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जेएमएम ने केंद्र के फैसले को बताया वाजिब, कहा 21 जून तक वैक्सीनेशन अभियान का कैलेंडर जारी करे केंद्र सरकार

Ranchi: पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 जून को सबों को फ्री वैक्सीनेशन प्रोग्राम से जोड़ने की घोषणा की. झामुमो ने इस फैसले का स्वागत किया है. साथ ही कहा है कि वास्तव में यह फैसला केंद्र ने मजबूरी में लिया है.

पार्टी प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने मंगलवार को वीडियो जारी करते हुए कहा कि केंद्र ने यह कदम बहुत लेट उठाया. जब केंद्रीय बजट में कोरोना से बचाव को वैक्सीनेशन अभियान के लिये 35 हजार करोड़ का प्रावधान तय किया गया था, तो फिर राज्यों के उपर वैक्सीन का भार डालना ठीक नहीं था.

19 अप्रैल को जब केंद्र ने कहा था कि वो 45 साल से ऊपर वालों को फ्री वैक्सीन देगी, 18 प्लस वालों के लिये राज्य सरकारों को ही पैसे खर्च करने होंगे तो इस पर सवाल उठा था. आखिर 35 हजार करोड़ किस मद में व्यय हुआ.

बाद में सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने पर अंततः केंद्र सरकार ने 18 प्लस वालों को भी फ्री में वैक्सीन देने की घोषणा मजबूरी में की है.

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कैलेंडर जारी करने से आयेगी पारदर्शिता

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर टीकाकरण कार्यक्रम का कैलेडर जारी करे. राज्यों की आबादी के अनुसार उसे वितरित किये जाने वाले टीके, टीकों की संख्या, आवंटन तिथि वगैरह से संबंधित जानकारी मिले. इससे झारखंड और ऐसे अन्य छोटे राज्यों की उपेक्षा किये जाने की शिकायत कम होगी.

एक तरफ सरकार फ्री में देशव्यापी टीकाकरण की बात कह रही, दूसरी ओर इसके व्यावसायिकरण में भी लगी है. अभी के इमरजेंसी पीरियड में भी ऐसा किया जाना ताज्जुब भरा है. प्राइवेट पार्टियों को 25 फीसदी टीका सरकार देगी.

यानि कई लोगों को टीकाकरण के लिये प्राइवेट अस्पतालों में जाकर टीका के लिये पैसे खर्च करने होंगे. इससे टीका के राष्ट्रीयकरण कार्यक्रम के दावों पर सवाल बनता है.
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अनाज वितरण जरूरी

झामुमो के अनुसार केंद्र ने तय प्रावधानों के तहत दिवाली तक अनाज देने की घोषणा की है. वास्तव में यह कोई नयी बात नहीं. 2013 में यूपीए ने जो एनएफए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून) बनाया था, उसी के तहत केंद्र सरकार ऐसा कर रही है.

पार्टी ने यह भी मांग की है कि 20 अप्रैल से 7 जून के मध्य जो भी पैसे टीकों के लिये कंपनियों को दिये गये, उन्हें केंद्र लौटाये. 35 हजार करोड़ का प्रावधान जब केंद्र के पास है तो ऐसे में टीकों के लिये राज्य सरकार क्यों पैसे दे.

ऐसे में कंपनियों को दिये गये पैसों को राज्य सरकारों को वापस मिले. इससे राजकोषीय घाटा ठीक करने में भी मदद मिलेगी.

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