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झारखंड के सत्ताधारी दलों की बैठक 20 अगस्त को, चर्चा का बाजार गर्म

Ranchi: गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े खनन पट्टा लीज मामले पर सुनवाई पूरी हो जाने के बाद झारखंड की राजनीति में एकबार फिर भूचाल देखा जा रहा है. चुनाव आयोग द्वारा जैसे ही इस मामले पर सुनवाई पूरी करने और इसपर जल्द फैसला देने की बात कही गयी. राज्य की सत्ताधारी गठबंधन के कान खड़े हो गये. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आवास पर 20 अगस्त को यूपीए विधायकों की मीटिंग कॉल की है. कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को रांची में रहने का फरमान जारी कर दिया है. अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद से ही सियासी गलियारे में कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है. झामुमो के सचेतक सह टुंडी विधायक मथुरा महतो ने कहा कि कल यानी शनिवार को सीएम आवास पर 11:00 बजे पहुंचने को कहा गया है. हालांकि उन्होंने अचानक बुलाये गए इस बैठक की वजह नही बतायी. हेमंत सरकार में सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने अपने विधायकों को रांची से बाहर नहीं जाने का फरमान क्यों सुनाया, इस पर भी पार्टी के नेताओं का खुलकर कोई बयान सामने नहीं आ रहा है.

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सियासत गरमाने के हैं कई वजह

अचानक झारखंड में एकबार फिर से सियासत गरमाने के कई वजह दिख रहे हैं. विधानसभा के अध्यक्ष जो झारखंड मुक्ति मोर्चा से हैं उन्होंने कनाडा में होने वाली राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जाने से अंतिम समय में मना कर दिया. हालांकि, इसकी वजह वे स्वास्थ्य कारण बता रहे हैं. स्पीकर के साथ झामुमो के ही विधायक निरल पूर्ति और आजसू विधायक लंबोदर महतो को भी कनाडा जाना था. निरल पूर्ति ने कार्यक्रम स्थगित कर दिया जबकि, लंबोदर महतो झारखंड का प्रतिनिधित्व करने के लिये कनाडा चले गए. अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर झामुमो के विधायकों ने भी अंतिम समय में कार्यक्रम क्यों रद्द किया.

Sanjeevani

फिलहाल सरकार पर नहीं है कोई खतरा

सूबे की राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तो खूब हो रही हैं लेकिन, आंकड़े में हेमंत सरकार अभी भी बहुत मजबूत है. कहा यह जा रहा है कि कांग्रेस विधायक फिर कहीं गुलाटी न मार दे इसलिए सभी को रांची में रहने का फरमान जारी किया गया है. राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में फिलहाल कांग्रेस के विधायक कोई फिरकी चलाए यह दिख नहीं रहा है. हेमंत सरकार को खतरा तभी हो सकता है जब कांग्रेस के दर्जन भर विधायक कुछ गेम न करें.

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