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‘जेएमएम’ के जीत की राह में ‘उलगुलान’ बिछा सकता है कांटे और ‘बीजेपी’ का हो सकता है रास्ता आसान

Akshay Kumar Jha

Ranchi: आज भले ही जेएमएम दो फाड़ में बंटा हुआ हो. पहला जेएमएम (सोरेन) और दूसरा जेएमएम (मार्डी) यानि जेएमएम (उलगुलान). लेकिन जब 80 के आखिरी और 90 के शुरुआती दशक में ये दोनों गुट एक साथ थे, तो उस वक्त इस पार्टी की झारखंड के इलाकों में गजब की पकड़ थी. 1992-93 में दोनों गुटों के विचार में मतभेद आने शुरू हुए और दोनों गुटों ने अलग होने का निर्णय लिया. शिबू सोरेन जिस जेएमएम के भाग को लेकर अलग हुए उसने झारखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए सत्ता तक का सुर भोगा. वहीं कृष्णा मार्डी जिस भाग को लेकर अलग हुए वो गुट आज झारखंड में कहीं नजर नहीं आती. पिछले चुनावों में भी इनका कोई अहम रोल नहीं रहा. लेकिन 2019 के चुनाव में एक बार फिर से अपने पैरों को जमाने की कोशिश जेएमएम (उलगुलान) कर रहा है. पार्टी के अध्यक्ष कृष्णा मार्डी दावा कर रहे हैं कि पार्टी चार लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ेगी. जिसमें पूर्वी सिंहभूम, दुमका, गिरिडीह और पलामू शामिल है.

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विनोद बिहारी महतो के बेटे गिरिडीह से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

झारखंड राज्य के लिए अपनी शहादत देने वाले शहीद विनोद बिहारी महतो के बड़े बेटे चंद्रशेखर महतो गिरिडीह से चुनाव लड़ सकते हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि वो इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. चंद्रशेखर महतो धनबाद में वकालत करते हैं. करीब 55 के चंद्रशेखर महतो करियर के आखिरी पड़ाव में राजनीति का दामन थामने की सोच रहे हैं. पार्टी का कहना है कि गिरिडीह लोकसभा में उनके काफी समर्थक हैं. पार्टी के लोग यहां हमेशा से सक्रिय रहे हैं. वहीं पार्टी को इस बात का भी भरोसा है कि विनोद बिहारी महतो की शख्सियत का फायदा उन्हें मिल सकता है. पार्टी के लोगों का यह भी कहना है कि सिर्फ जीत के लिए यहां उम्मीदवार नहीं उतारा जा रहा है, बल्कि पार्टी के लड़खड़ाते पांव फिर से क्षेत्र में जम सके, इसलिए ऐसा किया जा रहा है.

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दुमका में जेएमएम की बढ़ सकती है परेशानी

जैसा की पार्टी के अध्यक्ष का दावा है कि वो अपने उम्मीदवार दुमका और गिरिडीह में उतारने वाली है. इस बात से जेएमएम को नुकसान और बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है. दोनों झारखंड नामधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं के चेहरे भले ही बदल गए हो. लेकिन विचारधारा अभी भी एक जैसी ही है. दुमका से खुद शिबू सोरेन सांसद हैं और आने वाले चुनाव की तैयारी भी कर रहे हैं. ऐसे में जेएमएम (उलगुलान) अगर दुमका में उम्मीदवार उतारता है, तो शिबू सोरेन वाले जेएमएम की परेशानी बढ़ेगी. वहीं निश्चित तौर पर वोट कटने की स्थिति में बीजेपी के उम्मीदवार को फायदा हो सकता है.

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गिरिडीह में बीजेपी को होगा फायदा

गिरिडीह लोकसभा सीट के लिए हर पार्टी अपने तरीके से तैयारी में लगी हुई है. आजसू भी इस लोकसभा सीट के लिए ताल ठोंक रहा है. आजसू अगर एनडीए में शामिल होता है, तो भी गिरिडीह सीट पार्टी के लिए अहम मानी जा रही है. अगर आजसू बिना गठबंधन के चुनाव में उतरता है, तो गिरिडीह में अपना उम्मीदवार जरूर उतारेगा, जिसका महतो समुदाय से होना तय है. वहीं जेएमएम की तरफ से जगरनाथ महतो पिछली बार की तरह इस बार भी सांसद के प्रबल दावेदार हैं. जेएमएम (उलगुलान) चंद्रशेखर महतो को गिरिडीह से चुनाव लड़ाने की बात कह रही है. ऐसे में गिरिडीह से तीन बड़े महतो चेहरा चुनाव में आमने-सामने होंगे. निश्चित तौर पर महतो समाज का वोट कटेगा और इसका फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को होगा. वैसे बीजेपी से कौन उम्मीदवार होगा, अभी कहना जल्दबाजी होगी. सीटिंग एमपी रवींद्र कुमार पांडे की पेशानी पर टिकट को लेकर बल पड़ रहे हैं. उन्हें अपनी ही पार्टी के ढुल्लू महतो और कमल संदेश के संपादक शिवशक्ति बख्शी से राजनीतिक उठापटक करना पड़ रहा है.

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