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कहीं 56 हजार करोड़ के निवेश से हाथ तो नहीं धोया झारखंड, तीन अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट पर अब तक पेंच

Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कई मौके पर झारखंड को पावर हब बनाने की घोषणा की. लेकिन हकीकत अब भी कोसों दूर है. राज्य में तीन अल्ट्रामेगावाट पावर प्लांट के निर्माण में अब तक पेंच फंसा हुआ है. दो साल से एक ईंच भी गाड़ी आगे नहीं बढ़ी है. रिलायंस के पीछे हटने के बाद तिलैया अल्ट्रा मेगा पावर प्वांट की स्थिति वहीं की वहीं है. टीवीएनल के विस्तारीकरण को कैबिनेट से स्वीकृति लगभग डेढ़ साल पहले मिली. काम एक ईंच भी आगे नहीं बढ़ा. देवघर अल्ट्रा मेगावाट पावर प्लांट के लिये जमीन अधिग्रहण ही नहीं हुआ. इन तीनों पावर प्लांट में लगभग 56 हजार करोड़ रुपये निवेश किया जाना ह. लेकिन अब तक एक कौड़ी भी निवेश नहीं हो पाया है. फिलहाल पतरातू प्लांट का शिलान्यास किया गया है. इसे भी बनने में 36 से 42 माह का समय लगेगा.

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क्या है तिलैया अल्ट्रा मेगावाट की स्थिति

जब यह परियोजना रिलायंस को मिली थी तो पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत 18 प्रोक्यूरर( बिजली के खरीदार) ने एग्रीमेंट में हस्ताक्षर किया था. प्रावधान यह था कि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन पावर प्लांट के लिये स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) बनायेगा. साथ ही शुरुआती खर्च पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन ही करेगा. प्रावधान के मुताबिक पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन ने परियोजना की शुरुआत में राशि लगाई. इसके बाद स्पेशल पर्पस व्हीकल ने रिलायंस को हस्तांतरित कर दिया. तब पीएफसी द्वारा खर्च की गई राशि रिलायंस को देनी पड़ी.

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राज्य सरकार का प्रस्ताव भी जस के तस

रिलायंस के पीछे हटने के बाद राज्य सरकार ने ऊर्जा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा. पहले विकल्प के रूप में कहा गया कि फिर से रिबिडिंग (पुन: टेंडर) किया जाये. दूसरे प्रस्ताव के रूप में कहा गया कि प्लग एंड प्ले मोड (वर्तमान प्रक्रिया को बंद कर नई प्रक्रिया के तहत किसी को दिया जाये) में प्रक्रिया शुरू की जाये. पर स्थिति जस की तस है.

क्या है तिलैया अल्ट्रा मेगावाट पावर प्लांट की फैक्ट फाइल

  • रिलायंस को तिलैया में 3960 मेगावाट का पावर प्लांट लगाना था.
  • वर्ष 2009 में 1.77 रुपये प्रति यूनिट बिजली देने की दर से बोली लगाकर रिलायंस ने यह परियोजना हासिल की थी.
  • सितंबर 2013 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के पास टैरिफ संशोधन के लिये आवेदन दिया गया था.
  • परियोजना में देरी होने से 16 हजार करोड़ रुपये लागत बढ़ गई.
  • परियोजना के लिये 2523 एकड़ जमीन और 12108 एकड़ में कोल माइंस की जरूरत थी.
  • मुख्य प्लांट के लिये 470 एकड़ जमीन रिलायंस को दी जा चुकी थी.
  • 1220 एकड़ जमीन को फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिल चुका था.
  • 885 एकड़ जमीन और एप्रोच रोड के लिये 106 एकड़ जमीन देने की प्रक्रिया जल रही थी.
  • कोल ब्लॉक के लिये नये नये प्रपत्र पर आवेदन जमा करने के लिये कहा गया था.
  • 3500 करोड़ का पुर्नवास पैकेज तैयार किया गया था.

देवघर अल्ट्रा मेगावाट पावर प्लांट : इसके लिये गोसाई पहाड़ी कोल ब्लॉक का आवंटन किया गया. 2432 एकड़ जमीन चिन्हित की गई. इसमें 1732 एकड़ निजी, 300 एकड़ सरकारी और 400 एकड़ वन भूमि थी. प्लांट के शेयर होल्डिंग की जिम्मेवारी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन को दी गई थी. यह 4000 मेगावाट का पावर प्लांट होगा. स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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तेनुघाट पावर प्लांट : तेनुघाट पावर प्लांट के विस्तारीकरण को लगभग डेढ़ साल पहले कैबिनेट से स्वीकृति मिली. अब तक काम आगे नहीं बढ़ा. विस्तारीकरण के तहत 660-660 मेगावाट की दो यूनिटें लगाई जानी थी. प्लांट के लिये राजबार कोल ब्लॉक आबंटित भी किया गया. इसका माइनिंग प्लन भी कोल मंत्रालय को भेजा गया. डेढ़ साल से स्थिति जस की तस है.

किस पावर प्लांट में कितना होता निवेश

  • तिलैया अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट : 4000 मेगावाट: 24 हजार करोड़ रुपये.
  • देवघर अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट : 4000 मेगावाट: 24 हजार करोड़ रुपये.
  • टीवीएनएल : 1320 मेगावाट : 7920 करोड़

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