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#JNUViolence: विपक्ष ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

New Delhi: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा को लेकर जहां राजनीति तेज हो गयी है. वहीं दिल्ली पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेते हुए एफआइआर दर्ज की है. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल से बात की है.


और उन्हें जेएनयू के एक प्रतिनिधिमंडल से बात करने को कहा है. इधर घटना में घायल 23 छात्रों को हॉस्पीटल से छुट्टी मिल गयी है.

गौरतलब है कि रविवार रात को उस वक्त हिंसा भड़क गयी जब लाठियों से लैस कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया, परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जिसके बाद प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा. हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष सहित कम से कम 28 लोग घायल हो गये.

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने जेएनयू छात्रों से विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने और परिसर में शांति बनाए रखने का आग्रह किया. एचआरडी मंत्रालय ने रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार से रविवार रात को हुई हिंसा पर तत्काल रिपोर्ट मांगी है.

निशंक ने ट्वीट किया, ‘जेएनयू परिसर में हिंसा चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं इसकी निंदा करता हूं. मैं छात्रों से विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने और परिसर में शांति बनाए रखने की अपील करता हूं.’

गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

जेएनयू के पूर्व छात्र तथा केन्द्रीय मंत्री एस. जयशंकर और निर्मला सीतारमण ने जेएनयू में हुई हिंसा की घटना की निंदा की है. सीतारमण ने कहा कि हिंसा की तस्वीरें भयावह हैं और सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालय सभी छात्रों के लिए एक सुरक्षित स्थान बने.

गृह मंत्री और एचआरडी मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और जेएनयू प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस प्रमुख अमूल्य पटनायक से बात की और मंत्रालय ने उनसे रिपोर्ट मांगी है.

जेएनयू प्रशासन ने कहा कि लाठियों से लैस नकाबपोश उपद्रवी परिसर के आसपास घूम रहे थे. वे संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और लोगों पर हमले कर रहे थे. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया गया.

इससे पहले, जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘ पूरे जेएनयू समुदाय के लिए एक जरूरी संदेश है कि परिसर में कानून और व्यवस्था की स्थिति रहे. जेएनयू प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया है.’’

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआइआर

दिल्ली पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेते हुए एफआइआर दर्ज किया है. पुलिस ने सोशल मीडिया और वीडियो फुटेज खंगालने की बात कही है.

दिल्ली पुलिस ने देरी से कार्रवाई के आरोपों के बीच कहा कि उसने फ्लैग मार्च किया और जेएनयू प्रशासन से लिखित अनुरोध मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया. हालांकि पुलिस ने यह नहीं बताया कि किसी को गिरफ्तार किया गया है अथवा नहीं.

घटना के बाद परिसर के भीतर और आस पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया है.

छात्रों ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की. कुछ टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित वीडियो फुटेज में पुरुषों के एक समूह को दिखाया गया जो हॉकी स्टिक लिए इमारत में घूम रहे थे.

जेएनयूएसयू और एबीवीपी ने आमने-सामने

वाम-नियंत्रित जेएनयूएसयू और एबीवीपी ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया. छात्र संघ ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के सदस्यों द्वारा किए गए पथराव में घोष सहित उसके कई सदस्य घायल हो गए.

लेकिन आरएसएस समर्थित छात्रों के संगठन ने आरोप लगाया कि उसके सदस्यों पर वाम-संबद्ध छात्र संगठनों ने क्रूरता से हमला किया जिसमें उनके 25 लोग घायल हो गए, जबकि 11 लापता हो गए हैं.

यह हिंसा तब हुई जब जेएनयू शिक्षक संघ एक बैठक कर रहा था.

इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर आर महालक्ष्मी ने घटना का ब्योरा देते हुए कहा,‘‘हमने टी प्वाइंट पर शाम पांच बजे एक शांति बैठक आयोजित की थी. जैसे ही यह खत्म हुई, बड़ी संख्या में लोग परिसर में दाखिल हुए और उन्होंने शिक्षकों और छात्रों पर मनमाने ढंग से हमला करना शुरू कर दिया.’’

एक अन्य प्रोफेसर प्रदीप शिंदे ने कहा, ‘‘हमें इस बात पर आश्चर्य है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग हाथों में छड़ें लिए कैंपस में कैसे घुसे . मुझे लगता है कि वे ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जो हमेशा हमें देशद्रोही कहते हैं.’’

