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#Jharkhand में आचार संहिता के दौरान बड़े पैमाने पर हुआ अवैध कोयले का कारोबार

Ranchi: विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में आचार संहिता लगने के साथ ही राज्य के कोयला क्षेत्र में चहलकदमी बढ़ गयी थी.

इस दौरान चतरा, लातेहार, रामगढ़, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, पाकुड़ और हजारीबाग जिला में बड़े पैमाने पर अवैध कोयले के कारोबार हुआ.

आचार संहिता के दौरान अवैध कोयले के कारोबार में कोयला कारोबारियों और पुलिस अधिकारियों के बीच संपर्क बढ़ने की खबरें भी आती रहीं.

अवैध कोयला कारोबारियों ने पुलिस अधिकारियों की मदद से बड़े स्तर पर कोयले की तस्करी की. इस दौरान अवैध कोयला कारोबारियों की कमाई जहां चौगुनी हुई वहीं सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ.

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छापेमारी खानापूर्ति बनकर रह गयी

विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही झारखंड में आचार संहिता लगी. तब से अवैध खनन ज्यादा ही बढ़ गया और अवैध कोयला कारोबारियों की कमाई चौगुनी हो गयी.

आचार संहिता में पुलिस के व्यस्त रहने के कारण चतरा, लातेहार, रामगढ़, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, पाकुड़,और हजारीबाग जिला में बेरोकटोक रात के अंधेरे से दिन के उजाले तक कोल तस्कर अवैध कोयले के कारोबार में मस्त रहे.

इससे झारखंड सरकार को करोडों के राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही. कोल तस्करी पर अंकुश लगाने वाली स्थानीय पुलिस व सीआइएसएफ मूकदर्शक बनी हुई है. छापेमारी खानापूर्ति बनकर रह गयी है.

वाराणसी व डेहरी मंडी कोयला खपाने का सबसे बड़ा केंद्र

जानकारी के अनुसार आचार संहिता के दौरान झारखंड में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन व कोयला चोरी का काम चला. इस अवैध कोयले को लोकल के ईट भट्टे के अलावा वाराणसी और डेहरी के मंडी में खपाया गया.

बता दें कि वाराणसी और डेहरी के मंडी अवैध कोयला खपाने का सबसे बड़ा केंद्र है. सूचना के मुताबिक आचार संहिता के दौरान झारखंड से करीब-करीब 60 से 70 ट्रक अवैध कोयला बनारस मंडी और डेहरी मंडी में भेजे जा रहा था.

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रांची के रास्ते हुई बड़े पैमाने पर कोयले की तस्करी

आचार संहिता के दौरान कोयला तस्करों ने तस्करी का नया रास्ता बनाया था. बंगाल के रानीगंज से पुरुलिया,चांडिल,रांची,रामगढ़ हजारीबाग होते हुए अवैध कोयला लदा ट्रक उत्तर प्रदेश के वाराणसी और बिहार के डेहरी मंडी पहुंच रहा था. हालांकि पिछले कुछ दिनों से इस रास्ते से हो रहा कोयला का कारोबार बंद है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 50 से 60 अवैध कोयला लदे ट्रक इन रास्तों से होते हुए वाराणसी और डेहरी मंडी पहुंच रहे थे. पुलिस की नाक के नीचे से धड़ल्ले से अवैध कोयले की तस्करी हो रही है, लेकिन इस मामले में पुलिस अनजान थी.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के लाला और झारखंड के गुप्ता जी इस कारोबार को संरक्षण दे रहे थे. लाला और गुप्ता अपने-अपने राज्यों में पुलिस को मैनेज करने का काम करते थे. अवैध कोयले का यह कारोबार प्रतिदिन डेढ़ से दो करोड़ रुपया का हो रहा था.

अवैध कोयले की तस्करी में लोकल लिंक और कुछ पुलिसवालों के सहयोग से यह काला खेल चल रहा था.

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