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देवघर डीसी की बर्खास्तगी पर झामुमो भड़का, कहा- ऐसे फैसलों का हो विरोध, रिपीट न हो यह उदाहरण

Ranchi : देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री को हटाये जाने के मसले पर झामुमो ने चुनाव आयोग से नाराजगी जतायी है. आयोग ने 6 दिसंबर को मुख्य सचिव को पत्र जारी करते हुए डीसी को हटाने को कहा है. सांसद निशिकांत दुबे मामले में गलत तरीके से करायी गयी एफआइआर को लेकर नाराजगी जतायी है. आयोग के इस फैसले को झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने गैर वाजिब औऱ राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप बताया है. मंगलवार को पार्टी कार्यालय में आय़ोजित प्रेस वार्ता में कहा कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी के तौर पर डीसी और एसडीओ की अहम भूमिका होती है.

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देवघर डीसी ने मधुपुर उपचुनाव के दौरान आयोग को शिकायत करते हुए कहा था कि सांसद दुबे लोगों के बीच कंफ्यूजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. टेंशन क्रिएट कर रहे हैं. कार्रवाई हो.

इसके बजाए डीसी को ही 4-5 दिनों के लिए चुनाव कार्यों से हटा दिया गया. चुनाव बाद कोड ऑफ कंडक्ट हटने पर फिर से मंजूनाथ भजंत्री को देवघर डीसी की जवाबदेही दी गयी.

अब आयोग सांसद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को आधार बना कर उन्हें हटाने को कह रहा है. यह असंवैधानिक है. ऐसे उदाहरण फिर से सामने नहीं आने चाहिए.

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राज्य के विषय क्षेत्र में आयोग का हस्तक्षेप

सुप्रियो ने कहा कि आयोग केंद्र सरकार की तरह राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने में लगा है. वह भाजपा के एक अग्रणी संस्थान के तौर पर काम करता दिख रहा है. इससे बचना होगा. राज्य में किस पदाधिकारी को क्या जिम्मेवारी मिलेगी, कहां मिलेगी यह सब देखने का संवैधानिक अधिकार राज्य सरकार का है. ऐसे में आयोग को अपनी छवि और सीमाओं का ख्याल रखना होगा. लेट से प्राथमिकी दर्ज होना कोई मुद्दा नहीं.

बच्चा बच्चा यह जानता है कि अपराध कभी मरता नहीं. रघुवर सरकार में राज्यसभा चुनाव में तत्कालीन पुलिस अफसर अनुराग गुप्ता ने असंवैधानिक करतूत की थी जिस कारण लेट से ही सही, मुकदमा हुआ था.

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एफआइआर दर्ज की जाये या नहीं, यह कोर्ट तय करेगा. आयोग नहीं. किसी मामले में फैसला देने का अधिकार भी कोर्ट का ही है.

10वीं अनुसूची के तहत बाबूलाल मरांडी की पार्टी का विलय भाजपा में किये जाने के मसले पर आयोग ने सहमति दे दी थी. वास्तव में यह विधानसभा का विशेषाधिकार है.

ऐसे में हो सकता है कि आयोग ही तय करे कि राज्य में कौन सी योजना किस नाम से चलायी जाये. धोती साड़ी योजना, पोटो हो योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना और अन्य योजनाएं भी वही तय कर दे.

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संवैधानिक संस्थाओं में हो रहा क्षरणः कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस ने देवघर डीसी मामले में आयोग के फैसले पर कहा कि यह संवैधानिक संस्थाओं में लगातार हो रहे क्षरण का उदाहरण है. प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि आयोग को सदैव सम्मान के दृष्टिकोण से एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के रूप में देखा जाता रहा है. उसकी भूमिका चुनाव के अधिसूचना के उपरांत आरम्भ होती है.

निष्पक्ष चुनाव के दृष्टिगत प्रशासनिक पदस्थापना के पूर्व सरकार चुनाव आयोग के अनुमति के बाद ही कोई फैसला लेती है. यह स्थापित परंपरा रही है. पर आयोग के द्वारा देवघर उपायुक्त के संबंध में लिये गये फैसले ने कहीं न कहीं उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न अवश्य खड़ा कर कहा है.

झारखंड में राज्यसभा चुनाव प्रकरण में एक पुलिस अधिकारी पर चुनाव आयोग के ही निर्देशानुसार जब तीन वर्षों के बाद भी FIR दर्ज हो सकता है तो किसी के ऊपर तीन महीने के बाद FIR क्यों नहीं दर्ज हो सकता. ऐसे में आयोग का फैसला वाजिब नहीं.

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Nayika

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