ऑनलाइन साझा किए गए एक वीडियो में, घोष के सिर से खून बहते देखा जा सकता है. वीडियो में वह कहती सुनाई दे रही हैं, ‘‘मास्क पहने हुए लोगों ने मुझे बेरहमी से पीटा. जब मुझसे मारपीट की गई तब मैं अपने एक कार्यकर्ता के साथ थी. मैं बात तक करने की हालत में नहीं हूं.’’ जेएनयूएसयू ने दावा किया कि एबीवीपी के सदस्य मुखौटे पहने हुए लाठी, छड़ और हथौड़े के साथ परिसर में घूम रहे थे.

जेएनयूएसयू ने दावा किया, “वे पत्थर फेंक रहे थे. छात्रावासों में घुस रहे हैं और छात्रों की पिटाई कर रहे हैं. कई शिक्षकों को भी पीटा गया है.” अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि हिंसा के पीछे वामपंथी छात्र संगठनों का हाथ है.

एबीवीपी ने दावा किया कि हमले में लगभग 25 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और 11 छात्रों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. एबीवीपी के कई सदस्यों पर छात्रावासों में हमला किया जा रहा है.

मामले पर गरमायी राजनीति

पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने कई सवाल उठाये हैं. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पूछा है कि आखिर नकाबपोश लोग कैंपस में घुसे कैसे, पुलिस क्या कर रही थी. उप कुलपति और गृह मंत्रालय क्या कर रहे थे.


वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार रात हुई हिंसा पर निराशा जाहिर की और कहा कि यह उस डर को दिखाती है जो ‘हमारे देश को नियंत्रित कर रही फासीवादी ताकतों को’ छात्रों से लगता है.

उन्होंने ट्वीट किया, “नकाबपोश लोगों द्वारा जेएनयू छात्रों और शिक्षकों पर किया गया नृशंस हमला चौंकाने वाला है जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. हमारे देश को नियंत्रित कर रही फासीवादी ताकतें, बहादुर विद्यार्थियों की आवाज से डरती हैं. जेएनयू में आज हुई हिंसा उस डर को दर्शाती है.”

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा जेएनयू परिसर में हुई हिंसा में घायल छात्रों से मुलाकात करने के लिए दिल्ली के एम्स पहुंचीं.

उन्होंने ट्वीट किया,‘‘अब मोदी-शाह के गुंडे हमारे विश्वविद्यालयों में उपद्रव कर रहे हैं, हमारे बच्चों में भय फैला रहे हैं, जिन्हें बेहतर भविष्य की तैयारियों में लगे होना चाहिए. इस जख्मों को बढ़ाते हुए भाजपा नेता मीडिया में ऐसा दिखा रहे हैं कि जेएनयू में हिंसा करने वाले उनके गुंडे नहीं थे.

स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर के बाहर रविवार को कथित तौर पर हमला किया गया.

यादव ने कहा कि वहां गुंडागर्दी को रोकने के लिए कोई नहीं था और उन्हें मीडिया से बात नहीं करने दिया गया.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटना पर स्तब्धता जताते हुए कहा कि अगर विश्वविद्यालयों के अंदर ही छात्र सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश प्रगति कैसे करेगा.

केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘उपराज्यपाल से बात की और उनसे अनुरोध किया कि व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस को निर्देश दें. उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं और सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं.’’

मुख्यमंत्री के ट्वीट के कुछ ही समय बाद बैजल ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस को कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने हिंसा के लिए एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जेएनयू में छात्रों और शिक्षकों पर हमले की निंदा की और इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया.

एचआरडी मंत्रालय के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी‘पीटीआइ’ से कहा, ‘‘हमने परिसर में हिंसा पर जेएनयू के कुलपति से तत्काल रिपोर्ट मांगी है. हमने जेएनयू के वीसी और दिल्ली पुलिस से भी बात की है ताकि परिसर में शांति बनाई जा सके.’’

जेएनयू के पूर्व छात्र तथा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जेएनयू में हुई हिंसा की घटना की निंदा की. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘जेएनयू में जो कुछ भी हो रहा है उसकी तस्वीरें देखीं. हिंसा की स्पष्ट शब्दों में निंदा करता हूं. यह विश्वविद्यालय की परंपरा और संस्कृति के बिल्कुल खिलाफ है.’’

बसपा प्रमुख मायावती ने भी हमले की निंदा की.

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