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अंडमान के सेंटिनल द्वीप में ईसाई धर्म का प्रचार करने गये थे जॉन ऐलन, लाश नहीं मिली  

गुस्साये आदिवासियों ने उनको तीरों से मार डाला. 27 साल के चाऊ का शव अभी तक बरामद नहीं हो सका है. कहा जा रहा है कि उनके शव को रेत में ही गाड़ दिया गया है

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Port blair : अंडमान के सेंटिनल द्वीप में मारे गये 27 वर्षीय अमेरिकी नागरिक जॉन ऐलन चाऊ ईसाई धर्म के प्रचारक थे. खबरों के अनुसार अनजान आदिवासियों के बीच जाने का उनका मकसद ईसाई धर्म का प्रचार करना था. चाऊ इससे पहले पांच बार अंडमान आ चुके थे. चाऊ ने अंडमान के इस द्वीप पर दो बारपहुंचने की कोशिश की थी. जानकारी के अनुसार 14 नवंबर को वे असफल रहे थे.  दो दिन बाद 16 नवंबर को वे पूरी तैयारी के साथ वहां पहुंचे, लेकिन कहा जा रहा है कि गुस्साये आदिवासियों ने उनको तीरों से मार डाला. 27 साल के चाऊ का शव अभी तक बरामद नहीं हो सका है. कहा जा रहा है कि उनके शव को रेत में ही गाड़ दिया गया है. जॉन ऐलन चाऊ सात मछुआरों के साथ बिना इजाजत एडवेंचर ट्रिप पर नॉर्थ सेंटिनल द्वीप गये थे.

सेंटिनेलीज जनजाति के लोगों के साथ मित्रता की कोशिश कर रहे थे

चाऊ सेंटिनेलीज जनजाति के लोगों के साथ मित्रता की कोशिश कर रहे थे.  अंडमान व निकोबार डीजीपी दीपेंद्र पाठक के अनुसार चाऊ छठी बार पोर्ट ब्लेयर की यात्रा कर रहे थे.  सूत्रों के अनुसार मछुआरों को उत्तरी सेंटिनल आइलैंड भेजने में मदद करने के लिए 25 हजार रुपये दिये थे.  मछुआरे 15 नवंबर की रात उन्हें आइलैंड के पश्चिमी सीमा तक एक छोटी नाव से ले गये.  वहां से अगले दिन चाऊ एक नाव लेकर अकेले ही आइलैंड तक गये.  पुलिस ने छह मछुआरों सॉ जंपो, सॉ टैरे, सॉ वाटसन, सॉ मोलियन, एम भूमि, सॉ रेमिस और ऐलेक्जेंडर को आदिवासी जनजातियों (विनियमन) अधिनियम की सुरक्षा का उल्लंघन करने और चाऊ की मौत का कारण बनने के लिए गिरफ्तार किया है. पुलिस ने 13 पन्नों का नोट अपने कब्जे में ले लिया है जिसे चाऊ ने लिखा था और द्वीप पर जाने से पहले मछुआरों के हवाले दिया था.

 आदिवासी शव के पास कर रहे थे अनुष्ठान

सूत्रों ने बताया कि चाऊ अपने दोस्त ऐलेक्जेंडर के यहां पोर्ट ब्लेयर में रह रहे थे. वे 16 नवंबर को उत्तरी सेंटिनल द्वीप गये थे.  आइलैंड में चाऊ ने सेंटिनेलीज के साथ मित्रता करने की कोशिश की.  उन्हें फुटबॉल, फिशिंग लाइन और मेडिकल किट भी गिफ्ट किये.  लेकिन 17 नवंबर को लगभग सुबह साढ़े छह बजे किनारों से लौटकर आये मछुआरों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने आदिवासियों को किसी लाश के पास अनुष्ठान करते हुए देखा, जो संभवतया चाऊ की हो सकती है.  मछुआरों ने चाऊ के साथी ऐलेक्जेंडर को घटना की जानकारी दी. बाद में ऐलेक्जेंडर ने चाऊ की मां को उसकी हत्या के बारे में बताया. पाठक ने जानकारी दी कि भारतीय तटरक्षक द्वीप के नजदीक पहुंचे और एसपी जतिन नारीवाल ने हवाई सर्वेक्षण भी किया, लेकिन शव नहीं मिला. बताया जा रहा है कि आदिवासी इतने गुस्से में थे कि उन्होंने हेलिकॉप्टर को नहीं उतरने दिया.

आदिवासियों का कबीला 60 हजार पुराना है

अंडमान निकोबार के नॉर्थ सेंटिनल द्वीप में 60 हजार साल पुराना आदिवासियों का कबीला है. पोर्ट ब्लेयर से 50 किमी दूर इस द्वीप पर दुनिया से कटे आदिवासियों की संख्या बेहद कम है. ये करंसी का इस्तेमाल नहीं करते, इन पर मुकदमा भी नहीं चल सकता.  सेंटिनेलीस एशिया की आखिरी अछूती जनजातियों में से एक हैं.  वह बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रखना चाहते हैं.  अंडमान के सेंटिनेल द्वीप में घुसने की मनाही के बावजूद चाऊ मछुआरों की मदद से वहां गये थे.  बता दें कि अंडमान निकोबार के सुदूर सेंटिनल द्वीप पर आदिवासियों का यह बेहद विलुप्तप्राय समुदाय रहता है.  इस समूह से मिलने की इजाजत किसी को नहीं है.

वह एक फुटबॉल कोच और पर्वतारोही भी थे : चाऊ के परिवार ने इंस्टाग्राम पर बयान जारी कर उनके निधन पर दुख जताया है.  परिवार ने  कहा कि वह ईसाई मिशनरी थे.  लेकिन वह एक फुटबॉल कोच और पर्वतारोही भी थे.  वह दूसरों की मदद करने वाले थे.  वह एक प्यारा पुत्र, भाई, अंकल थे.

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