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#JJMP सुप्रीमो पप्पू लोहरा ने कहा- बकोरिया कांड में मेरा हाथ नहीं, पुलिस ने दोस्त बन इस्तेमाल किया, अब दुश्मन

Manoj Dutt Dev

Latehar : प्रतिबंधित नक्सली संगठन झारखंड जनमुक्ति परिषद के सुप्रीमो पप्पू लोहरा ने कहा है कि बकोरिया कांड में उसका या उसके संगठन का हाथ नहीं था.

उसने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने दोस्त बनकर जेजेएमपी का इस्तेमाल माओवादियों के खिलाफ किया और अब दुश्मन बनकर संगठन पर हमले कर रही है.

लोहरा ने उक्त बातें न्यूजविंग संवाददाता से एक इंटरव्यू में कही हैं. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

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NewsWing : बकोरिया कांड में आपकी भूमिका क्या है?

पप्पू लोहरा : जब बकोरिया कांड हुआ था, उसके कुछ समय पहले ही मैंने अपने साथियों के साथ उस इलाके को छोड़ दिया था. बकोरिया कांड में मेरा या मेरे संगठन का कोई हाथ नहीं है.

मुठभेड़ को उपलब्धि के तौर पर पुलिस ने गिनाया और मीडिया के माध्यम से मुझ पर आरोप लगाये गये कि बकोरिया कांड में मेरे दस्ते का हाथ है.

हालांकि मीडिया से मुझे कोई नाराजगी नहीं. वह तो अपना काम कर रहा है.

NewsWing : कल तक पुलिस आपकी दोस्त थी, आज दुश्मन, कारण क्या है?

पप्पू लोहरा :   पुलिस ने संगठन का इस्तेमाल किया है. क्षेत्र में माओवादियों के प्रभाव को किसने खत्म किया है, सभी जानते हैं. यदि जेजेएमपी क्षेत्र में सक्रिय नहीं होता तो माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र से कभी कम नहीं होता.

पुलिस कल तक दोस्त थी. उसने हमारे संगठन का इस्तेमाल कर माओवादियों के वर्चस्व को लातेहार-गुमला लोहरदगा से ख़त्म किया है. अब जब माओवादियों का वर्चस्व ख़त्म हो रहा है तो पुलिस जेजेएमपी को भी ख़त्म कर रही है.

इसके बावजूद जेजेएमपी ने अब तक पुलिस पर हमला नहीं किया और न ही कोई जवाब दिया है. मगर पुलिस अब दुश्मन बन कर हमारे संगठन के साथियों को मार रही है, उन्हें पकड़ रही है और जेल भेज रही है.

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NewsWing : चुनाव में क्या करना है, किस प्रत्याशी या पार्टी को सहयोग करना है?

पप्पू लोहरा : किस पार्टी या प्रत्याशी का सहयोग करना है अभी सोचा नहीं है. समय आने पर संगठन निर्णय लेगा. चुनाव का संगठन की ओर से कोई बहिष्कार नहीं है. संगठन लोकतंत्र में आस्था रखता है. ग्रामीण बेफ़िक्र होकर मतदान करें.

NewsWing : आप ही सरेंडर कर चुनाव क्यों नहीं लड़ते?

पप्पू लोहरा : सरेंडर करने और चुनाव लड़ने के बारे में अभी सोचा नहीं है. अगला चुनाव पांच साल के बाद आयेगा तब तक विचार करेंगे कि सरेंडर किया जाये या नहीं और सरेंडर के बाद चुनाव लड़ा जाये या नहीं.

तब तक क्षेत्र में सक्रिय रह कर माओवादियो के विरुद्ध कार्रवाई करता रहूंगा. मगर अब न पुलिस का सहारा लूंगा और न ही पुलिस का साथ दूंगा.

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