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झारखंड के जनजातीय समुदाय से समझें मध्यस्थता और सुलह का महत्व : महेश पोद्दार

Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था आदि के साथ-साथ कानूनी मामलों में भी विश्व में अग्रणी बनेगा. उन्होंने कहा कि यह पहली सरकार है जिसने विवादों के निपटारे के लिए गठित होनेवाली मध्यस्थता संस्थाओं में चैंबर ऑफ़ कॉमर्स जैसी संस्थाओं को भी प्रतिनिधित्व देने का फैसला लिया है. श्री पोद्दार ने राज्यसभा में मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2019 पर चर्चा में भाग लेते हुए यह विचार व्यक्त किया.

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श्री पोद्दार ने कहा कि मध्यस्थता से मानव जीवन का सम्बन्ध सृष्टि के आरम्भ से है और जैसे-जैसे हम विकास प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं, इसका महत्व बढ़ता जा रहा है. उन्होंने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां जनजातीय समुदाय में मध्यस्थता के जरिये विवादों के निपटारे का प्रचलन है. जनजातीय समुदाय अब भी सुलह के जरिये विवाद सुलझाने के मामले में तथाकथित आधुनिक समाज से कहीं ज्यादा आगे और ज्यादा समर्थ हैं.

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उन्होंने कहा कि निर्वाचित पंचायती राज संस्थाओं के अधीन कार्यरत ग्राम न्यायालयों ने भी सुलह और मध्यस्थता के जरिये विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. इसलिए मैंने झारखंड सहित उन राज्यों में भी ग्राम न्यायालयों की स्थापना का आग्रह किया है जहां अब तक इनका गठन नहीं हो सका है.

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मध्यस्थता एवं सुलह के महत्व को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए क़ानून और उस क़ानून के आधार पर गठित संस्था की जरुरत महसूस की गयी. मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2019 विवादों के समाधान के लिए संस्थागत मध्यस्थता को प्रोत्साहित करने के सरकार की कोशिशों का हिस्सा है. इस संशोधन में एक स्वतंत्र संस्था “ आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया” बनाने का प्रावधान है. यह संस्था मध्यस्थता करनेवाले संस्थानों को ग्रेड देगी और नियम तय करके मध्यस्थता करनेवालों को मान्यता प्रदान करेगी. साथ ही मध्यस्थता के लिए प्रोफेशनल स्टैंडर्ड बनाने के लिए पॉलिसी और गाइडलाइन तय करेगी.

संशोधन विधेयक में गोपनीयता रखने के लिए भी तमाम प्रावधान किये गये हैं, इसमें 42A सेक्शन इसी उद्देश्य से जोड़ा गया है. इसके अलावा सुनवाई के दौरान किसी भूल की वजह से कानूनी कार्यवाही से बचाने के लिए भी सेक्शन 42B जोड़ा गया है.

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