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तेजी से घट रहा झारखंड का जलस्तर, एक साल में गिरा औसतन साढ़े छह फीट

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Ranchi : सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट में राज्यों में गिरते भूमिगत जलस्तर पर चिंता जतायी गयी है. बोर्ड की ताजा प्रकाशित रिपोर्ट (दिसंबर 2018) में कहा गया है कि झारखंड समेत बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, हरियाणा और अन्य जगहों में भूमिगत जल का स्त्रोत और नीचे चला गया है.

अगस्त 2017 से अगस्त 2018 के दौरान इन सभी राज्यों में दो मीटर यानि कि लगभग साढ़े छह फीट तक का स्तर नीचे गिरा है. बोर्ड ने देश भर में झारखंड समेत सभी राज्यों के 72 लोकेशनों में एक्वीफायर जोन बनाने का निर्णय लिया है. ताकि गिरते जल स्तर को कम किया जा सके.

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गर्मी में सुखने लगे हैं अधिकतर कुंए

जानकारी के अनुसार सिर्फ कुंआ ही नहीं, बोरवेल में भी जल स्तर कम हो रहा है. झारखंड की राजधानी रांची समेत, रामगढ़, धनबाद, संताल परगना के इलाके में जल स्तर तेजी से कम हो रहा है. राजधानी रांची के मोरहाबादी, हटिया, कांके, हरमू और रातू इलाके में जल स्तर दो मीटर से छह मीटर तक कम हुआ है.

इन इलाकों में कुंए के पानी का स्तर दो से चार मीटर तक कम हुआ है. अधिकतर कुंए गर्मी में सूखने लगे हैं. वहीं डीप बोरवेल की स्थिति भी एक वर्ष में बदल गयी है. अमूमन रांची में जहां 400 फीट तक के बोरवेल में एक इंच तक का पीने के पानी का बेहतर स्त्रोत मिल जाता था. वह अब छह सौ फीट में भी नहीं मिल रहा है.

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ये इलाके भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन की श्रेणी में शामिल

झारखंड के धनबाद शहर का झरिया इलाका, जमशेदपुर सदर, गोड्डा, चास, राजधानी रांची का कांके, रातू और मोरहाबादी इलाका अब भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन की श्रेणी में शामिल हो गया है. राज्य के जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी स्थिति अत्यधिक अपार्टमेंट बनने और बारिश के पानी का बेहतर भंडारन और पानी के रिचार्ज नहीं करने की वजह से उत्पन्न हुई है.

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