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JHARKHAND: जिस सचिवालय से तय होती है सरकार की चाल, वहां का ऐसा है हाल

स्टेनोग्राफर चाहिए 452 और तैनात हैं सिर्फ दो, कनीय सहायक के 425 पोस्ट भी खाली

Nikhil Kumar

Ranchi. जिस सचिवालय से झारखंड की सरकार चलती है, वहां कर्मचारियों की जबर्दस्त कमी है. आप हैरत करेंगे, लेकिन फैक्ट यही है कि पूरे सचिवालय में 32 विभागों में मात्र दो स्टेनो हैं. ये दोनों स्टेनो कार्मिक विभाग में तैनात हैं. बाकी विभागों में बगैर स्टेनो के काम चल रहा है. यह स्थिति पिछले आठ-दस वर्षों से हैं. झारखंड सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अंतर्गत 454 पद सृजित हैं, जिसके विरूद्ध 452 पद रिक्त पड़े हैं. पिछले आठ साल में सिर्फ दो स्टेनो नियुक्त किये जा सके. इनके नाम हैं-कमलेश कुमार और पंकज प्रकाश. इन्हें कार्मिक विभाग ने अपने ही अधीन रखा है.

स्टेनो के पदों पर बहाली नहीं होने का असर ऊपर के पदों पर भी पड़ रहा है. इसी वजह से सचिवालय में पीए के भी कई पद खाली हैं.स्टेनो को ही प्रमोट कर पीए बनाया जाता है,लेकिन वर्तमान में अधिकांश पीए प्रमोट होकर ऊपर के पदों पर चले गये हैं. ऐसे में सारे विभागों में अभी पर्सनल असिसटेंट के पद खाली हैं.

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दो बार परीक्षा हुई मिले सिर्फ दो

झारखंड सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अंतर्गत स्टफ सेलेक्शन कमीशन की ओर से दो नियुक्ति परीक्षा आयोजित करायी गयी. पहली परीक्षा वर्ष 2013 और दूसरी परीक्षा 2016 में आयोजित की गयी. दोनों बार एसएससी ने 250 से 300 पदों के लिए वैंकेसी निकाली थी. लेकिन टंकण दक्षता परीक्षा के आधार पर वर्ष 2013 में मात्र और 2016 में भी मात्र एक की अनुशंसा ही राज्य कर्मचारी चयन आयोग द्वारा सरकार के समक्ष की गयी. इस तरह दो परीक्षाओं में महज दो अभ्यर्थियों को ही नौकरी मिल पायी. सूत्रों का कहना है कि पहले तो तकनीकी परीक्षा होने की वजह से अभ्यर्थी कम मिलते हैं. उसपर परीक्षा के लिए नियमावली कठिन होने की वजह से इसमें पास होना मुश्किल है.

क्या है काम

स्टेनोग्राफर के समक्ष कई काम होते हैं. सचिवालय में वरीय अधिकारियों के साथ इन्हें टैग किया जाता है. आशुलिपिक सेवा में इसी पद पर नियुक्ति होती है. आशुलिपिक सेवा के कर्मियों पर अधिकारियों के लिए आाने वाले टेलीफोन को सुनने, डिक्टेशन लेने, फाइल की ड्राफ्टिंग करने, बफ शीट लिखने आदि की जिम्मेवारी होती है. हर विभाग में एक स्टेनो, पीए, पीपीएस का होना जरूरी है, लेकिन इनकी कमी से कार्य प्रभावित हो रहे हैं.

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लिपिकीय सेवा में भी बड़े पैमाने पर पद रिक्त हैं. झारखंड सचिवालय लिपिकीय सेवा के अधीन कनीय सचिवालय सहायक के लिए 524 पद सृजित हैं जिसके विरुद्ध फिलहाल 99 कर्मी ही काम कर रहे हैं. बाकी 425 पद रिक्त हैं. अधिकांश कर्मी कनीय सचिवालय सहायक के पद पर प्रोन्नत हो गये हैं, वहीं कनीय सचिवालय सहायक के पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी. पदों के बड़े पैमाने पर रिक्त होने के कारण सरकार के स्तर पर इसकी समीक्षा हुई थी. इसके बाद नियुक्ति नियमावली में संशोधन की आवश्यकता हुई. यह बात सामने आयी कि नियुक्ति नियमावली के पेंच के कारण नियुक्तियां लटक रही हैं.

सीएम के निर्देश के बाद अब हुआ बदलाव

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कनीय सचिवालय सहायक के पदों के रिक्त रहने की समीक्षा की थी. सीएम ने पूछा था कि आखिर किन वजहों से झारखंड कर्मचारी चयन आयोग नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर पा रहा है. अधिकारियों ने नियुक्ति नियमावली में संशोधन की जरूरत बतायी थी. इसके बाद कार्मिक विभाग ने नये सिरे से झारखंड सचिवालय लिपिकीय सेवा से संबंधित नियमावली 2021 लाकर सरकार से मंजूरी ली है. अब माना जा रहा है कि इस पद पर नियुक्ति शुरू की जा सकेगी.

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