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झारखंडः 12 मई को चुनाव तीसरे चरण की वोटिंग, 66.85 लाख वोटर तय करेंगे 67 प्रत्याशियों की किस्मत

आज शाम थमेगा चुनावी प्रचार का भोंपू  

झारखंड की चार सीटों (सिंहभूम, जमशेदपुर, धनबाद और गिरिडीह) पर 12 मई को होगा मतदान

चारों सीटों पर है भाजपा का कब्जा, महागठबंधन ने झोंकी पूरी ताकत

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Ranchi: लोकसभा चुनाव के छठे और झारखंड में तीसरे चरण के लिए 12 मई को वोट डाले जायेंगे. झारखंड में सिंहभूम, जमशेदपुर, धनबाद और गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में होने वाली वोटिंग को लेकर शुक्रवार शाम चार बजे प्रचार का शोर थम जायेगा.

इन चारों सीटो के लिए 67 प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं. चारों सीट पर शहरी इलाकों को छोड़ कर ग्रामीण इलाके में जातिवादी गोलबंदी और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण भी दिख रहा है. इसका लाभ किस दल को मिलेगा यह तो चुनाव नतीजे आने के बाद ही सामने आयेगा.

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चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा 

12 मई को झारखंड की जिन चार सीटों पर वोटिंग होनी है. उसमें फिलहाल भाजपा का कब्जा है. बीजेपी से छिनने के लिए महागठबंधन जोर लगा रहा है. चुनावी समर में इन सीटों पर भाजपा और महागठबंधन आमने-सामने है.

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गिरिडीह सीट पर आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी व झामुमो के जगरनाथ महतो के बीच सीधा मुकाबला है तो सिंहभूम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा-कांग्रेस की गीता कोड़ा आमने-सामने हैं.

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वहीं जमशेदपुर में भाजपा के विद्युतवरण महतो-झामुमो के चंपई सोरेन, धनबाद में भाजपा के पीएन सिंह-कांग्रेस के कीर्ति आजाद के बीच कांटे की टक्कर है.

झारखंड के चारों सीटों में कई सवाल है. जिसे वोटर हल करना चाहती है. इन इलाकों में भूख, गरीबी और बेरोजगारी जैसे सवाल से जनता तंग-तबाह है.

चारों लोकसभा क्षेत्र के मतदाता 21 वीं सदी के उभरते भारत में जनसरोकर के विषय को देखना चाहते हैं. जहां राष्ट्रवाद एक मुद्दा है इसके साथ ही क्षेत्र की समस्याओं को लेकर भी जबरदस्त वोटिंग की गुजांइश है.

ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को बुनियादी सवालों का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा को एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है. वहीं विपक्षी महागठबंधन को चुनाव प्रबंधन में और कई सीटों पर प्रचार में पिछड़ने का भी नुकसान उठना पड़ सकता है.

जमशेदपुर सीट पर भाजपा को कुर्मी वोटों और शहरी मतदाता का साथ मिलने की उम्मीद है. वही झामुमो को ग्रामीण वोटों पर भरोसा है. सिंहभूम सीट पर भाजपा के साथ उड़िया भाषा-भाषी लोगों का साथ मिलने की उम्मीद है, वही हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शमिल करने को लेकर हुए आंदोलन का साथ महागठबंधन को मिलने की संभावना है.

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साथ ही ईचा बंधा के संभावित डूब क्षेत्रों में कांग्रेस को जोरदार वोट मिलने की स्थिति बन गई है. गिरिडीह सीट पर महतो मतों का बंटवारा दिख रहा है. लेकिन जगरनाथ महतो को स्थानीय होने का लाभ भी मिलता दिख रहा है.

धनबाद सीट पर कभी भाजपा के पीएन सिंह तो कभी कांग्रेस के कीर्ति आजाद आगे नजर आ रहे हैं. लेकिन उनको कांग्रेस के बागियों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. मिथिला वोट के कीर्ति आजाद के साथ पूरी तरह जाने की संभावना है.

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