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झारखंडः हड़ताल.. हड़ताल.. हड़ताल.. कुपोषित बच्चों को भोजन नहीं, गरीब बच्चों को शिक्षा नहीं…

कैसा होगा विकासः ग्राउंड लेवल पर काम करनेवाले 1.75 लाख सरकारी कर्मियों ने हड़ताल की ठानी 

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Ranchi: राज्य में विकास के दावों के बीच खबर यह है कि ग्राउंड लेवल पर काम करनेवाले करीब 1.75 लाख कर्मी हड़ताल पर हैं. इनके हड़ताल पर जाने से प्रखंड स्तर पर काफी दिक्कतों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है. इनमें से लगभग सभी रघुवर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि ये लोग पहली बार हड़ताल पर जा रहे हैं. सभी पहले भी आंदोलनरत रहे हैं और इन्होंने हड़ताल की है. हड़ताल पर जाने के बाद सरकार से इनकी वार्ता हुई है. लेकिन सरकार से वार्ता के दौरान सरकार ने जो वादा इनसे किया, वो पूरा नहीं हुआ.

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लिहाजा अब ये सारे कर्मी रघुवर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं और आंदोलनरत हैं. चुनावी मौसम में अब सरकार इनके लिए क्या करती है यह देखने वाली बात होगी. लेकिन सच यह है कि इनके हड़ताल पर जाने से ग्राउंड लेवल पर आम पब्लिक को काफी परेशानी और दिक्कत हो रही है.

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पारा टीचर

राज्य के लगभग 67 हजार पारा शिक्षक लंबे समय से आंदोलनरत हैं. पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन से पारा शिक्षकों ने राज्य में फिर से आंदोलन की शुरुआत की. इस दिन जेल भरो आंदोलन पारा शिक्षकों ने 23 जिलों में किया, जिसमें लगभग 64 हजार पारा शिक्षक शामिल हुए.

रांची जिला में एसडीओ से अनुमति नहीं मिलने के कारण रांची जिला के तीन हजार पारा शिक्षक जेल भरो आंदोलन में शमिल नहीं हो पाये. बाकी सभी 23 जिलों में पारा शिक्षक जेल भरो आंदोलन में शामिल हुए. 12 सितंबर को प्रधानमंत्री रांची में रहेंगे. उनके कार्यक्रम के दौरान पारा शिक्षकों की ओर से तिरंगा के साथ न्याय मार्च निकाला जायेगा.

पारा शिक्षकों की मुख्य मांग 17 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री के साथ हुए समझौते को लागू करना है. पारा शिक्षकों के लिए स्थायीकरण नियमावली बनाने और वेतनमान तय करना है.

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आंगनबाड़ी कर्मी

झारखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से राजभवन के समक्ष 21 अगस्त से आंदोलन जारी है. राज्य में आंगनबाड़ी कर्मियों के आंदोलन में चले जाने से राज्य में कृमि मुक्ति दिवस पर विशेष प्रभाव पड़ा. स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसके लिए कोई वैकिल्पक व्यवस्था भी नहीं की गयी है. राज्य में सेविका, सहायिका और पोषण सखी इस आंदोलन का हिस्सा हैं.

सेविकाओं की संख्या 38,432, सहायिका की संख्या 38,400 और पोषण सखी की संख्या 12 हजार है. कुल मिला कर लगभग 88 हजार. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जनवरी 2018 में आंगनबाड़ी बहनों के साथ ही समझौता किया था. लेकिन दुखद है इन समझौतों को भी सरकार लागू नहीं कर सकी.

इनकी मांग है कि सरकार इनका स्थायीकरण करे,  स्थायीकरण जब तक नहीं होता तब तक न्यूनतम वेतन दिया जाये, आंगनबाड़ी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण समेत अन्य मांग है.

पंचायत सचिवालय कर्मी

18,000 पंचायत सचिवालय कर्मी भी आंदोलन की राह में हैं. झारखंड राज्य पंचायत सचिवालय स्वयं सेवक संघ की ओर से भी आंदोलन की रणनीति तय कर दी गयी है. इसके तहत राज्य के 18 हजार पंचायत सचिवालय कर्मी आंदोलन करेंगे.

आठ सितंबर को पंचायत सचिवालय कर्मी सभी विधायकों को ज्ञापन देंगे. 19 सितंबर को मोरहाबादी से भिक्षाटन करते हुए पंचायत सचिवालय कर्मी भाजपा कार्यालय आयेंगे और जमा की हुई राशि भाजपा कार्यालय में दे देंगे.

इसकी जानकारी देते हुए संघ के अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने बताया कि भिक्षाटन की राशि भाजपा को देने का मतलब यह है कि हम सरकार को दिखाना चाहते है वो हमें पैसे नहीं दे सकती है तो हम भी भीख मांग कर उन्हें पैसे देंगे. इनकी प्रमुख मांग प्रोत्साहन राशि हटा कर मानदेय देना है.

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राजस्व कर्मी

राज्य भर के करीब 2000 राजस्व कर्मी हड़ताल पर हैं. अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गये झारखंड राज्य राजस्व उपनिरीक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह का कहना है कि 2018 में सरकार के आश्वासन को बीते 8 महीना हो चुका है. लेकिन उनकी मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया है.

इसी वजह से कर्मचारी संघ एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया. संघ के प्रमुख मांगों में राजस्व उपनिरीक्षकों का न्यूनतम ग्रेड पे 2400 रुपये देने के साथ तीन वर्षों के बाद ग्रेड पे 2800 रुपये देना, राजस्व प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना.

अंचल निरीक्षकों के सीधी भर्ती पर रोक लगाते हुए 50% पदों पर वरीयता एवं 50% सीमित परीक्षा कर प्रोन्नति देने, सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपनिरीक्षकों के कार्य अवधि को 5 वर्ष निर्धारित करने, संघकर्मियों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने सहित कई मांग शामिल है.

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