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झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल में पनप रही है बीमारी, मच्छर भगाने के लिए मरीज जलाते है अगरबत्ती

लेकिन आम मरीजों को कोई सुविधा नहीं

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Ranchi: सुबे के सबसे बडे अस्पताल जहां राज्य के लोग अपनी बीमारी का  इलाज कराने आते है. वर्तमान में यह एक ऐसा अस्पताल बन गया है, जहां खुद ही बीमारी पनप रही है. जी हां हम बात कर रहे हैं राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान (रिम्स ) की जहां गंदगी की भरमार है. अस्पताल के बेसमेंट की महीनों से सफाई नहीं हुई है. जिस वजह से बेसमेंट में गंदगी की भरमार है. गंदे पानी में खतरनाक मच्छर और मख्खी पनप रहे है. यह मच्छर रात के अंधेरे में बाहर आते है और मरीजों को नुकसान पहुचाते हैं. इन्ही  मच्छरों के काटने से मरीजों की बीमारी और ज्यादा बढ़ जाती है.

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चिकनगुनिया, मलेरिया और टायफायड के मरीज है इलाजरत

रिम्स में दूर-दराज से लोग अपने बेहतर इलाज की उम्मीद लिए आते है. लोगों को अपनी बीमारी ठीक होने का पूरी उम्मीद होती है. कुछ मरीज तो ऐसे भी है जो इसे पूजते भी है. लेकिन यहां की अव्यवस्था और साफ-सफाई की अव्यवस्था देख हर को निराश ही होता है. बेसमेट के ऊपर ही आर्थो और फिर मेडिसीन वार्ड है, जहां हर वक्त मरीज होते है. वहीं कई मरीज चिकनगुनिया, मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड के भर्ती है. इन्हें अगर मच्छर काटते है तो उनकी बीमारी और भी बढ़ सकती है. मेडिसीन वार्ड में भर्ती प्रियंका कुमारी ने बताया कि बीते तीन दिनों रिम्स में भर्ती है, और मलेरिया से ग्रसित है. उन्होने दिनभर तो ठीक रहता है लेकिन रात में मच्छरों की भरमार हो जाती है. वहीं सुरेश उरांव ने कहा कि घर से चादर और मंगवाये है उसे ही ओढ कर रात में सोते है. रात में मच्छरों को भगाने के मच्छर भगाने वाली अगरवत्ती भी जलानी पड़ती है जो मरीजों के लिए खतरनाक है. लेकिन क्या करें हम सभी मजबूर है.

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मच्छरों और कुत्तो के कारण लालू प्रसाद को मिला पेइंग वार्ड लेकिन आम मरीजों को कोई सुविधा नहीं

रिम्स के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में राजद सुप्रीमों लाल प्रसाद को भर्ती कराया गया था. लेकिन उन्हें मच्छरों और कुत्तों ने परेशान कर दिया जिससे उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट देते हुए पेइंग वार्ड में शिफ्ट किया गया. जब सुपर स्पेशिलटी होस्पिटल में यह स्थिति है तो रिम्स के पुराने बिल्डिंग में क्या स्थिति होगी यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है. आम मरीजों  जो किसी भी परिस्थिति में रिम्स में भर्ती रहकर बस अपनी बीमारी ठीक होने की उम्मीद लगाए रखते है. उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट तो नहीं मिल सकता लेकिन साफ-सफाई में रहने के हकदार तो वे भी है.

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