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छठ पर जारी गाइडलाइंस से जेएमएम-कांग्रेस भी सहमत नहीं, सीएम हेमंत सोरेन से की पुनर्विचार की मांग

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, अधिकारी कोविड-19 को केंद्र में रख लेते हैं निर्णय

Ranchi : छठ महापर्व को लेकर राज्य सरकार ने जो दिशा निर्देश जारी किया है, उस पर अब सरकार के प्रमुख दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री से पुनर्विचार करने की मांग की है. इससे पहले भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश भी असहमति जता चुके हैं. जान लें कि  जेएमएम प्रवक्ता विनोद पांडे ने जहां इस बाबत मुख्यमंत्री से मिल एक पत्र सौंपा है, वही झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने वीडियो जारी कर सरकार के अधिकारियों के निर्णय पर नाराजगी भी जता दी है. राजेश ठाकुर ने कहा कि यह निर्णय छठ के प्रति आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला निर्णय हैं.

राजेश ठाकुर

अधिकारी केवल कोविड-19 को केंद्र बिंदु में रखकर निर्णय लेते हैं. उन्हें यह भी समझना पड़ेगा आस्था के लोक पर्व छठ पूजा में असंख्य लोगों का विश्वास है और ऐसे में इस तरह का निर्णय सही नहीं है. राजेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि छठ पूजा वर्षों वर्ष से लोग नदी और तालाब के किनारे मनाते आए हैं.

कोविड 19 की वजह से सावधानी ज़रूरी है किंतु इसका मतलब क़तई ये नहीं है कि किसी को छठ घाट के किनारे पूजा करने से वंचित किया जाए. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सख़्त निर्देश देकर छठ घाट पर कोविड-19 के नॉर्म्स का पालन कराते हुए छठ पूजा करने की अनुमति दी जाए.

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हिन्दुओं के आस्था का महापर्व है छठ, पुनर्विचार करें मुख्यमंत्री : विनोद पांडे

जेएमएम प्रवक्ता विनोद पांडे ने कहा है कोविड-19 के कारण विगत 7 माह में सरहुल, रामनवमी, ईद, ईस्टर स्वतंत्रती दिवस, करमा, विश्वकर्मा पूजा, दुर्गा पूजा, काली पूजा के दौरान सरकार के हर दिशा-निर्देश का अक्षरशः पालन किया. छठ महापर्व हिन्दुओं के आस्था का महापर्व है. देश में झारखण्ड, बिहार एवं उत्तर प्रदेश में छठ महापर्व अपना विशेष स्थान रखता है.

वर्तमान समय मैं कोविड के नियन्त्रण एवं छठ महापर्व से जुडी लोक आस्था के कारण राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए दिशा निर्देशों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है.

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क्या है छठ महापर्व को लेकर सरकारी गाइडलाइन

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि इस बार छठ महापर्व के दौरान किसी भी नदी, झील, डैम या तालाब के छठ घाट पर किसी तरह के कार्यक्रम के आयोजन की मनाही होगी. छठ घाट के समीप कोई दुकान या स्टॉल नहीं लगेगा. पर्व के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पटाखा, लाइटिंग और मनोरंजन संबंधी कार्यक्रम पर पूरी तरह से रोक रहेगी.

इस संबंध में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के हस्ताक्षर से आदेश जारी किया गया है. सरकार द्वारा जारी इन पाबंदी वाले उपायों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर आपदा प्रबंधन कानून, 2005 की धारा 51 से 60 तक के तहत प्रावधानों के तहत और आईपीसी की धारा 188 के तहत कानूनी कार्यवाही की जा सकती है.

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