लिखी जाए तो वह बहुत सुनी जाती है. यह एक ऐसा फोर्म है, जिसमें सुनने वाला सोचता है कि सामने वाले ने बिल्कुल मेरी बात कही है.

इसे भी पढ़ें :रांची : सदर अस्पताल में कौन सी दवा है एक क्लिक से मिलेगी जानकारी

अच्छे या बुरे गीत में सुनने वालों की बड़ी भूमिका

किसी भी अच्छे या खराब गीत के पीछे श्रोताओं का भी बड़ा हाथ है अगर सुनने वाले लोग अच्छे संगीत रूहानियत वाले संगीत को ही पसंद करे तो खराब गीत लिखे ही नहीं जाएंगे. क्योंकि जब सुनने वाले लोग ही खराब गीतों को लाइक करेंगे तो लिखने वाला लिखेगा ही.

इसे भी पढ़ें :थोड़ी राहतः पेट्रोल व डीजल की कीमत में 15 पैसे तक की कमी

किताबें भी लिखीं, म्यूजिक बैंड भी बनाया

उनकी छपी किताबों में समकालीन कविता पर आलोचना पुस्तक ‘समकालीन कविता: समय और समाज’ एक नाटक ‘बोलती दीवारें’ और एक नज़्मों की किताब ‘एक महीना नज़्मों का’ आदि किताबें शामिल हैं.इरशाद कामिल का अपना खुद का इंक नाम का म्यूजिक बैंड भी है.

पुरस्कार व सम्मान

तीन फ़िल्म फ़ेयर, दो ज़ी सिने, दो जीमा, अलावा, दो मिर्ची म्यूज़िक अवार्ड्स के अलावा स्क्रीन, आइफा, अप्सरा, बिग एण्टरटेनमेण्ट, ग्लोबल इण्डियन फ़िल्म, शैलेन्द्र सम्मान, टीवी अवार्ड और दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फॉउण्डेशन अवार्ड जैसे फ़िल्मी पुरस्कार मिले हैं.

लोकप्रिय गाने

* अगर तुम साथ हो : तमाशा, अलका याग्निक

* मैं रंग शरबतों का तू मीठे घाट का पानी : फटा पोस्टर निकला हीरो (2013) चिन्मय श्रीप्रदा – अतिफ असलम, प्रीतम चक्रवर्ती

* जन्म जन्म हो तू ही मेरे पास मां : फटा पोस्टर निकला हीरो (13), सुनिधि चौहान प्रीतम

* मेरे बिना तू खुश रहे जमाने में :  फटा पोस्टर निकला हीरो (13), फतेह अली खान हर्षदीप कौर प्रीतम

* तेरे होके रहेंगे : राजा नटवरलाल (2014) अरिजीत सिंह शंकर राजा युवान शंकर राजा

* तू ही तो है ख्याल तू ही तो है करार मेरा : हॉलीडे बेनी दयाल

* तू जाने ना : अजब प्रेम की गजब कहानी, (2009) नरेश कैलाश खेर

* पी लूं तेरे नीले नीले होठों की सरगम : वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई आशीष पंडित

* तुम जो आए जिंदगी में बात बन गई : टाइम इन मुंबई (2010) मोहित चौहान

* यह दूरियां इन राहों की दूरियां :लव आज कल (2009) मोहित चौहान, प्रीतम

* चोर बाजारी दो नैनो की पहली थी आदत : लव आज कल (09) सुनिधि नीरज श्रीधर

* सौ बार कहे यह दिल आजा तुझे प्यार करूं: यमला पगला दीवाना( 2011) श्रेया घोषाल-उमर नदीम, संदेश शांडिल्य

* सौदा यह दिलों का है सीधा साधा सौदा : आक्रोश अनुपम अमोद प्रीतम

स्केच : प्रभात ठाकुर, कला निर्देशक, बॉलीवुड .

इसे भी पढ़ें :वायरल ऑडियो में सांसद को गाली प्रकरणः दीपक प्रकाश करेंगे मानहानि का केस

 

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: