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जमशेदपुर में JNAC के आश्रय गृह बन गये हैं स्थायी बसेरा, बारीडीह में सात साल से परिवार समेत जमे हैं लोग

जरूरतमंदों के लिए जगह नहीं, शेल्टर हाउस में बदइंतजामी का बोलबाला, कागजों पर रखे गये हैं कर्मचारी फर्जी दस्तखत करके निकाला जा रहा वेतन

Ajit Mishra

Jamshedpur  शहर में आने वाले ऐसे लोग जो होटल आदि में रहना अफोर्ड नहीं कर सकते, उनके  लिए आश्रय गृहों का निर्माण किया गया है. इनमें अस्थायी तौर पर कुछ दिन रहने का इंतजाम होता है. इन आश्रय गृहों को जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (जेएनएसी) द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इनमें से ज्यादातर आश्रय गृह अस्थायी न होकर कुछ लोगों का स्थायी पता बन चुके हैं. एक आश्रय गृह में तो सात साल से  कुछ परिवारों का बसेरा है. आश्रय गृहों में अव्यवस्था और मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने पर कई कर्मचारियों को काम से हटा भी दिया गया है.

बारीडीह के आश्रय गृह में टीवी से लेकर गैस चूल्हा तक सब  है 

बारीडीह मार्केट के नजदीक बने आश्रय गृह में पिछले सात साल से कुछ परिवारों का स्थायी बसेरा है. इसके चलते जरूरतमंद लोगों को वहां ठहरने की जगह नहीं मिल पाती. ये सभी परिवार सुख-सुविधा के पूरे इंतजामों के साथ रह रहे हैं.  आश्रय गृह में गैस चूल्हा, टीवी, मोटरसाइकिल, अलमारी सभी का प्रबंध है, लेकिन जांच के लिए जेएनएसी का कोई भी कर्मचारी तथा अधिकारी यहां नहीं आता.

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किशोरी नगर – कागजों पर हैं कर्मचारी, बनती है फर्जी हाजिरी    

जेएनएसी के तहत इन आश्रय गृहों को साई ब्यूटी हेल्थ केयर नामक संस्था संचालित करती है. हालांकि इसे काम करते कुछ महीने ही हुए हैं. इससे पहले फूरिडा नामक स्वयंसेवी संस्था द्वारा आश्रय ग्रहों का संचालन किया जाता था. जमशेदपुर शहर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग आश्रय गृह की व्यवस्था है. ज्यादातर आश्रय गृहों में घोर अव्यवस्था है. साकची में एमजीएम अस्पताल के पीछे किशोरी नगर आश्रय गृह सिर्फ महिलाओं के लिए है. यहां वर्षों से एक पुरुष गार्ड है. आश्रय गृह में मैनेजर और केयरटेकर समेत कुल पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन हकीकत में काम  कोई नहीं करता. हालांकि पांच लोगों का अटेंडेंस नियमित रूप से बनता है. यह काम करती है एक कर्मचारी की महिला रिश्तेदार, जो रजिस्टर में खुद ही सबकी हाजिरी बनाती है. ड्यूटी का टाइम भी लिखती है. यानी रजिस्टर जांच में इस हेराफेरी को कोई पकड़ नहीं सकता. इन कागजी कर्मचारियों का वेतन 5 से 12 हजार तक है.

महिला आश्रय गृह में सोता मिला पुरुष,  बदइंतजामी की भरमार

न्यूज विंग की पड़ताल के दौरान आश्रय गृह में एक पुरुष को सोते हुए पाया गया.  आश्रय गृह में शुद्ध पेयजल के लिए लगायी गयी केंट की RO मशीन शोभा बढ़ाने के काम आ रही है. रहनेवाली महिलाएं बाहर से पानी लाकर इस्तेमाल कर रही हैं. आश्रय गृह में कुछ महिलाएं महीनों से यहां स्थाई तौर पर रह रही हैं. कुछ ने तो खाना बनाने तक का इंतजाम भी रखे है. आश्रय गृह में रहने वालों की संख्या 6 से 8 है, लेकिन लेकिन रजिस्टर में यह संख्या 16 दिखायी जाती है.

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स्थायी आवास न होने के कारण रहे रहे हैं परिवार – जेएनएसी

ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इनकी जानकारी नहीं है. जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार ने न्यूज विंग से बातचीत में कहा कि लोगों के पास स्थायी घर न होने से वे काफी दिनों से आश्रय गृह में रह रहे हैं. इन्होंने अटल आवास योजना में आवेदन दिया है. घर की व्यवस्था होते ही ये सभी यहां से चले जायेंगे. उन्होंने कहा कि आश्रय गृहों से जल्द ही सारी अव्यवस्था दूर कर ली  जायेगी.

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