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झामुमो ने टाटा स्टील और TSPL की लौह अयस्क खदानों में कामकाज बंद कराया, विधायक के नेतृत्व में धरना पर बैठे कार्यकर्ता

टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस कंपनी का मुख्यालय पुणे शिफ्ट करने के विरोध में झामुमो ने टाटा समूह की कंपनियों में किया हुड़का जाम, उत्पादन और डिस्पैच पूरी तरह ठप

Aman Verma

Chaibasa : टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस कंपनी का मुख्यालय पुणे शिफ्ट करने के विरोध में झामुमो ने पूर्व घोषित हुड़का जाम कार्यक्रम के तहत टाटा स्टील की नोवामुंडी और घाटकुरी स्थित टाटा लांग प्रोडक्ट कंपनी की विजय-2 खदान के मुख्य गेट को  सुबह 6 बजे से ही जाम कर दिया है. इसका नेतृत्व पश्चिमी सिंहभूम झामुमो जिलाध्यक्ष सह चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव कर रहे हैं.  हुड़का जाम आंदोलन के तहत झामुमो के सैकड़ों कार्यकर्ता दोनों जगहों पर मुख्य गेट और रेलवे साइडिंग के बाहर झंडा-बैनर लेकर जमा हो गये. इससे आयरन ओर की लोडिंग और अनलोडिंग का काम पूरी तरह बंद हो गया है. इस बंदी से अकेले एसएलपीएल खदान में लगभग 10-15 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन व लगभग 4 हजार टन डिस्पैच प्रभावित होने का अनुमान है. आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा है. पुलिस-प्रशासन के उच्च अधिकारी आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं. विधायक सुखराम उरांव, राहुल आदित्य आदि नेता सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ 16 नवंबर की शाम से ही नोवामुंडी स्थित टाटा स्टील खदान के गेट पर तंबू डाल व अलाव जलाकर बैठे थे. बुधवार सुबह छह बजे से ही उक्त दोनों खदानों का गेट झामुमो कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया और खदान के अंदर किसी को घुसने नहीं दिया.

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बंद को सफल बनाने के लिए झामुमो जिला सचिव सोनाराम देवगम कल से ही नोवामुंडी में कैंप किये हुए थे. विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि झारखंड सरकार ने यहां के स्थानीय लोगों के हित में यह निर्णय लिया है कि राज्य में स्थित सभी निजी कंपनियों को अपने-अपने प्रतिष्ठानों में 75 फीसदी स्थानीय लोगों को बहाल करना होगा. इस बाध्यता से बचने के लिए टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस का मुख्यालय पुणे (महाराष्ट्र) शिफ्ट किया जा रहा है. मुख्यालय शिफ्ट होने से झारखंड में उक्त प्रतिष्ठान से जुड़े लगभग 15 हजार कर्मचारी बेरोजगार हो जायेंगे. साथ ही मजदूरों अथवा कर्मचारियों के साथ किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में न्याय के लिए महाराष्ट्र के न्यायालय के ही शरण में जाना होगा. टाटा समूह के इस फैसले से झारखंड को राजस्व का भी नुकसान होगा. जाहिर है टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस का मुख्यालय पुणे शिफ्ट करने का प्रयास झारखंड और झारखंड के स्थानीय लोगों के खिलाफ एक बड़ी साजिश का हिस्सा है.

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इधर घाटकुरी स्थित टीएसएलपीएल की विजय-2 खदान के गेट पर प्रेम गुप्ता, रीम बहादुर, अशोक दास, आलोक अजय तोपनो, शंकर बोबोंगा, शेख मुख्तार उर्फ पप्पू, शमशाद आलम आदि नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जाकर प्रबंधन को चेतावनी दी कि खदान के अंदर एक भी कर्मचारी रहा और उत्पादन हुआ, तो अंजाम बुरा होगा. इसके बाद खदान गये सारे कर्मचारियों व अधिकारियों को वापस भेज दिया गया. आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं  के लिये भोजन बनाने का कार्य चल रहा है.

झामुमो की मांगें

  • टाटा कमिंस प्राईवेट लिमिटेड के पैन को झारखंड से पुणे स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तत्काल रद्ध किया जाये.
  • पुणे से विद्युत सामग्री और अन्य सामग्रियों की खरीद बंद होनी चाहिए. इन वस्तुओं की खरीद यथासंभव आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयों से की जाये.
  • जियाडा में स्थापित ईएमसी (इलेक्ट्रिकल मैनुफैक्चरिंग सेंटर) में स्थानीय उद्यमियों की इकाई को विकसित करने में सहयोग मिलना चाहिए
  • विस्थापितों के लिए पुनर्वास योजना को तत्काल लागू किया जाना चाहिए, जिसमें शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए.
  • टाटा अपरेंटिशिप में 100 प्रतिशत भर्ती इस क्षेत्र के आदिवासी-मूलवासी को दी जानी चाहिए.
  • सीएसआर पहलों और इसके लिए बजटीय प्रावधानों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, इसके अलावा सीएसआर कार्यक्रमों की उपलब्धि को समय-समय पर जारी किया जाना चाहिए.

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