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वित्तीय संकट की ओर झारखंड ! 40.50 लाख करोड़ के ऑन गोइंग प्रोजेक्ट का बढ़ा कॉस्ट, खजाने में पैसे की कमी

अफसरों की मिली भगत से उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने के बाद भी दूसरा एडवांस मिल रहा

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Ranchi: झारखंड वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है. सरकार के सभी विभागों में विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए बजट में 40 लाख 50 हजार 300 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. लेकिन बार-बार प्रोजेक्ट की डिजाईन और डीपीआर चेंज होने के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट हजार करोड़ से अधिक बढ़ गया है.

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इसके अलावा राज्य सरकार ने कई और नये प्रोजेक्ट भी लिए हैं. इसका असर खजाने पर भी पड़ रहा है. उदाहरण के लिए रांची में पहले चरण में सीवरेज-ड्रेनेज के लिये 360 करोड़ का कार्यादेश कानपुर की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को मिला था.

कंपनी को रांची नगर निगम की तरफ से इस काम के लिए 54 करोड़ रुपये की अग्रिम और चार करोड़ का बिल भुगतान भी किया गया. 18 महीने के अंदर न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और ना ही काम आगे बढ़ा. अब कंपनी कह रही है कि प्रोजेक्ट कॉस्ट 8 फीसदी और बढ़ाया जाये साथ ही मियाद भी बढ़ाई जाये. इसी तरह एक दर्जन से भी अधिक प्रोजेक्ट्स का कॉस्ट बढ़ गया है.

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अफसरों की मिलीभगत से भी गहराया वित्तीय संकट

विभिन्न प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे ठेकेदारों और अफसरों की मिली भगत से वित्तीय संकट गहरा रहा है. बड़े ठेकेदार जो पहुंचवाले हैं, वे अफसरों की मिली भगत से एडवांस ले लेते हैं. नियमत: पहले एडवांस की उपयोगिता प्रमाण पत्र देने के बाद ही दूसरा एडवांस मिलता है. लेकिन एक ही काम में एक से ज्यादा एडवांस पहुंच वाले ठेकेदारों को मिल रहा है. राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है. इस कारण बजट प्रावधान से भी पार कर जाता है.

राजस्व की वसूली भी हो रही कम

सरकार को जहां से राजस्व मिलता है, वहां से वसूली भी कम हो रही है. जीएसटी लागू होने के बाद भी घपला हो रहा है. इससे पहले ठेकेदारों को जो पेमेंट होता था, उसमें टैक्स काट लिया जाता था. जब से जीएसटी लागू हुई है, तब से बिना टैक्स के पेमेंट हो रहा है. इस कारण टैक्स नहीं आ पा रहा है. वहीं एसी-डीसी बिल की बाध्यता खत्म होने के कारण भी वित्तीय संकट गहरा रहा है. अब अफसर उपयोगिता प्रमाण पत्र में सिर्फ लिखकर दे देते हैं कि पैसा का उपयोग हो गया है. लेकिन इसका कोई सत्यापन नहीं हो पा रहा है.

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कई प्रोजेक्ट में जोड़-तोड़ और फिर से निर्माण

कई प्रोजेक्ट्स में जोड़-तोड़ और फिर से निर्माण के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ गया है. उदाहरण के लिए बिरसा स्मृति पार्क को फिर से तोड़कर बनाने का आदेश दिया गया. मोरहाबादी में बन रहे टाइम्स स्कवॉयर को फिर से ठाक करने को कहा गया. ऐसे कई प्रोजेक्ट्स की डिजाइन में बदलाव किये गये. वहीं सरकार के अफसर एजी से खर्च की गई. राशि का मिलान करने भी नहीं जाते हैं. इस मसले पर एजी ने बार-बार राशि के मिलान का आग्रह भी किया है.

कर्ज के बोझ तले दबा है झारखंड

लोक ऋण- 3760.56 करोड़
कर्ज व उधार- 1543 करोड़
पूंजीगत खर्च- 12305.59 करोड़
राजस्व खर्च- 62744.44 करोड़

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किस विभाग में कितने का प्रोजेक्ट

कृषि- 26500 करोड़
भवन- 57100 करोड़
ऊर्जा- 340000 करोड़
वन एवं पर्यावरण- 41000 करोड़
स्वास्थ्य- 260000 करोड़
उद्योग व खान- 42500 करोड़
पथ- 400000 करोड़
ग्रामीण विकास- 650000 करोड़

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