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झारखंड कभी भी रोम, इटली, फ्रांस नहीं बनेगा, आदिवासियों की भूमि आदिवासियों की ही रहेगी : फूलचंद

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Ranchi : आदिवासी समाज में आक्रोश व्याप्त है. जल, जंगल, जमीन के साथ अब आदिवासी परंपरा पर भी संकट मंडरा रहा है. आदिवासियों की परंपरा को खत्म कर विदेशी परंपराओं को अपनाया जा रहा है, जो गलत है. उक्त बातें केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने शनिवार को राजभवन के समक्ष आयोजित एक दिवसीय धरना के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि धर्मांतरित लोगों की वकालत करने के लिए ईसाई दोहरा लाभ दिला रहे हैं. इससे आदिवासी समाज में लोभ के कारण धर्मांतरण हो रहा है. पिछले कुछ दिनों में आदिवासी समाज को बरगलाने के कई मामले सामने आये हैं. ऐसे में जरूरी है कि ऐसे संस्थानों को सरकार चिह्नित कर उचित कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि झारखंड कभी भी रोम, इटली, फ्रांस नहीं बनेगा, आदिवासियों की भूमि आदिवासियों की ही रहेगी.

किशोर भगत और अल्येस्टर बोदरा को रिहा करे सरकार

कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी कमल किशोर भगत और अल्येस्टर बोदरा को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था. उन्हें जल्द से जल्द सरकार को रिहा करना चाहिए. उन्हेांने कहा कि राज्य के आंदोलनकारियों को सरकार हक, सम्मान, न्याय के साथ जीने दे, तभी राज्य का गौरव बना रहेगा.

झारखंड कभी भी रोम, इटली, फ्रांस नहीं बनेगा, आदिवासियों की भूमि आदिवासियों की ही रहेगी : फूलचंद

पाहन को बंदी बनाना निंदनीय

गुमला चैनपुर जिला में पाहन को बंदी बनाने की घटना की निंदा करते हुए बबलू मुंडा ने कहा कि ईसाई मिशनरी धर्म के नाम पर लोगों को बरगला रही है. चैनपुर में कैथोलिक ईसाई मिशन की ओर से जबरन क्षेत्र का अतिक्रमण करना और पाहन को बंदी बनाना निंदनीय है. ऐसे संस्थानों को चिह्नित कर उचित कार्रवाई होनी चाहिए.

समिति ने की ये मांगें

केंद्रीय सरना समिति की ओर से वेंडर मार्केट में 50  प्रतिशत दुकानें सरना आदिवासियों को दी जायें, रिम्स में 300 पदों पर होनेवाली नियुक्ति में विस्थापितों को पहले नौकरी दी जाये, सरकार के छोटे-बड़े संविदा में आदिवासियों को प्राथमिकता दें, धर्मांतरित आदिवासियों को जाति प्रमाणपत्र न मिले, विदेशी परंपरा संस्कृति पर रोक लगायी जाये समेत अन्य मांग की गयी.

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