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Jharkhand: PTPS के लिये ट्रांसमिशन टेंडर रद्द, नयी शर्तों के साथ निगम निकालेगा टेंडर

ट्रांसमिशन लाइन की कमी के कारण हर महीने 17 करोड़ राष्ट्रीय कंपनियों को होता है भुगतान

Ranchi: राज्य में एनटीपीसी चतरा और पीटीपीएस पतरातू दो महत्वपूर्ण पावर प्रोजेक्ट्स है. दोनों को ही शुरू करने की अलग-अलग सालों में समय तय की गयी है. लेकिन अब तक इन प्रोजेक्ट्स पर काम पूरा नहीं हो पाया. इन प्रोजेक्ट्स के शुरू नहीं होने की एक प्रमुख वजह ट्रांसमिशन लाइन का न होना है. पीटीपीएस को साल 2024 में शुरू किया जायेगा. इसके लिये ट्रांसमिशन लाइन का टेंडर कुछ समय पहले झारखंउ उर्जा संचरण निगम ने निकाला था. लेकिन अब यह टेंडर रद्द कर दिया गया है. निगम की मानें तो नयी शर्तों के साथ फिर से टेंडर निकाला जायेगा. पूर्व के टेंडर में तकनीकि खामियां थी. वहीं एनटीपीसी के लिये ट्रांसमिशन लाइन पूरा नहीं हुआ है. यहां मामला फॉरेस्ट क्लियरेंस के कारण रूका है.

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राज्य का अपना ट्रांसमिशन की कमी

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राज्य में अब भी अपना ट्रांसमिशन लाइन की कमी है. ऐसे में जेबीवीएनएल एनटीपीसी और पीजीसीआइएल के ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग करती है. इन कंपनियों के ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग करने पर हर महीने लगभग 17 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जाता है. राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दूसरे के लाइन से बिजली लेने के एवज में 28 से 30 पैसे प्रति यूनिट की दर तय की है. इस हिसाब से हर साल 204 करोड़ रुपये खर्च हो रहा है.

Sanjeevani
MDLM

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बिजली किया जाता है सरेंडर

अधिकारियों की मानें तो ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली भी सरेंडर करनी पड़ती है. राजधानी रांची में अंडर ग्राउंड केबलिंग का काम पूरा नहीं हुआ है. दो चरणों के तहत दूसरे चरण का काम जारी है. वहीं बिजली खरीद और रिपेयर मेनटेनेंश का कॉस्ट बढ़ गया है. 2016-17 में बिजली खरीद व रिपयेर-मेंटेनेंस में 6298 करोड़ रुपये, 2017-18 में 6253 करोड़ रुपये 2018-19 में 6237 करोड़ रुपये खर्च हुआ. अब इस मद में 13541 करोड़ रुप ये बिजली खरीद व रिपेयर मेंटेनेंस में खर्च किया जा रहा है. लेकिन फिर भी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली नहीं मिलती.

कब-कब बनी योजना

राज्य में ट्रांसमिशन लाइन बनाने के लिये अलग-अलग समय में एग्रीमेंट किया गया. वर्ल्ड बैंक से 2311 करोड़ कर्ज लेकर 61 ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड सब स्टेशन बनाने की योजना बनी. पीपीपी मोड से 59 ग्रिड सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट के लिये 4605 करोड़ का प्लान बना. यही नहीं राज्य योजना से 35 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन 1193 करोड़ की लागत बनाने की योजना बनी. ऐसे में सभी योजनाओं का कुल 8109 करोड़ रुपये की योजना बनायी गयी. हालांकि पिछले दो साल में नौ ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड सब स्टेशन शुरू किये गये. वहीं कुछ ट्रांसमिशन लाइन पर टेंडर का पेंच फंसा ही हुआ है.

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