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Jharkhand : राशन कार्ड बनवाने के लिए 5 सालों से डीएसओ ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं ग्रामीण, उदासीन रवैये से 5 प्रखंडों के लोग परेशान

Garhwa : जिले के कांडी, भवनाथपुर, रंका और चिनिया प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीण राशन कार्ड बनवाने के लिए परेशान हैं. हर दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण समाहरणालय पहुंचते हैं. उपायुक्त कार्यालय के ऊपर आपूर्ति कार्यालय का चक्कर लगाते हैं और फिर निराश होकर लौट जाते हैं. उनकी समस्या का निदान पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूपये नहीं देने के कारण अबतक उनका राशन कार्ड नहीं बन पाया है.

गढ़वा जिला मुख्यालय से 50 से 60 किलोमीटर दूर से लोग राशन कार्ड बनवाने के लिए हर दिन समाहरणालय पहुंचते हैं. लोग राशन कार्ड बनवाने के लिए 200 से 250 रूपये किराया देकर समाहरणालय पहुंचते हैं. लेकिन सरकारी दफ्तरों में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 5 वर्ष से समाहरणालय आ रहे हैं, लेकिन अभी तक राशन कार्ड बन नहीं पाया है. डीएसओ ऑफिस के कर्मियों के रवैया से परेशान रहते हैं.

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ऑफिस के बाहर एक कार्टून रखा हुआ रहता है. जो भी लाभुक राशन कार्ड की फरियाद लेकर पहुंचते हैं, उनके आवेदन कार्टून में रख देने के लिए बोल दिया जाता है. लाभुक असगर अंसारी, फूलकुमारी देवी, धनराज यादव, आयुष प्रिया, नागेंद्र पासवान एवं अन्य ने बताया कि हमलोग कार्टून में आवेदन रख कर जाते हैं और शाम में आवेदन फेंक दिया जाता है. दूसरे दिन जब जाते हैं तो वहां के ऑपरेटर बोलते हैं कि आवेदन फिर से जमा कीजिए.

भाजयुमो के जिला मीडिया प्रभारी लक्ष्मी पांडेय ने कहा कि सरकार एक तरफ आम जनता को राशन कार्ड बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालय में कैंप लगाकर बनवाने का आदेश दे रही है, लेकिन यहां की स्थिति देखकर लगता है कि राशन कार्ड बनवाने के नाम पर भारी लापरवाही हो रही है. राशन कार्ड बनवाने के नाम पर लाभुकों से नाजायज राशि मांगी जाती है. दूर दराज के इलाके से लाभुक 250 रुपया किराय लगाकर इस उम्मीद से आते हैं ताकि उनका राशनकार्ड बन जाये. उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत गढ़वा डीसी राजेश कुमार पाठक से की जाएगी, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना न पड़े.

इधर, डीएसओ बिजेंद्र कुमार ने बताया जो गलत कर रहे हैं, उनके खिलाफ उचित करवाई की जाएगी. राशनकार्ड का आवेदन अपलोड करने वाला पोर्टल बहुत धीमा चल रहा है. कभी कभी बंद भी हो जाता है. उनके कार्यालय में ऑपरेटर की भी कमी है. इसलिए काम अभी धीमा चल रहा है.

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