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झारखंड राज्य हज कमेटी को भंग कर नयी कमेटी का गठन होः हाई कोर्ट

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Ranchi: झारखंड राज्य हज कमेटी के गठन में हज कमेटी अधिनियम 2002 का अनुपालन नहीं करने को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कि गयी थी. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश शंकर ने आदेश दिया कि हज कमेटी को भंग करते हुए नयी कमेटी का गठन जल्द किया जाए. इसमें हज कमेटी अधिनियम 2002 का अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है. सरकार की ओर से पक्ष रख रहे महाधिवक्ता अजित कुमार ने कोर्ट में खुद यह बात स्वीकार की कि याचिकाकर्ता की ओर से हज कमेटी को लेकर जो सवाल उठाये गये हैं, वो सही हैं. महाधिवक्ता अजित कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से हज कमेटी के गठन में चूक हुई है. अधिनियमों का सही से पालन नहीं हुआ है. याचिकाकर्ता की ओर से महाधिवक्ता मोख्तार खान ने पक्ष रखा.

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कोटिवार सदस्यों की नियुक्ति हो

जस्टिस राजेश शंकर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ओर से पहले की सुनवाई में जैसे तैसे जवाब दिया गया है. ऐसे में जल्द से जल्द कोटिवार सदस्यों की नियुक्ति संबधी शपत पत्र दाखिल करने कहा गया. कमेटी में मुस्लिम विद्वान कोटे से तीन सदस्य, प्रशासनिक सेवा, फाइनेंस, शिक्षा, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों के आधार पर पांच लोगों को सदस्य बनाना है. इसके साथ ही संसद, विधानसभा, विधान परिषद् से तीन सदस्यों को कमेटी में शामिल करना है.

खाली हैं कई पद

वर्तमान में हज कमेटी में हज कमेटी अधिनियम 2002 का अनुपालन नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता एस अली ने जानकारी दी कि कमेटी का गठन तो किया जा रहा था, लेकिन अधिनियमों का पालन नहीं हो रहा था. जैसे मुस्लिम विद्वान कोटे से तीन सदस्यों की जगह दो सदस्य बनाये गये और दोनों सदस्य मुस्लिम विद्वान हैं. इसका उल्लेख अधिसूचना में नही है. इसके साथ ही पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, शिक्षा, कलचर और समाजिक कार्यों से 7 लोगों को सदस्य बनाना है. लेकिन इनकी जगह पांच सदस्य बनाये गये हैं. विधानसभा, सांसद, विधान परिषद् से तीन सदस्यों को कमेटी में शामिल करना है. इसमें राज्यसभा और विधानसभा के सदस्यों को लिया गया, जबकि विधान परिषद् के कोटे को विधानसभा से भरना था, जिसे खाली छोड़ दिया गया.

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