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झारखंड में समेकित बाल संरक्षण योजना का हाल बेहाल

  • अनाथ और निराश्रित बच्चों की देखभाल के लिए केंद्र से मिल रहे कम पैसे
  • शहरों में दो जिलों में ही चाइल्डलाइन, 11 जिलों में ग्रामीण चाइल्डलाइन है कार्यरत

Ranchi : झारखंड में समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) का हाल बेहाल है. केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित योजना में झारखंड को लगातार अनुदान भी नहीं मिल रहा है. वित्तीय वर्ष 2009-10 से लेकर नौ वर्षों में झारखंड को दूसरे राज्यों की तुलना में अनुदान सिर्फ 26 करोड़ रुपये के आस-पास मिला है. 2009-10, 2010-11 और 2012-13 में केंद्र से एक रुपया भी अनाथ और निराश्रित बच्चों की देखभाल, उनके समुचित पुनर्वास के लिए नहीं मिला. झारखंड में कहने को दो शहरों- रांची और चाईबासा में शहरी चाइल्डलाइन काम कर रही है. देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गुमला, गिरिडीह, कोडरमा, खूंटी, हजारीबाग, पाकुड़, पलामू और साहेबगंज में ग्रामीण चाइल्डलाइन काम कर रही है. पर इसकी उपलब्धि काफी कम है.

क्या है समेकित बाल संरक्षण योजना

समेकित बाल संरक्षण योजना में राज्य के वैसे बच्चों की उचित देखभाल और पुनर्वास करना है, जो अनाथ हैं, जिनकी माता ने बच्चों को छोड़ दिया है और वे अनाथ स्थिति में इधर-उधर भटकते रहते हैं. इतना ही नहीं, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत इनका समुचित पुनर्वास करने, उन्हें शिक्षित करने और स्कूलों तक पहुंचाने की जवाबदेही भी सरकार की है. जानकारी के अनुसार कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं की तरफ से धनबाद के रेलवे स्टेशन पर रहनेवाले अनाथ बच्चों और रैग पिकर्स (कूड़ा-करकट चुननेवालों) के लिए माध्यमिक स्तर की शिक्षा दिलाने की पहल की गयी है. सरकार की तरफ से चाईबासा और कोडरमा में खनन क्षेत्र में लगे अनाश्रित बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्कूल खोले गये हैं. अन्य जिलों की स्थिति इस मामले में काफी अच्छी नहीं है. राज्य में प्लान इंडिया, सेव चिल्ड्रेन, भारतीय किसान संघ, एसटेक झारखंड समेत कई स्वयंसेवी संस्था काम कर रही हैं, पर इनका फोकस आईसीपीएस स्कीम पर कम है.

केंद्र से आईसीपीएस स्कीम में कितना मिला पैसा

वित्तीय वर्षमिली राशि
2009-10शून्य
2010-11शून्य
2011-124.20 करोड़
2012-13शून्य
2013-141.44 करोड़
2014-1536.03 लाख
2015-163.69 करोड़
2016-178.40 करोड़
2017-188.25 करोड़

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