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झाबुआ के मशहूर कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस ने हासिल कर लिया जीआई टैग  

झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे को देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने मान्यता देते हुए उसे भौगोलिक पहचान (जीआई) चिन्ह रजिस्टर्ड कर दिया है.

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Jhabua : झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे को देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने मान्यता देते हुए उसे भौगोलिक पहचान (जीआई) चिन्ह रजिस्टर्ड कर दिया है. बता दें कि मध्यप्रदेश के झाबुआ की पारंपरिक प्रजाति का कड़कनाथ मुर्गा पूरे देश में मशहूर है. बता दें कि साढ़े छह साल तक चली जद्दोजहद के बाद कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस के नाम को  जीआई का चिन्ह रजिस्टर्ड किया गया है. झाबुआ की गैर सरकारी संस्था ने आठ फरवरी 2012 को कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस को लेकर जीआई प्रमाणपत्र की अर्जी दी थी.

जानकारी के अनुसार इस निशान के लिए सहकारी सोसाइटी कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के स्थापित संगठन ग्रामीण विकास ट्रस्ट के झाबुआ स्थित केंद्र ने आवेदन दिया था.

जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार मांस उत्पाद और पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मीट की श्रेणी में किया गया आवेदन को 30 जुलाई को मंजूर कर लिया गया है.  इसका मतलब झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस का नाम जीआई टैग के लिए रजिस्टर्ड हो गया.  जीआई रजिस्ट्रेशन सात फरवरी 2022 तक वैध रहेगा.

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कड़कनाथ मुर्गे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबारी पहचान मिलेगी

जीआई रजिस्ट्रेशन का चिन्ह विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले ऐसे उत्पादों को दियाजाता है जो अनूठी खासियत रखते हों. अब जीआई चिन्ह के कारण कड़कनाथ चिकन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबारी पहचान मिल जायेगी. इसके निर्यात के रास्ते खुल जायेंगे. इस चिन्ह के कारण झाबुआ के कड़कनाथ चिकन के ग्राहकों को इस मांस की गुणवत्ता का भरोसा मिलेगा. इस मांस के उत्पादकों को नक्कालों के खिलाफ पुख्ता कानूनी संरक्षण भी हासिल होगा.

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स्थानीय लोग इसे कहते हैं कालामासी

झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय लोग कालामासी कहा जाता है. इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है. इसके मांस में दूसरी प्रजातियों के चिकन के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है. झाबुआवंशी मुर्गे के गोश्त में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है. कड़कनाथ चिकन की मांग इसलिए भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसमें अलग स्वाद के साथ औषधीय गुण भी होते हैं. कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और मांस दूसरी प्रजातियों के मुकाबले काफी महंगे बिकते हैं.

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