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झारखंड में बुझता लालटेन, राजद के गिरिनाथ सिंह ने भी थामा बीजेपी का हाथ, कहा : चतरा के लिए इंटरस्टेड पर पार्टी लेगी फैसला

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Ranchi: झारखंड में लालटेन के बुझने के पूरे आसार हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि एक के बाद एक करके राजद के सारे दिग्गज बीजेपी का हाथ थामते जा रहे हैं. अन्नपूर्णा देवी, जनार्दन पासवान के बाद अब गढ़वा से जनता दल और राजद से चार बार गढ़वा के विधायक रह चुके गिरिनाथ सिंह ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. दिल्ली में बीजेपी कार्यालय में रक्षा मंत्री निर्मला सितारमण की मौजदूगी में गिरिनाथ सिंह ने पार्टी का दामन थाम लिया है. उन्होंने न्यूज विंग से बात करते हुए कहा कि हां मैं चतरा लोकसभा सीट के लिए इंटरेस्टेड हूं. लेकिन इस मामले में पार्टी का फैसला अंतिम होगा. पार्टी जो निर्णय लेगी मैं उसका स्वागत करूंगा.

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पिता की पार्टी में गिरिनाथ की वापसी

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गिरिनाथ सिंह के परिवार का राजनीति से काफी पुराना नाता रहा है. उनके पिता स्व. गोपीनाथ सिंह भी चार बार गढ़वा से विधायक रहे हैं. फर्क यही है कि वो हमेशा से बीजेपी के साथ थे. पूर्व विधायक गिरिनाथ राजद के संस्थापक सदस्यों में से थे. उनका पारिवारिक इतिहास जनसंघ से जुड़ा रहा है. उनके पिता स्व. गोपीनाथ सिंह जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में थे. गढ़वा विधानसभा से 1962 और 1969 में जनसंघ के टिकट पर उनके पिता विधायक बने थे. बाद में बीजेपी के गठन के बाद वर्ष 1985 और 1990 में गढ़वा के विधायक चुने गए. इंदर सिहं नामधारी के नेतृत्व में बने संपूर्ण क्रांति दल के भी संस्थापक सदस्य बने.

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राजद के संस्थापक सदस्य थे गिरिनाथ, नौ दिनों के लिए मंत्री भी बने

अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 1993 के उपचुनाव में पहली बार गिरिनाथ जनता दल से विधायक बने. उन्होंने बीजेपी के श्यामनारायण दुबे को शिकस्त दी थी. बाद के लगातार 1995, 2000 के चुनाव में उन्होंने जनता दल और राजद के प्रत्याशी के रूप में बीजेपी के श्यामनारायण दुबे को फिर से हराया था. वह वर्ष 1997 में राबड़ी देवी के मंत्रीमंडल में पीएचइडी के राज्यमंत्री बने. वहीं 2005 में जदयू प्रत्याशी सिराज अहमद अंसारी को हराकर लगातार चौथी बार विधायक बने. उसके अलावा नौ दिनों की शिबू सोरेन की सरकार में उन्हें संसदीय कार्य मंत्री भी बनाया गया था. वर्ष 2009 के चुनाव में झाविमो प्रत्याशी सत्येन्द्रनाथ तिवारी ने गिरिनाथ को पहली बार शिकस्त दी. चुनाव में शिकस्त मिलने के बाद उन्हें राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2014 के चुनाव में दूसरी बार झाविमो छोड़ बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी ने उन्हें दूसरी बार शिकस्त दी.

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बड़ा सवाल क्या बाहर से आए दो नेताओं को बीजेपी देगी टिकट

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या राजद से आए गिरिनाथ सिंह और अन्नपूर्णा देवी को बीजेपी टिकट देगी. बीजेपी के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए अब सिर्फ तीन सीटें बची हैं. इनमें रांची, चतरा और कोडरमा शामिल हैं. जाहिर सी बात है कि राजद से आए दोनों दिग्गज रांची से कतई चुनाव नहीं लड़ेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोडरमा और चतरा दोनों सीट बाहर से आए कैंडिडेट को दे दी जाएगी. यह भी साफ है कि राजद के दोनों दिग्गज लोकसभा की टिकट के लिए राजद छोड़ बीजेपी का हाथ थामा है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आखिर बीजेपी किसे खुश और किसे निराश करती है.

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